रिएल एस्टेट / सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों का फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा बरकरार रखा



Supreme Court uphold homebuyers financial creditor status under IBC
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Supreme Court uphold homebuyers financial creditor status under IBC

  • घर खरीदार बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे, उनके पास बैंकों के बराबर अधिकार रहेंगे
  • सरकार ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में पिछले साल संशोधन कर घर खरीदारों को फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा दिया था
  • 180 बिल्डरों ने संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, उनका कहना था कि विवाद निपटाने के लिए रेरा कानून ही पर्याप्त था

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2019, 05:16 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने दिवालिया प्रक्रिया में घर खरीदारों का फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा बरकरार रखा है। सरकार ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में संशोधन कर पिछले साल यह दर्जा दिया था। लेकिन, 180 बिल्डरों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिस पर शुक्रवार को फैसला आया। अदालत ने कहा कि जो असल खरीदार होंगे वे ही बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी लगा सकेंगे।

 

फाइनेंशियल क्रेडिटर के दर्जे से ग्राहकों को बैंकों के बराबर अधिकार मिलेंगे। बिल्डर दिवालिया होता है तो ग्राहकों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। वे दिवालिया प्रक्रिया में शामिल होकर अपनी रकम का दावा कर सकेंगे। 

 

प्रॉपर्टी डेवलपर्स और कंसल्टेंट्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रुके हुए प्रोजेक्ट पूरे होने में मदद मिलेगी। नेशनल रिएल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी के मुताबिक कर्जदाताओं और उपभोक्ताओं दोनों का फायदा होगा। उन्होंने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों को तीन अलग-अलग बॉडीज- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, रिएल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट (रेरा) और कंज्यूमर फोरम जाने की इजाजत दी है। इससे भ्रम की स्थिति बनेगी क्योंकि तीनों के फैसले अलग-अलग हो सकते हैं।

 

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