सीबीआई विवाद / आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, पद से हटाने का किया था विरोध



आलोक वर्मा। आलोक वर्मा।
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आलोक वर्मा।आलोक वर्मा।

  • वर्मा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच रिपोर्ट पेश कर चुका है केंद्रीय सतर्कता आयोग
  • आयोग की जांच रिपोर्ट पर वर्मा ने भी अपना जवाब कोर्ट में दाखिल किया था
  • स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना पर घूस लेने का आरोप, अस्थाना ने वर्मा पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया था
  • केंद्र ने 23 अक्टूबर को वर्मा और अस्थाना को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजा था

Dainik Bhaskar

Nov 29, 2018, 06:27 AM IST

नई दिल्ली. रिश्वतखोरी मामले में सीबीआई चीफ आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की। वर्मा के वकील फली एस नरीमन ने अपनी दलील में कहा कि उनके मुवक्किल से सीबीआई निदेशक का कामकाज छीनना गैरकानूनी है। नियमानुसार सीबीआई चीफ का कार्यकाल दो साल का होता है। इससे पहले उसे बदला नहीं जा सकता।   सुनवाई कर रही बेंच में शामिल जस्टिस केएम जोसेफ ने नरीमन से सवाल किया कि मान लीजिए कोई रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा जाता है तब क्या होगा? इस पर नरीमन ने कहा कि तब कोर्ट की अनुमति ली जाएगी। जस्टिस जोसेफ ने पूछा क्या ऐसे व्यक्ति को एक भी मिनट पद पर रहना चाहिए? इस मामले में अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।

 

वर्मा के तबादले में नियमों का पालन नहीं हुआ : वकील

नरीमन ने कहा कि प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस की कमेटी की सिफारिश पर सीबीआई निदेशक की नियुक्ति होती है। उसका कार्यकाल कम से कम दो साल होता है। अगर इस दौरान असाधारण स्थितियां बनती हैं और सीबीआई निदेशक का तबादला किया जाना हो तो कमेटी की अनुमति लेने का प्रावधान है। नरीमन ने कहा कि उनके मुवक्किल के मामले में तबादला नियमों का पालन नहीं किया गया।

 

सिब्बल ने कहा- सीवीसी को तबादले का हक नहीं

इससे पहले सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि मुख्य सतर्कता आयोग (सीवीसी) सिर्फ जांच की निगरानी कर सकता है। वह किसी को छुट्टी पर भेजने की सिफारिश कर सकता है। केंद्र ने सीवीसी की सिफारिश को मानते हुए वर्मा को छुट्टी पर भेजा, जो गैरकानूनी था।

 

काॅमन काज ने कहा- कानून की अनदेखी नहीं की जा सकती

एनजीओ कॉमन कॉज के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि कानून में एक प्रक्रिया तय है। उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यहां तक की तबादले के पहले भी कमेटी से मशविरे की बात कही गई है। एनजीओ ने भी वर्मा से सीबीआई निदेशक का काम छीनने को चुनौती दी है।


अस्थाना से जुड़ी केस फाइल देख सकते हैं वर्मा
इस बीच, बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्मा और संयुक्त निदेशक एके शर्मा को इजाजत दी कि वे सीवीसी दफ्तर में स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मामले की फाइल देख सकते हैं। ये दस्तावेज सीवीसी के पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच के लिए भेजे गए हैं। इसके अलावा अदालत ने राकेश अस्थाना के खिलाफ कार्रवाई पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश को 7 दिसंबर तक बढ़ा दिया।

 

वर्मा का जवाब लीक होने पर नाराज हुई थी अदालत
वर्मा की याचिका पर पिछली सुनवाई 20 नवंबर को हुई थी। अदालत ने वर्मा का जवाब लीक होने पर नाराजगी जाहिर की थी। कोर्ट ने कहा था कि आप लोगों में से कोई भी सुनवाई के लायक नहीं है।

 

माेइन कुरैशी के मामले की जांच से शुरू हुआ रिश्वतखोरी विवाद
1984 आईपीएस बैच के गुजरात कैडर के अफसर अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। कुरैशी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग को आरोपों में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी। सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। इनमें 3 करोड़ एडवांस दिए गए। 2 करोड़ रुपए बाद में देने थे। वहीं, अस्थाना का आरोप है कि सीबीआई चीफ वर्मा ने ही 2 करोड़ रुपए की घूस ली।

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