सुप्रीम कोर्ट / बेंच ने कहा- दुनिया में कहीं भी लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर में नहीं भेजा जाता



Supreme Court says, Nowhere in the world people sent to gas chambers to die
X
Supreme Court says, Nowhere in the world people sent to gas chambers to die

  • अटॉर्नी जनरल ने कहा- देश में ऐसा कोई कानून नहीं, जिसमें सीवेज में उतरने वाले की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया जा सके
  • शीर्ष अदालत ने कहा- संविधान में देश के हर नागरिक को समान बताया गया है, पर अधिकारी उन्हें समान सुविधाएं नहीं दे रहे हैं

Dainik Bhaskar

Sep 18, 2019, 09:28 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सीवेज में सफाई के दौरान दम घुटने से होने वाली मौतों को लेकर चिंता जाहिर की। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘दुनिया का कोई भी देश अपने किसी नागरिक को मारने के लिए गैस चैंबर में नहीं भेजता है। इस वजह से हर महीने चार-पांच व्यक्तियों की मौत हो रही है।’’

 

सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को अमानवीय बताया,जहां लोगों को जरूरी सुरक्षा उपकरणों के बना ही सफाई के लिए चैंबर में उतार दिया जाता है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस मामले में सरकार का पक्ष रखा। 

 

मजिस्ट्रेट खुद संज्ञान नहीं ले सकते हैं: अटॉर्नी जनरल

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि देश में ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसमें सफाई के लिए सीवेज में उतरने वाले की मौत के लिए उसके सुपरवाइजर, अधिकारी या ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया जा सके। ऐसे हादसों में मजिस्ट्रेटों को खुद से संज्ञान लेने का भी अधिकार नहीं है। ऐसे में किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है।

 

सफाईकर्मियों को जरूरी उपकरण क्यों नहीं दिए जा रहे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल से सवाल किया कि सीवेज या मैनहोल में अंदर उतरकर सफाई करने वालों को मॉस्क और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे जरूरी उपकरण क्यों नहीं दिए जा रहे हैं। बेंच ने यह भी कहा कि संविधान में देश के हर नागरिक को समान बताया गया है, पर अधिकारियों द्वारा उन्हें समान सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।

 

DBApp

 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना