आम्रपाली मामले में कल फैसला सुनाएगी शीर्ष अदालत

3 वर्ष पहले
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  • शीर्ष अदालत ने 8 मई को आम्रपाली प्रोजेक्ट्स नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटिज को देने की बात कही
  • 10 मई को अथॉरिटिज ने इन लंबित प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में असहमति जाहिर की
  • अथॉरिटिज के इनकार के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था
  • आम्रपाली समूह पर क्रिकेटर एमएस धोनी ने भी गुमराह कर पेंटहाउस न देने का आरोप लगाया

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली बिल्डर की धोखाधड़ी के मामले में मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पूरे कर ग्राहकों को सौंपने के निर्देश दिए। कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप की कंपनियों के रेरा रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिए।

 

आम्रपाली ने फेमा का उल्लंघन किया: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस अरुण मिश्रा और यू यू ललित की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिए कि आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा, अन्य निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जाए। कोर्ट ने कहा है कि आम्रपाली ग्रुप ने फॉरेन एक्सजेंच मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) और एफडीआई के नियमों का उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि समय पर प्रोजेक्ट पूरे नहीं करने वाले बिल्डरों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

 

नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटीज ने आम्रपाली से सांठ-गांठ की: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के सभी प्रोजेक्ट की लीज भी रद्द कर दीं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटीज ने लीज जारी की थीं। अदालत ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को बकाया वसूली के लिए आम्रपाली ग्रुप की संपत्तियां बेचने का अधिकार नहीं है। यह भी कहा कि इन अथॉरिटीज ने आम्रपाली से सांठ-गांठ कर ग्राहकों की रकम डायवर्ट करने में साथ दिया। अथॉरिटीज ने कानून के मुताबिक काम नहीं किया। दोनों को निर्देश दिया कि आम्रपाली के प्रोजेक्ट्स में पहले से रह रहे ग्राहकों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिए जाएं।

 

आम्रपाली के मामले में अदालत ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रखा था। नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटीज ने कहा था कि आम्रपाली के प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए उनके पास संसाधन और निर्माण कार्य की विशेषज्ञता नहीं है। दोनों ने उच्च स्तरीय समिति की निगरानी में किसी प्रतिष्ठित बिल्डर को आम्रपाली के प्रोजेक्ट सौंपने का पक्ष लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आम्रपाली के प्रोजेक्ट संभालने के लिए एनबीसीसी एक विकल्प हो सकता है।

 

प्रवर्तन निदेशालय पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर चुका
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आम्रपाली ग्रुप और प्रमोटरों के खिलाफ इसी महीने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। आम्रपाली के खिलाफ नोएडा में दर्ज 16 एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए ईडी के लखनऊ कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था। एजेंसी आम्रपाली के प्रमोटरों से पूछताछ करना चाहती है। साथ ही ऐसी संपत्तियों की तलाश भी की जा रही है जो अटैच की जा सकें।

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