सलाह / धर्मांतरण कर हिंदू लड़की से शादी करने वाले युवक से कोर्ट ने कहा- महान प्रेमी नहीं, निष्ठावान पति बनो



Supreme court advises young man to be a loyal husband
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Supreme court advises young man to be a loyal husband

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- वह अंतर धार्मिक या अंतर जातीय विवाह के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसे युवती के भविष्य की चिंता
  • छत्तीसगढ़ में मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर प्रेमिका से शादी की, फिर मुस्लिम बना

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 11:38 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अंंतर-धार्मिक विवाह के मामले में सुनवाई के दौरान युवक को महान प्रेमी नहीं, बल्कि निष्ठावान पति बनने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि वह अंतर धार्मिक या अंतर जातीय विवाह के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसे युवती के भविष्य की चिंता है।


सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को छत्तीसगढ़ के अंतर-धार्मिक विवाह का विवादित मामला सुनवाई के लिए आया। मामला हिंदू लड़की के एक मुस्लिम युवक से शादी का है। युवक का कहना है कि उसने महिला के परिवार द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद हिंदू धर्म अपना लिया। जबकि महिला के परिवार का आरोप है कि धर्म परिवर्तन को लेकर झूठ कहा जा रहा है।

 

पिछली बार सुप्रीम काेर्ट के समक्ष पिता के साथ रहने की इच्छा जता चुकी हिंदू लड़की अब अपने मुस्लिम पति के साथ रहना चाहती है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उसे पति के साथ रहने की अनुमति दी थी, जिसके खिलाफ लड़की का पिता सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जस्टिस अरुण मिश्रा और एमआर शाह की बेंच ने लड़की के पति और छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब मांगा है। युवती के पति की ओर से सीनियर एडवाेकेट गोपाल शंकरनारायण ने इस पर आपत्ति जताई।


जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हम ऐसे रिश्तों के खिलाफ नहीं हैं। हमें चिंता है कि लड़की को सुरक्षा कैसे दें? शंकरनारायण ने कहा कि उसे अपने पिता के अलावा किसी से सुरक्षा की जरूरत नहीं है। इस पर पिता की ओर से सीनियर वकील मुकुल राेहतगी ने कहा कि युवक फिर से इस्लाम कबूल कर चुका है। आपने आर्य समाज मंदिर में शादी के लिए नाम बदल दिया। क्या इसके लिए कानूनी कदम उठाए हैं?

 

रोहतगी ने कहा कि यह एक हिंदू लड़की को फंसाने का रैकेट है। इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हम अंतरजातीय और अंतर धार्मिक विवाह के खिलाफ नहीं हैं। केवल लड़की की सुरक्षा चाहते हैं। पति की ओर से अन्य वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हदिया केस में भी खास तरह की व्यवस्था दी थी। 


इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हम कानून पर नहीं जाना चाहते। अगर पति ने उस युवती काे छोड़ दिया तो? हमें सिर्फ लड़की के भविष्य की चिंता है। हम अंतर धार्मिक विवाह के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि ऐसे विवाह को प्रोत्साहित करना चाहिए। तथाकथित उच्च और निम्न जाति के बीच विवाह समाजवाद के लिए अच्छे हैं। कई बार गलत इरादों के चलते किए गए विवाह में पुरूषों द्वारा महिलाओं को छोड़ दिया जाता है। हमारी चिंता उस बात को लेकर है।

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