गुजरात दंगों से जुड़े 9 में से 8 केस बंद:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इतना वक्त बीतने के बाद इन पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं

5 महीने पहले

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े 9 में से 8 केस बंद करने का आदेश दिया है। इन सभी मामलों से जुड़ी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित थीं। CJI जस्टिस यूयू ललित की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने मंगलवार को कहा कि इतना समय गुजरने के बाद इन मामलों पर सुनवाई करने का कोई मतलब नहीं है। वहीं, एक अन्य मामले में कोर्ट ने एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को राहत के लिए अपील करने की इजाजत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुजरात दंगों से जुड़े 9 में से 8 केस में निचली अदालतें फैसला सुना चुकी हैं। इनमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC की याचिका भी शामिल है, जिसमें दंगों के दौरान हुई हिंसा की जांच की मांग की गई थी। कोर्ट ने दंगा पीड़ितों और सिटीजंस फॉर जस्टिस नाम के NGO की रिट याचिका पर भी विचार किया। NGO ने 2003-2004 में दाखिल याचिका में दंगों की जांच गुजरात पुलिस से लेकर CBI को सौंपने की मांग की थी।

9 में से 8 केस का ट्रायल पूरा, एक की सुनवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस यूयू ललित की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच में जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस जेबी पारदीवाला शामिल हैं। बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही गुजरात दंगों से जुड़े 9 केस की जांच के लिए SIT गठित कर चुका है। इनमें से 8 केस का ट्रायल पूरा हो चुका है। नारोदा गांव से जुड़े मामले की सुनवाई अभी जारी है। गुजरात दंगों से जुड़े 9 अहम केस नीचे दिए ग्राफिक में जान सकते हैं...

बेंच ने कहा, 'पीड़ित परिवारों के वकील अपर्णा भट, ऐजाज मकबूल और अमित शर्मा भी SIT के बयान से सहमति जता चुके हैं। ऐसे में सारे मामलों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए अदालत यह मानती है कि इन याचिकाओं पर आगे विचार करने की जरूरत नहीं है।'

नारोदा केस में SIT कानूनी कदम उठा सकेगी
SIT के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि 9 मामलों में से केवल नारोदा गांव इलाके में हुई हिंसा का मामला ही लंबित है और उसमें भी अंतिम दलीलें ही बाकी हैं। बाकी 8 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है और वे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपीलेट स्टेज में हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून के मुताबिक नारोदा गांव केस का ट्रायल जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की बनाई SIT इस केस में कानून के अनुसार जरूरी कदम उठा सकती है।'

तीस्ता सीतलवाड़ को राहत के लिए अपील की इजाजत
सुनवाई के दौरान तीस्ता सीतलवाड़ की वकील अपर्णा भट ने कहा कि उनकी क्लाइंट कस्टडी में है, इसलिए वे उनसे बात नहीं कर पा रही हैं। इस पर कोर्ट ने सीतलवाड़ को सक्षम अधिकारियों के सामने राहत के लिए आवेदन करने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने कहा, 'सीतलवाड़ की तरफ से जब भी आवेदन आएगा, उस पर कानून के मुताबिक विचार किया जाएगा।' इसके साथ ही कोर्ट ने इस केस का भी निपटारा कर दिया।

अब 4 पॉइंट में गुजरात दंगों और इन पर हुई कानूनी कार्रवाई के बारे में जान लीजिए...

1. गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस का कोच जलाया गया
गुजरात के गोधरा स्टेशन पर 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के S-6 डिब्बे में आग लगा दी गई थी। आग लगने से 59 लोग मारे गए थे। ये सभी कारसेवक थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे। इसके बाद गुजरात में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। गोधरा में सभी स्कूल-दुकानें बंद कर दी गईं। कर्फ्यू लगा दिया गया। पुलिस को दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए।

गुजरात के गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के S-6 कोच को बाहर से आग लगाई थी, जिससे अंदर बैठे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला था।
गुजरात के गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के S-6 कोच को बाहर से आग लगाई थी, जिससे अंदर बैठे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला था।

2. गोधरा के बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा फैली
गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे। इन दंगों में 1,044 लोग मारे गए, जिनमें 790 मुसलमान और 254 हिंदू थे। उपद्रवियों ने पूर्वी अहमदाबाद स्थित अल्पसंख्यक समुदाय की बस्ती 'गुलबर्ग सोसाइटी' को भी निशाना बनाया था। इसमें जकिया जाफरी के पति पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे। इनमें से 38 लोगों के शव बरामद हुए थे, जबकि जाफरी सहित 31 लोगों को लापता बताया गया था।

यह फोटो पूर्वी अहमदाबाद में अल्पसंख्यक समुदाय की बस्ती 'गुलबर्ग सोसाइटी' की है, जिसे दंगों के दौरान निशाना बनाया गया था। इसमें 69 लोगों की मौत हुई थी।
यह फोटो पूर्वी अहमदाबाद में अल्पसंख्यक समुदाय की बस्ती 'गुलबर्ग सोसाइटी' की है, जिसे दंगों के दौरान निशाना बनाया गया था। इसमें 69 लोगों की मौत हुई थी।

3. सुप्रीम कोर्ट ने दंगों की जांच के लिए SIT बनाई
2008 में सुप्रीम कोर्ट ने SIT का गठन किया था। कोर्ट ने SIT से इस मामले में हुईं तमाम सुनवाइयों पर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। बाद में जकिया की शिकायत की जांच भी SIT को सौंपी गई। SIT ने मोदी को क्लीन चिट दी और 2011 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIT ने मजिस्ट्रेट को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी।

2013 में जकिया ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हुए मजिस्ट्रेट के सामने याचिका दायर की थी। मजिस्ट्रेट ने यह याचिका खारिज कर दी। इसके बाद जाकिया ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 2017 में मजिस्ट्रेट का फैसला बरकरार रखा।

4. SIT ने PM मोदी को क्लीन चिट दी, SC ने बरकरार रखी
जकिया ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 24 जून 2022 को जकिया जाफरी की तरफ से PM मोदी के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जकिया की याचिका में मेरिट नहीं है।