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देश के 62% लोग नागरिकता कानून के समर्थन में, 65.4% की राय- सभी राज्यों में एनआरसी लागू हो

2 वर्ष पहले
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  • सर्वे में 17 से 19 दिसंबर के बीच देशभर के 3,000 से ज्यादा नागरिकों की राय ली गई
  • देश के 55.9% लोग मानते हैं कि एनआरसी और सीएए केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ
  • ज्यादातर मुस्लिमों ने कहा- नागरिकता कानून लागू करने से देश में मंहगाई बढ़ सकती है
  • पूर्वोत्तर के 73.4% लोगों ने एनआरसी और 50.6% ने सीएए का समर्थन किया
  • असम में 68.1% लोग सीएए के खिलाफ, लेकिन 76.9% एनआरसी के पक्ष में हैं

नई दिल्ली. देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध जारी है। इसबीच, आईएएनएस-सीवोटर ने शनिवार को अपने सर्वे में दावा किया कि देश के 62.1% नागरिक सीएए के पक्ष में हैं। 65.4% लोग चाहते हैं कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाए। 55.9% का मानना है कि सीएए और एनआरसी केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ हैं। इस सर्वे में 17 से 19 दिसंबर के बीच देशभर के 3,000 से ज्यादा नागरिकों की राय ली गई। इनमें असम, पूर्वोत्तर और मुस्लिम समुदाय से 500-500 लोग शामिल थे। 

Q&A: सीएए और एनआरसी पर सर्वे के अनुसार...

1. कितने लोग नागरिकता कानून और एनआरसी के समर्थन में हैं?

सीएए: सर्वे के मुताबिक, 62.1% लोग समर्थन में और 36.8% विरोध में हैं। पूर्वी भारत में 57.3%, पश्चिम में 64.2%, उत्तर में 67.7% और दक्षिण में 58.5% लोगों ने कानून का समर्थन किया। बिल का विरोध करने वालों का प्रतिशत पूर्व में 42.7, पश्चिम में 35.4, उत्तर में 31.2 और दक्षिण में 38.8% रहा। 58.6% ने सरकार का समर्थन किया, जबकि 31.7% विपक्षी दलों के साथ नजर आए। पूर्व, पश्चिम, उत्तर और पूर्वोत्तर के अधिकांश लोगों ने सरकार का समर्थन किया, जबकि दक्षिण भारत में 47.2% लोग विपक्षी दलों के रुख से सहमत थे। सीएए पर सरकारी स्टैंड का समर्थन करने के सवाल पर हिंदू और मुस्लिम विभाजित हो गए। 67% हिंदुओं ने सरकार के पक्ष में सहमति जताई, 71.5% मुस्लिमों ने विपक्षी दलों के कदमों का समर्थन किया। 

एनआरसी: 65.4% लोग एनआरसी के पक्ष में और 28.3% ने विरोध किया है। जबकि 6.3% प्रतिशत लोग इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। पूर्व में 65.9%, पश्चिम में 67.5%, उत्तर में 73.8% और और दक्षिण भारत में 52.1% लोग पूरे देश में एनआरसी लागू करने के पक्ष में हैं, जबकि पूर्व में 31.4%, पश्चिम में 22.1%, उत्तर में 20.1% और दक्षिण भारत में 40.6% लोग एनआरसी के विरोध में हैं। पूर्व में 69%, पश्चिम में 66% और उत्तर भारत में 72.8% लोग दूसरे देशों से आकर भारत में बसने वाले लोगों को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। दक्षिण भारत में केवल 47.2% इससे सहमति जताते हैं। 50% लोग इससे इनकार करते हैं।

2. सीएए और एनआरसी पर मुस्लिमों की क्या राय है?

सीएए: देश के 63.5% मुस्लिम नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हैं, जबकि 35.5% इसका समर्थन करते हैं। 0.9% मुस्लिम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। दूसरी तरफ, 66.7% हिंदुओं ने इस कानून का समर्थन किया और 32.3% इसके विरोध में नजर आए। हालांकि, जब सीएए के जरिए शरणार्थियों के देश में बसने और सुरक्षा के लिए खतरा बनने की आशंका पर सवाल किया गया, तो 64.4% लोगों ने हां में जवाब दिया, जबकि 32.6% ने इसे नकार दिया। वहीं, मुस्लिमों को आशंका है कि कानून लागू करने से मंहगाई बढ़ सकती है।

एनआरसी: मुस्लिम समुदाय के 64.7% लोगों ने कहा कि यह भारतीय मुसलमानों के खिलाफ है। 20.8% ने माना कि यह कानून केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ है। 66.2% एनआरसी को देशभर में लागू करने के खिलाफ हैं, जबकि 28.5% ने इसका समर्थन किया। दूसरी तरफ, हिंदुओं में 72.1% लोगों ने एनआरसी का समर्थन किया और 21.3% इसके विरोध में रहे।

3. पूर्वोत्तर के लोग घुसपैठ के सवाल पर क्या कहते हैं?

सीएए: पूर्वोत्तर में 50.6% लोगों ने सीएए का पक्ष लिया, जबकि 47.4% ने इसका विरोध किया। बांग्लादेशी प्रवासियों के भारत में रहने की वजह पूछने पर 61.4% लोग कहते हैं कि भारत में बेहतर आर्थिक अवसर मौजूद हैं। 23.8% ने कहा कि बांग्लादेश से निकाले जाने के कारण ही शरणार्थी भारत आ रहे हैं। 14.8% ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

एनआरसी: पूर्वोत्तर राज्यों में 73.4% लोगों ने देशभर में एनआरसी लागू करने का समर्थन किया, जबकि 22% इसके विरोध में रहे। यहां 59.8% लोग घुसपैठ से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे के सवाल से सहमत थे जबकि 35.7% ऐसा नहीं मानते। यहां 65.3% हिंदू और 67.5% मुस्लिम प्रतिशत लोगों ने इसके पक्ष में राय दी, वहीं 33% हिंदू और 28.2% मुस्लिमों ने असहमति जताई।


पूर्वोत्तर के 65.5% लोगों का मानना है कि सीएए और एनआरसी अवैध प्रवासियों के खिलाफ हैं, जबकि 27.3% लोगों को लगता है कि ये दोनों कानून भारतीय मुसलमानों के खिलाफ हैं।

4. असम में सीएए और एनआरसी को लोग कैसे देखते हैं?

सीएए: असम में 68.1% लोग सीएए के खिलाफ रहे, जबकि 31% इसके पक्ष में राय दी। यहां 53.6% लोग मानते हैं कि सीएए और एनआरसी कानून अवैध प्रवासियों के खिलाफ बने हैं। 24.6% इन्हें भारतीय मुसलमानों के खिलाफ मानते हैं। करीब 14.8% ने कहा कि उन्हें यह मुद्दा समझ नहीं आया।

एनआरसी- असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एनआरसी को लागू किया जा चुका है। यहां 76.9% लोग पूरे भारत में एनआरसी लागू करने के पक्ष में हैं, जबकि 16.5% लोग इसके खिलाफ रहे। 53.5% लोग विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए स्टैंड के पक्ष में रहे, जबकि केवल 33.7% ने सरकार के रुख का समर्थन किया।