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विमानन / फ्यूल का खर्च बचाने के लिए रोबोट खींच रहे विमान, स्लिम एयरहोस्टेस को प्राथमिकता



TaxiBot, curb air pollution and to help airlines save fuel, aircraft from parking bays to the runway with their engine
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TaxiBot, curb air pollution and to help airlines save fuel, aircraft from parking bays to the runway with their engine

  • एयरक्राफ्ट उड़ाने में आने वाले कुल खर्च में से 40% केवल फ्यूल में खर्च होता है
  • टैक्सीबोट रोबोटिक मशीन से प्रति एयरक्राफ्ट 213 लीटर फ्यूल बचा रही कंपनियां

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 02:22 PM IST

नई दिल्ली. पहले एयरलाइंस पर गहराता आर्थिक संकट और फिर जेट एयरवेज की दुर्गति। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय एयरलाइंस पर आर्थिक बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इससे बचने के लिए कुछ समय से एविएशन कंपनियां अपने खर्चे को कम कर रही हैं। एयरक्राफ्ट उड़ाने में आने वाले कुल खर्च में से 40% केवल फ्यूल में खर्च होता है। यही वजह है कि ज्यादातर एविएशन कंपनियां मुनाफा कमाने या घाटा कम करने के लिए फ्यूल की खपत को कम करने की कोशिश कर रही हैं। 


दिल्ली में मौजूदा समय में दो टैक्सी बोट इस्तेमाल हो रहे हैं। बेंगलुरु में भी टैक्सीबोट का इस्तेमाल शुरू होने वाला है। स्पाइसजेट इसका प्रयोग कर रहा है। यह प्रति एयरक्राफ्ट 213 लीटर तक फ्यूल बचाता है। 

 

दिल्ली के बाद बेंगलुरु में शुरू होगी टैक्सी बोट सेवा 
टैक्सीबोट एक सेमी रोबोटिक मशीन है। यह रोबोट 9.5 मीटर लंबा और 4.5 मीटर चौड़ा है। टैक्सीबोट चलाने वाली कंपनी केएसयू एविएशन के कम्युनिकेशन हेड (भारत) संजय बहादुर बताते हैं कि इसमें 400-400 हॉर्स पावर के दो इंजन लगे होते हैं। इंजन से इलेक्ट्रिक जनरेटर चलते हैं, जो एयरक्राफ्ट के सभी उपकरणों को बिजली सप्लाई देते हैं। इंजन बंद होने के बावजूद पायलट जैसे-जैसे कमांड देता है, उसी तरह विमान रनवे तक पहुंच जाता है। 

 
नियो एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल 
नियो एयरक्राफ्ट से 15% तक फ्यूल की बचत होती है। इसलिए कंपनियां धीरे-धीरे नियो इंजन वाले एयरक्राफ्ट को भी शामिल कर रही हैं। इंडिगो के प्रवक्ता के अनुसार कंपनी ने सभी एयरबसों पर नियो इंजन का इस्तेमाल शुरू किया है, जिससे फ्यूल की खपत कम हुई है। विस्तारा भी इनका इस्तेमाल कर रही हैं। 

 

छोटे विमानों में स्लिम एयरहोस्टेस रख रहे हैं 
एटीआर श्रेणी के यानी छोटे एयरक्राफ्ट में कम वजन की एयर होस्टेस तैनात की जा रही हैं। एयरक्राफ्ट में जिनता कम वजन होगा, लैंडिंग और टेकऑफ में फ्यूल की खपत उतनी ही कम होती है। यही वजह है कि 40 से 70 सीटों वाले एयरक्राफ्ट में तैनात होने वाली एयर होस्टेज की लंबाई में भी छूट दी गई है।

 

गो एयर ने क्रू के लिए महिलाओं दी प्राथमिकता
सामान्य रूप से एयरहोस्टेस की न्यूनतम लंबाई 155 सेमी. होनी चाहिए, लेकिन इन विमानों में महिलाओं को छूट दी जा रही। यही वजह है कि इसके लिए नार्थ ईस्ट की युवतियों को प्राथमिता दी जाती है। गो एयर ने तो वर्ष 2013 में ही क्रू मेंबर्स की नियुक्ति में सिर्फ महिलाओं को लेने की बात कही थी। 

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