अयोध्या पर फैसला / हिंदू पक्ष की दलील थी- कब्जे के लिए राम जन्मस्थान पर नमाज पढ़ी; सुप्रीम कोर्ट ने माना- ढांचे के नीचे मंदिर था



सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो)सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो)

  • सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने शनिवार को फैसला सुनाया, विवादित 2.77 एकड़ जमीन का मालिकाना हक रामलला विराजमान को दिया
  • रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने दलील में कहा था- कानून की तय स्थिति में भगवान नाबालिग और उनकी जमीन नहीं छीनी जा सकती
  • 2010 में इलाहबाद हाईकोर्ट ने फैसले में माना था- विवादित स्थल ही भगवान राम का जन्मस्थान है

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 07:18 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने अयोध्या मामले पर शनिवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया है। ये भी कहा कि मुस्लिम पक्ष (सुन्नी वक्फ बोर्ड) को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाए। सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक लगातार चली सुनवाई में हिंदू और मुस्लिम पक्षकार ने अपनी दलीलें रखी थीं।

 

1) विवादित जगह ही राम का जन्मस्थान है?
हाईकोर्ट का फैसला :
विवादित स्थल भगवान राम का जन्मस्थल है। जन्मस्थल वैधानिक और पूज्य है। इसे भगवान राम के जन्मस्थल के तौर पर पूजा जाता है। परमात्मा का भाव हरदम हर जगह हर किसी के लिए मौजूद रहता है। किसी भी आकार में व्यक्ति की आकांक्षा के मुताबिक या निराकार भी हो सकता है।

हिंदू पक्ष की दलील : रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील के परासरन ने कहा कि दस्तावेजों के जरिए साबित करना मुश्किल है कि भगवान राम कहां पैदा हुए थे। लाखों श्रद्धालुओं की अडिग आस्था और विश्वास ही इसका सबूत है कि विवादित स्थल राम जन्मभूमि है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला : हिंदुओं का यह मानना कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ, यह निर्विवादित है। हिंदू-मुस्लिमों की आस्था और विश्वास हैं, लेकिन मालिकाना हक को धर्म, आस्था के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता।


2) क्या विवादित इमारत एक मस्जिद ही थी?
हाईकोर्ट का फैसला :
विवादित इमारत का निर्माण बाबर ने कराया था। निर्माण के वर्ष को लेकर असमंजस है लेकिन यह इस्लाम के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं बनाई गई थी। इसलिए इसे मस्जिद की तरह नहीं माना जा सकता।

हिंदू पक्ष की दलील : राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से सीनियर एडवोकेट पीएन मिश्रा ने कहा था कि अयोध्या में बना विवादित ढांचा बाबर की हवेली तो हो सकता था, लेकिन मस्जिद नहीं। उन्होंने कहा था कि विवादित ढांचा इस्लामिक कानून और मान्यताओं के अनुसार नहीं बना था। अगर कोई ज्योर्तिलिंग बनाए तो हिंदू उसे स्वीकार नहीं करेंगे। उसी तरह अगर कोई इस्लामिक कानून के खिलाफ मस्जिद बनाता है तो मुसलमानों को भी उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला : चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा- मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था।


3) क्या मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी?
हाईकोर्ट का फैसला :
विवादित ढांचा, पुराने ढांचे को तोड़कर उसके स्थान पर बनाया गया था। पुरातत्व विभाग इसकी पुष्टि कर चुका है कि ढांचा एक विशाल हिंदू धार्मिक ढांचा था।

हिंदू पक्ष की दलील : रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने दावा किया था कि विवादित जगह पर ईसा पूर्व बना विशाल मंदिर था। इसके खंडहर को बदनीयती से मस्जिद में बदल दिया गया था। उन्होंने कहा कि राम जन्मस्थान पर नमाज इसलिए पढ़ी जाती रही, ताकि जमीन का कब्जा मिल जाए। इस नमाज में विश्वास का अभाव था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला : ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है। पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक ओपिनियन करार दे देना एएसआई का अपमान होगा। हालांकि, एएसआई ने यह तथ्य स्थापित नहीं किया कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई।


4) क्या मूर्तियां इमारत में 1949 में रखी गई थीं?
हाईकोर्ट का फैसला :
मूर्तियां 22-23 दिसंबर 1949 की दरमियानी रात विवादित ढांचे के बीच गुंबद के नीचे रखी गई थीं।

हिंदू पक्ष की दलील : निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने दलील दी थी कि विवादित जगह पर मुस्लिमों ने 1934 से पांचों वक्त की नमाज पढ़ना बंद कर दिया था। 16 दिसंबर 1949 के बाद वहां जुमे की नमाज पढ़ना भी बंद हो गई। इसके बाद 22-23 दिसंबर 1949 को विवादित ढांचे के अंदर मूर्तियां रखी गईं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला : 1949 में मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के नीचे प्रतिमाओं का रखा जाना एक गलत और अपवित्र काम था।


# मालिकाना हक के लिए हिंदू पक्ष की दलीलें क्या थीं?
दलील नंबर 1 : निर्मोही अखाड़े ने दलील दी कि विवादित जगह पर मुस्लिमों ने 1934 से पांचो वक्त की नमाज पढ़ना बंद कर दिया था। 16 दिसंबर 1949 के बाद वहां जुमे की नमाज पढ़ना भी बंद हो गई। मुस्लिम लॉ के तहत कोई भी व्यक्ति जमीन पर कब्जे की वैध अनुमति के बिना दूसरे की जमीन पर मस्जिद का निर्माण नहीं कर सकता। इस तरह जमीन पर जबरन कब्जा करके बनाई गई मस्जिद गैर इस्लामिक है और वहां पर अदा की गई नमाज कबूल नहीं होती है।

दलील नंबर 2 : रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि कानून की तय स्थिति में भगवान हमेशा नाबालिग होते हैं और नाबालिग की संपत्ति न तो छीनी जा सकती है, न ही उस पर विरोधी कब्‍जे का दावा किया जा सकता है।


# मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई, इसले लिए हिंदू पक्ष ने क्या दलील दीं?
दलील नंबर 1 :
रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने दावा किया कि विवादित जगह पर ईसा पूर्व बना विशाल मंदिर था। इसके खंडहर को बदनीयती से मस्जिद में बदल दिया गया था। उन्होंने कहा कि राम जन्म स्थान पर नमाज इसलिए पढ़ी जाती रही, ताकि जमीन का कब्जा मिल जाए। इस नमाज में विश्वास का अभाव था। उन्होंने कहा कि विवादित स्थल की खुदाई में निकले पत्थरों पर मगरमच्छ और कछुओं के चित्र भी बने थे। मगरमच्छ और कछुओं का मुस्लिम संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा राम जन्मभूमि के दर्शन के लिए श्रद्धालु सदियों से अयोध्या जाते रहे हैं। 
दलील नंबर 2 : हिंदू महासभा और राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने दलील दी थी कि बाबरी मस्जिद की खुदाई में चूल्हा मिला था। पैगंबर ने कहा था कि घंटी बजाकर नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, क्योंकि यह शैतान का इंस्ट्रूमेंट है। वहीं, हिंदुओं के नरसिंह पुराण में कहा गया है कि बिना घंटी बजाए मंदिर में पूजा नहीं कर सकते।
दलील नंबर 3 : याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने 80 साल के अब्दुल गनी की गवाही का हवाला देते हुए कहा था कि बाबरी मस्जिद राम जन्मस्थल पर बनी है। गनी ने हलफनामे में कहा था कि मस्जिद का निर्माण राम मंदिर को तोड़कर किया गया था।

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