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सूरत दुष्कर्म मामले में आसाराम की जमानत याचिका खारिज

2 वर्ष पहले
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  • आसाराम पर सूरत की दो बहनों ने दुष्कर्म के आरोप में मामला दर्ज कराया था
  • गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में 2015 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी

नई दिल्ली. आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। आसाराम ने गुजरात के सूरत दुष्कर्म मामले में जमानत मांगी थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने जमानत का विरोध किया। गुजरात सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सूरत दुष्कर्म मामले में 10 और गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। 

 

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पहले निचली अदालत गुजरात हाईकोर्ट की प्रथम दृष्टया टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना ट्रायल जारी रखे। 

 

गुजरात हाईकोर्ट में खारिज हुई थी जमानत याचिका
आसाराम को सूरत दुष्कर्म मामले में जेल में बंद हैं। जमानत के लिए उन्होंने 2015 गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन 26 मार्च को कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

 

क्या है मामला? 
मामला 6 साल पुराना है। आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं के खिलाफ सूरत की दो बहनों ने दुष्कर्म और गलत तरह से बंधक बनाने का आरोप लगाया था। पीड़ित छोटी बहन ने नारायण साईं के खिलाफ ठोस सबूत दिए थे और मौका-ए-वारदात को पहचाना था। बड़ी बहन ने आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। पुलिस ने पीड़ित बहनों के बयान और सबूतों के आधार पर केस दर्ज किया था। इसके बाद से ही आसाराम जेल में बंद हैं। 
       
दुष्कर्म के एक अन्य मामले में सजा काट रहा आसाराम
आसाराम अभी दुष्कर्म के एक अन्य मामले में सजा काट रहा है। जोधपुर की अदालत ने 2013 में 16 साल की एक लड़की के साथ दुष्कर्म करने के मामले में आसाराम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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