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सुप्रीम कोर्ट / बेंच ने कहा- कोर्ट में बार-बार आने से तंग आ जाते हैं गवाह, लेकिन ये कड़वा सच



Adjournments in court proceedings hard reality: SC
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Adjournments in court proceedings hard reality: SC

  • बेंच ने कहा- सीआरपीसी का सही तरह से पालन किया जाए
  • अटॉर्नी जनरल ने कहा- पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई

Dainik Bhaskar

Oct 08, 2018, 08:48 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार-बार अदालत आने से गवाह तंग आ जाते हैं, लेकिन ये कड़वा जमीनी सच है। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा- न्यायिक कार्यवाही के स्थगित होने पर गवाहों को बयान दर्ज करने के लिए बार-बार अदालत आना पड़ता है। ये कठोर सच्चाई है। लेकिन, अगर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) का सही तरह से पालन किया जाए तो चीजें आसानी से हो सकेंगी। 

जेल सुधार के मसले पर बेंच ने की सुनवाई

  1. बेंच जेलों में सुधार के मामले पर सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने इसी साल जून में फरीदाबाद जेल का दौरा करने के बाद इस मुद्दे को उठाया था। सुनवाई के दौरान जब ट्रायल कोर्ट में गवाहों के बयान ना दर्ज होने की बात रखी गई तो बेंच ने कहा- अगर गवाहों के बयान नहीं दर्ज होंगे तो हम आदेश कैसे देंगे? 

  2. रिटायर्ड जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित ने जेल दौरे के बाद कहा था कि अदालत के िनर्देशों के बावजूद ऐसे मामले सामने आए, जिनमें समय ना होने के चलते कोर्ट में गवाहों से जिरह नहीं हो सकी। कार्यवाही के स्थगित होने के दौरान भी गवाहों को लगातार अदालत आना पड़ता है, ये नीति के खिलाफ है।

  3. न्यायाधीशों ने कहा था- इन हालात में इस बात पर नजर रखने की सख्त आवश्यकता है कि कोई भी गवाह बिना बयान दर्ज करा ना जाए।

  4. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि जेलों सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिटायर्ड जस्टिस अमिताव रॉय की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सलाहकार गौरव अग्रवाल ने कहा कि जेल दौरे के बाद न्यायाधीशों ने 14 मुद्दों को उठाया था। इनमें कारावास से जुड़े कुछ मामलों को नई गठित की गई कमेटी को भेजा जा सकता है। 

  5. 'वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था सुचारु नहीं'

    अटॉर्नी जनरल ने नाबालिगों के लिए सुधार गृहों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था सुचारु ना होने का भी जिक्र किया। इस पर बेंच ने कहा- देश की हर जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट दी गई है। लेकिन, यहां दो बातें हैं। कुछ जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इन्स्टॉल नहीं की गई है। कुछ जेलों में ये इन्स्टॉल की गई है तो वहां लोग जानते नहीं कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए। जब तक जेल प्रशासन अपने पास मौजूद चीजों का इस्तेमाल नहीं करेगा, तब तक ये कैसे होगा।

  6. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस मामले पर राज्यों को सहयोग करना चाहिए और ये तय करना चाहिए कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था पूरी तरह से सुचारु हो। बेंच ने कहा कि जेल सुधारों के संदर्भ में न्यायाधीशों द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर कमेटी गौर करेगी और कुछ मुद्दे अदालत देखेगी। बेंच ने सभी राज्यों को इस मामले में सहयोग के लिए कहा। अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को की जाएगी।

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