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10 साल की सजा काट चुके कैदियों को मिले जमानत:सुप्रीम कोर्ट की राय- अपील पर जल्द सुनवाई नहीं हो रही तो बेल देनी चाहिए

नई दिल्ली3 महीने पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि 10 साल की सजा पूरी कर चुके उन कैदियों को जमानत दे दी जानी चाहिए, जिनकी अपील पर आने वाले दिनों में सुनवाई नहीं होने वाली है। यह छूट केवल उन्हीं मामलों में ही मिलनी चाहिए, जिनमें कैदी को जमानत न देने का ठोस कारण न हो।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका की बेंच ने उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की याचिकाओं पर विचार कर रही थी, जिनकी अपील कई हाईकोर्ट्स में पेंडिंग है।

6 हाईकोर्ट में 5470 मामले लंबित
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र के तौर पर नियुक्त एडवोकेट गौरव अग्रवाल ने बेंच को बताया कि उम्रकैद के दोषियों की पहचान करने के दौरान 6 हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, हलफनामे दायर किए गए थे। जिनके एनालिसिस से पता चला कि हिरासत में लिए गए 5740 मामले पेंडिंग हैं, जिनमें डिवीजन बेंच अपील और सिंगल बेंच अपील भी शामिल है।

बिहार में लगभग 268 अपराधियों के मामलों पर समय से पहले रिहाई के लिए विचार किया जा रहा है। इसी तरह की कवायद ओडिशा और इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी की गई थी। जिनमें 385 दोषियों, जिन्हें 14 साल से ज्यादा समय तक हिरासत में रखा गया था, उनकी अपीलें पेंडिंग हैं।

कोर्ट ने किए दो प्रयास
पहला- जो दोषी 10 साल से ज्यादा सजा काट चुके हैं, तो ऐसी स्थिति में जमानत देने से इनकार करने का कोई ठोस कारण मौजूद न हो, तो उन्हें जमानत दी जाए।

दूसरा- उन मामलों की पहचान जहां दोषियों ने 14 साल की सजा पूरी कर ली है, तब एक निश्चित समय में समय से पहले रिहाई पर विचार करने के लिए सरकार को मामला भेजा जा सकता है, भले ही अपील लंबित हो या नहीं।

हालांकि बेंच को बताया गया था कि प्ली बार्गेनिंग, अपराधों की कंपाउंडिंग और अपराधियों की परिवीक्षा प्री-ट्रायल प्रावधान हैं जिन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है।

जनवरी में होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ये निर्देश पटना हाईकोर्ट और पैरा मैटेरिया के आधार पर दूसरे हाई कोर्ट पर भी लागू होंगे। हालांकि इसके लिए 10 साल और 14 साल से ज्यादा समय से सजा काट रहे लोगों का डेटा ही लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर डेटा कलेक्ट करने के लिए हाईकोर्ट और स्टेट लॉ सर्विस कमेटी को चार महीने का समय दिया था। अब इस पर अगली सुनवाई जनवरी 2023 के आखिरी हफ्ते में होगी।