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पुरी की परंपरा नहीं टूटेगी:सुप्रीम कोर्ट ने आज रथ यात्रा निकालने की इजाजत दी; कहा- हर रथ को 500 से ज्यादा लोग ना खींचें, सभी का कोरोना टेस्ट भी हो

भुवनेश्वर5 महीने पहले
फोटो आज निकाली जाने वाली यात्रा के रथों की है। कोरोना की वजह से इस बार यात्रा में श्रद्धालु शामिल नहीं हो पाएंगे।
  • कोर्ट ने कहा- रथ यात्रा जिस वक्त निकाली जाए, उस वक्त पुरी में कर्फ्यू लगाया जाए
  • अदालत ने कहा- रथ यात्रा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो, लोगों को आने की इजाजत ना दी जाए

जगन्नाथ पुरी में आज रथयात्रा निकलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यात्रा की इजाजत दे दी है, श्रद्धालु शामिल नहीं हो पाएंगे। कोर्ट ने ओडिशा सरकार को निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान पुरी में कर्फ्यू लागू किया जाए। एक रथ को 500 से ज्यादा लोग ना खींचें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। अदालत ने कहा कि अगर हालात बेकाबू होते दिखें तो ओडिशा सरकार यात्रा को रोक सकती है। साथ ही कहा कि पुरी के अलावा ओडिशा में कहीं और यात्रा नहीं निकाली जाएगी।

रथयात्रा के लिए सुप्रीम कोर्ट का ओडिशा सरकार को आदेश
1. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए ऑर्डर में कहा गया- पुरी में बिना लोगों की भीड़ के रथ यात्रा को मंजूरी दी जा सकती है।
2. हर रथ को 500 से ज्यादा लोग नहीं खींच सकते। दो रथों को खींचने के बीच में एक घंटे का अंतर होना चाहिए। इन सभी का कोरोनावायरस का टेस्ट होना चाहिए।
3. रथ यात्रा के दौरान पुरी में कर्फ्यू लगाया जाए। रथों को खींचने वाले यात्रा से पहले, यात्रा के दौरान और यात्रा के बाद भी सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें।
4. रथ यात्रा में आने वाले सभी लोगों की रिकॉर्ड रखा जाए। मेडिकल टेस्ट के बाद उनकी सेहत की जानकारी को भी दर्ज किया जाए।

5. रथ यात्रा और सभी रस्मों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कवर करने की इजाजत दी जाए। सरकार क्रू के मुताबिक कैमरा लगाने की इजाजत दे। 

सुबह 9 बजे शुरू होगी रथ यात्रा, भगवान खिचड़ी खाकर निकलेंगे

  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही पुरी में जय जगन्नाथ के नारे गूंजने लगे। भीड़ जमा न हो इसलिए शहर में शाम 4 बजे से धारा 144 लागू कर दी गई। शाम होते ही नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथ को मंदिर के सिंह द्वार तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई। नंदीघोष भगवान जगन्नाथ का रथ है। तालध्वज पर बलराम विराजेंगे और दर्पदलन पर सुभद्रा।
  • तीनों रथों को खींचने के लिए शंखचूड़ा नागिन, वासुकी नाग और स्वर्णचूड़ा नागिन लाई गईं। यह नारियल से बनी रस्सियों के नाम हैं।
  • मंगलवार को रथयात्रा की शुरुआत सुबह 9 बजे से होगी। भगवान जगन्नाथ खिचड़ी खाकर निकलेंगे। पुरी महाराज दिव्य सिंह देव छेरा पहरा यानी रथ की सफाई रात एक बजे शुरू करेंगे।
  • मंदिर के सेवादार राजेंद्र मुदाली ने बताया महाप्रभु की मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाने की यात्रा दोपहर दो से ढाई बजे शुरू होगी। मंदिर की दूरी साढ़े तीन किलोमीटर है। जहां सूर्यास्त होगा, यात्रा वहीं रुक जाएगी। रथ खींचने वाले सेवादारों का कोरोना टेस्ट हो चुका है। सभी निगेटिव हैं। 
यह फोटो 1960 में हुई जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा की है। साभारः इंडियन हिस्ट्री पिक्स
यह फोटो 1960 में हुई जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा की है। साभारः इंडियन हिस्ट्री पिक्स

सीएम पटनायक बोले- दुनिया हमें देख रही है, हमें नजीर पेश करनी चाहिए

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक यात्रा की तैयारियों को लेकर मीटिंग की। ओडिशा सरकार ने पुरी में आज रात 9 बजे से बुधवार दोपहर दो बजे तक कम्पलीट लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है। सीएम पटनायक ने कहा कि यात्रा के दौरान हम लोग बेहद सावधानी बरतेंगे। दुनिया हमारी तरफ देख रही है। हमें अनुशासन बनाए रखना है।

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर हमें दुनिया के सामने नजीर पेश करनी चाहिए। गृहमंत्री अमित शाह ने ओडिशा के लोगों की बधाई दी। कहा कि पूरा देश सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश है। 

भगवान जगन्नाथ 7 दिन मौसी के घर रुकते हैं
जगन्नाथ रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होती है। यह मुख्य मंदिर से शुरू होकर 2.5 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर में जाती है। यह भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। जहां भगवान 7 दिन तक आराम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल दशमी को रथयात्रा फिर जगन्नाथ के मुख्य मंदिर पहुंचती है। यह बहुड़ा यात्रा कहलाती है। स्कंदपुराण में लिखा है कि आषाढ़ मास में पुरी तीर्थ में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन का फल मिलता है और भक्तों को शिवलोक की प्राप्ति होती है।

रथयात्रा से 15 दिन पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान को स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ बीमार होते हैं। इस वजह से उन्हें 15 दिन तक एकांतवास में रखा जाता है। इस दौरान कुछ पुजारी ही उनके पास होते हैं। उन्हें औषधियों और हल्के आहार का ही भोग लगाया जाता है। रथयात्रा से एक दिन पहले ही भगवान का एकांतवास खत्म होता है।

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