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दानिश सिद्दीकी की मौत पर तालिबान को दुख:आतंकी संगठन ने कहा- हमने फोटो जर्नलिस्ट पर हमला नहीं किया, पता नहीं किसकी गोली से जान गई

नई दिल्ली2 महीने पहले
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तालिबान ने शुक्रवार को अफगानिस्तान के कंधार में हुई भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत पर दुख जताया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने CNN-न्यूज 18 से कहा कि सिद्दीकी की मौत का हमें दुख है। हम इस बात से दुखी हैं कि पत्रकार हमें बिना बताए युद्धग्रस्त इलाके में आ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमें नहीं पता कि किसकी गोलीबारी में पत्रकार मारा गया। युद्धग्रस्त इलाके में आने वाले किसी भी पत्रकार को हमें इसकी जानकारी देनी चाहिए। हम उसकी पूरी देखभाल करेंगे।'

अफगान सुरक्षा बलों और तालिबान लड़ाकों के बीच झड़प को कवर करने के दौरान रॉयटर्स के फोटोजर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत हो गई थी। पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार 38 साल के थे। अफगान कमांडर ने रॉयटर्स को बताया कि अफगान सेना स्पिन बोल्डक के मुख्य बाजार इलाके पर कब्जा करने के लिए लड़ रही थी, इसी दौरान सिद्दीकी और एक सीनियर अफगान अधिकारी मारे गए।

दानिश की यह फोटो अफगानिस्तान के कंधार में ली गई थी। इसे उन्होंने 13 जुलाई को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। दानिश ने लिखा था- 15 घंटे के मिशन के बाद 15 मिनट का ब्रेक ले रहा हूं। (फोटो- रॉयटर्स)
दानिश की यह फोटो अफगानिस्तान के कंधार में ली गई थी। इसे उन्होंने 13 जुलाई को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। दानिश ने लिखा था- 15 घंटे के मिशन के बाद 15 मिनट का ब्रेक ले रहा हूं। (फोटो- रॉयटर्स)

तालिबान ने दानिश का शव ICRC को सौंपा
PTI के मुताबिक, तालिबान ने दानिश सिद्दीकी का शव रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति (ICRC) को सौंप दिया है। भारत को तालिबान की ओर से ICRC को शव सौंपे जाने की सूचना दे दी गई है। भारतीय अधिकारी इसे वापस लाने पर काम कर रहे हैं।

रॉयटर्स ने कहा- सिद्दीकी आउटस्टैंडिंग जर्नलिस्ट थे
रॉयटर्स के प्रेसिडेंट माइकल फ्रिडेनबर्ग और एडिटर-इन-चीफ एलेसेंड्रा गैलोनी ने एक बयान में कहा, 'हम इस घटना को लेकर और जानकारी जुटा रहे हैं। सिद्दीकी एक आउटस्टैंडिंग जर्नलिस्ट, एक समर्पित पति और पिता थे। साथ ही वो सबके पसंदीदा कलीग थे। इस मुश्किल समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं।'

यह तस्वीर यूपी में गंगा नदी के किनारे की है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब दानिश की खींची ये तस्वीर सामने आई तो लोग भारत के भयावह हालात से वाकिफ हुए। (फोटो- रॉयटर्स)
यह तस्वीर यूपी में गंगा नदी के किनारे की है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब दानिश की खींची ये तस्वीर सामने आई तो लोग भारत के भयावह हालात से वाकिफ हुए। (फोटो- रॉयटर्स)

पिता बोले- प्रोफेशन के आगे वह किसी की नहीं सुनते थे
दानिश सिद्दीकी के पिता प्रोफेसर अख्तर सिद्दीकी से दैनिक भास्कर ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि बेटे से आखिरी बार दो दिन पहले बात हुई थी। हमसे बात करते हुए उनका गला भर आया। फोन रखने से पहले उन्होंने बताया कि दानिश अपने काम को लेकर बेहद संजीदा थे। प्रोफेशन के आगे वह किसी की भी बात नहीं सुनते थे। दानिश को चैलेंज लेना पसंद था। पिता ने कहा कि दानिश के पैशन को देख हमने उसे अफगानिस्तान जाने से नहीं रोका।

दानिश ने टीवी से पत्रकारिता करियर की शुरुआत की थी
दानिश मुंबई के रहने वाले थे। उन्होंने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया था। 2007 में उन्होंने जामिया के मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर से मास कम्युनिकेशन की डिग्री ली थी। उन्होंने टेलीविजन से अपना करियर शुरू किया और 2010 में रॉयटर्स से जुड़ गए।

रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या पर दानिश अपनी टीम के साथ मुश्किल हालात में कवरेज पर गए थे। इसी प्रोजेक्ट के दौरान खींची गई तस्वीरों के लिए उन्हें पुलित्जर अवॉर्ड दिया गया था। (फोटो- रॉयटर्स)
रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या पर दानिश अपनी टीम के साथ मुश्किल हालात में कवरेज पर गए थे। इसी प्रोजेक्ट के दौरान खींची गई तस्वीरों के लिए उन्हें पुलित्जर अवॉर्ड दिया गया था। (फोटो- रॉयटर्स)

रोहिंग्या कवरेज के लिए मिला था पुलित्जर
दानिश सिद्दीकी को उनके बेहतरीन काम के लिए पत्रकारिता का प्रतिष्ठित पुलित्जर अवॉर्ड भी मिला था। सिद्दीकी ने रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या को अपनी तस्वीरों से दिखाया था। ये तस्वीरें देखकर लोगों को रोहिंग्या संकट की गंभीरता का अंदाजा लगा था। 2018 में उनकी टीम को पुलित्जर अवॉर्ड मिला था।

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