नए संसद भवन पर लगे शेर आक्रामक नहीं:SC ने आपत्ति वाली याचिका खारिज की, कहा- यह देखने वाले के नजरिए पर निर्भर

नई दिल्ली4 महीने पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें संसद की नई इमारत पर लगे शेरों के डिजाइन पर आपत्ति जताई गई थी। याचिका में कहा गया था कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के ऊपर लगे राष्ट्रीय चिह्न में शेरों का डिजाइन सारनाथ म्यूजियम में रखे गए चिह्न पर बने शेरों से अलग है और दोनों डिजाइनों में शेरों की जेस्चर भी एक-जैसी नहीं है। जस्टिस एमआर शाह और कृष्ण मुरारी की बेंच ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि शेर कैसे दिखते हैं, यह देखने वालों के नजरिए पर निर्भर करता है।

दरअसल, पीएम मोदी ने 11 जुलाई को नए संसद भवन की छत पर स्थापित 21 फुट ऊंचे अशोक स्तंभ का अनावरण किया था। तब से इसे लेकर विवाद चल रहा था। मामले में दो एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अल्दानिश रीन और रमेश कुमार मिश्रा ने मामले में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि नए चिन्ह में राज्य प्रतीक अधिनियम के तहत डिजाइन में किसी तरह का बदलाव नहीं हो सकता है।

याचिकाकर्ता का दावा- संसद पर लगे ज्यादा आक्रामक
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने संसद पर लगे अशोक स्तंभ में शेरों को आक्रामक बताया। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय प्रतीक की जो डिजाइन की गई है, उसमें किसी तरह का बदलाव या नयापन नहीं लाया जा सकता है। वकील ने यह भी तर्क दिया कि शेरों की मुर्ति में सत्यमेव जयते' का LOGO नहीं है। जिसपर कोर्ट ने कहा कि नए संसद भवन के ऊपर स्थापित किए गए अशोक स्तंभ भारत के राज्य प्रतीक अधिनियम, 2005 का उल्लंघन नहीं करता है।

मूल अशोक स्तंभ सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक का आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' है, इसका मतलब है- 'सत्य की ही विजय' होती है।
मूल अशोक स्तंभ सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक का आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' है, इसका मतलब है- 'सत्य की ही विजय' होती है।

विपक्ष ने अशोक स्तंभ में शेरों को क्रूर बनाने का लगाया था आरोप
विपक्ष ने अशोक स्तंभ की संरचना पर सवाल उठाया था और कहा था कि राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के चार शेरों की संरचना में फेरबदल कर संविधान का उल्लंघन किया गया है। विपक्ष के मुताबिक अशोक स्तंभ के शेरों को क्रूर और आक्रामक बनाया गया है। इसके लिए शेरों के मुख को और खुला दिखाया गया है, जबकि सारनाथ म्यूजियम में रखे मूल स्वरूप वाले अशोक स्तंभ में शेरों का मुंह उतना खुला नहीं है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि सारनाथ में अशोक के स्तंभ पर शेरों के चरित्र और प्रकृति को पूरी तरह से बदलना भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का एक बेशर्म अपमान है। वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि संसद और राष्ट्रीय प्रतीक भारत के लोगों का है, एक व्यक्ति का नहीं।

वहीं AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पीएम मोदी ने राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण करके गलत किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि संविधान- संसद, सरकार और न्यायपालिका की शक्तियों को अलग करता है। सरकार के प्रमुख के नाते संसद भवन के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण नहीं करना चाहिए था।

PM ने नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ का अनावरण किया

अशोक स्तंभ के अनावरण के बाद पीएम मोदी ने प्रतिमा के साथ फोटो भी खिंचवाई।
अशोक स्तंभ के अनावरण के बाद पीएम मोदी ने प्रतिमा के साथ फोटो भी खिंचवाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई में नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा 6.5 मीटर ऊंची और 9500 किलो वजन की है। इसे सपोर्ट करने के लिए स्टील का लगभग 6500 किलोग्राम वजनी सिस्टम भी बनाया गया है। पीएम के साथ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी भी मौजूद थे। पूरी खबर यहां पढ़ें...