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  • Taliban's statement on Kashmir is a maneuver, it tries to be good in front of India before talks with Afghanistan

भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का दावा / कश्मीर पर तालिबान का बयान महज पैंतरेबाजी, यह अफगानिस्तान से बातचीत से पहले भारत के सामने अच्छा बनने की कोशिश

भारत के रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि तालिबान कश्मीर मुद्दे पर बयान देकर भारत को रिझाने की कोशिश में है। वह भारत से बात करके अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार को नीचा दिखाना चाहता है।  (फाइल फोटो) भारत के रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि तालिबान कश्मीर मुद्दे पर बयान देकर भारत को रिझाने की कोशिश में है। वह भारत से बात करके अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार को नीचा दिखाना चाहता है। (फाइल फोटो)
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भारत के रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि तालिबान कश्मीर मुद्दे पर बयान देकर भारत को रिझाने की कोशिश में है। वह भारत से बात करके अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार को नीचा दिखाना चाहता है।  (फाइल फोटो)भारत के रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि तालिबान कश्मीर मुद्दे पर बयान देकर भारत को रिझाने की कोशिश में है। वह भारत से बात करके अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार को नीचा दिखाना चाहता है। (फाइल फोटो)

  • आतंकी संगठन तालिबान ने पिछले हफ्ते कश्मीर मामले पर किसी भी तरह का दखल देने से इनकार किया था
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य तिलक देवेश्वर ने कहा- तालिबान कश्मीर मसले को भुनाना चाहता है
  • ऑब्जर्व रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक- अगर वाकई तालिबान बदल गया है, तो उसे अपनी गतिविधियों से यह बताना होगा

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 11:16 AM IST

नई दिल्ली. आतंकी संगठन तालिबान ने पिछले हफ्ते कश्मीर मामले पर किसी भी तरह का दखल देने से इनकार किया था। कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच का मसला बताते हुए कहा था कि वह दूसरे देशों के मसलों में दखल नहीं देता। भारतीय रक्षा विशेषज्ञों ने उसके बयान को अफगानिस्तान से उसकी बातचीत के पहले की पैंतरेबाजी बताया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य तिलक देवेश्वर ने कहा है कि तालिबान अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार से बातचीत से पहले खुद को भारत की नजरों में अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहा है।

देवेश्वर के मुताबिक, आतंकी संगठन भारत से बातचीत बढ़ाकर गनी सरकार को नीचा दिखाना चाहता है। अमेरिका के विशेष राजदूत जलमे खलिजाद ने हाल ही में भारत से अनुरोध किया था कि वह तालिबान से सीधे बात करे। हालांकि, अब तक भारत तालिबान से किसी तरह की बात नहीं कर रहा।

‘कश्मीर पर भारत की चिंता को भुनाना चाहता है तालिबान’ 
सोसाइटी ऑफ पॉलिसी स्टडीज के डायरेक्टर उदय भास्कर के मुताबिक, अगर तालिबान भारत के साथ बात करना चाहेगा तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। ऐसा लगता है कि उसका एक धड़ा उदारवादी रुख अपना रहा है। यह धड़ा एक तरह का अस्थाई राजनीतिक स्थान बनाना चाहता है, जिससे भारत से बातचीत शुरू हो सके। वे कश्मीर पर भारत की चिंता को भुनाने की कोशिश में है। इससे पाकिस्तान भी इस पूरे मसले में शामिल हो जाएगा। मुझे इससे डर है, क्योंकि यह संगठन आतंक का पर्याय है।

‘भारत के साथ डबल गेम खेलने की कोशिश में है तालिबान’

ऑब्जर्व रिसर्च फाउंडेशन के सीनियर फेलो सुशांत सरीन के मुताबिक, तालिबान ने अंतराष्ट्रीय समुदाय के साथ डबल गेम खेला। अब वह कुछ ऐसा ही भारत के साथ करने की कोशिश में है। यह संगठन भारत के सामने खुद को अफगानिस्तान का असली चेहरे की तरह पेश करना चाहता है। यह दिखाना चाहता है कि अगर उसके साथ बातचीत हुई तो वह भारत के मामलों में दखल नहीं देगा। हालांकि, यह मानना एक भ्रम होगा कि इसने अल कायदा और आईएस के साथ अपने सभी संबंध तोड़ लिए हैं।

क्या भारत को तालिबान से बात करना चाहिए?
सरीन के मुताबिक, तालिबान पर भरोसा करना जल्दबाजी होगी। यह एक ऐसा गुट है, जो पिछले 25 साल से स्कूलों, अस्पतालों, महिलाओं और बच्चों पर हमले का दोषी है। खासतौर पर इसने अफगान लोगों को निशाना बनाया है। इस पर तब विश्वास किया जा सकेगा, जब यह आतंकी संगठन की तरह बर्ताव करना बंद करे। मासूमों का खून बहाने के लिए प्रतिबद्ध न हो। अगर वाकई तालिबान बदल गया है, तो इसे अपनी गतिविधियों से यह बताना होगा। 

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