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चंडीगढ़ / टीबी के मरीज को कैंसर बताया, 3 बार कीमोथैरेपी की; सेंटर पर 2 लाख रु. हर्जाना



फाइल। फाइल।
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फाइल।फाइल।

  • बैंक मैनेजर विजय रमोला टीबी के मरीज हैं, हॉस्पिटल ने ब्रॉन्कोस्कॉपी टेस्ट करवाया, जिसमें फेफड़े में कैंसर की बात सामने आई
  • कैंसर के इलाज से फायदा न होने पर रमोला को मुंबई के टाटा मेमोरियल रैफर किया गया, जहां बायोप्सी में उन्हें टीबी होने का चला
  • कंज्यूमर फोरम ने कहा- मरीज को भगवान के एयरपोर्ट पर ही पहुंचा दिया था

Dainik Bhaskar

Nov 20, 2019, 10:40 AM IST

चंडीगढ़. यहां के सेक्टर-44 स्थित स्पाइरल सीटी एंड एमआरआई सेंटर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां के एक बैंक मैनेजर विजय रमोला को टीबी थी, लेकिन सेंटर की रिपोर्ट में उन्हें कैंसर बताया गया। इसके बाद सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ने उनका इलाज शुरू कर दिया। 3 बार कीमोथैरेपी दे दी गई। आराम नहीं हुआ तो उन्होंने टाटा मेमोरियल मुंबई में जांच कराई, तब टीबी होने का पता चला। रमोला की शिकायत पर उपभोक्ता फोरम ने एमआरआई सेंटर को लापरवाही का दोषी माना और उस 2 लाख रु. हर्जाना लगाया है।

 

फोरम ने रमोला की शिकायत पर ये फैसला सुनाया है। फोरम ने सेक्टर-32 स्थित अस्पताल को लापरवाही का दोषी नहीं माना। फोरम ने प्राइवेट लैब को 15 हजार रुपए मुकदमा खर्च भी देने को कहा है। 

 

रमोला को खांसी की समस्या थी

मरीज का केस लड़ने वाले एडवोकेट सुमित बत्तरा ने बताया कि रमोला स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में ब्रांच मैनेजर हैं। 5 साल पहले उन्हें खांसी की प्रॉब्लम रहने लगी। 15 दिनों बाद भी खांसी ठीक नहीं हुई तो उन्होंने जीएमसीएच-32 में चेकअप करवाया। यहां कुछ टेस्ट हुए, जिनमें कुछ खास प्रॉब्लम नहीं थी। हॉस्पिटल ने उनका ब्रॉन्कोस्कॉपी टेस्ट करवाया, जिसकी रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें फेफड़े में कैंसर है। उन्हें अस्पताल के ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट रेफर किया गया। वहां उन्हें पैट स्कैन करवाने के लिए कहा गया। 

 

प्राइवेट लैब से पैट स्कैन करवाया 
पैट स्कैन सेक्टर-44 की प्राइवेट लैब से करवाया। रिपोर्ट में सामने आया कि रमोला को कैंसर है, जिससे उनकी हडि्डयां कमजोर हो रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वे कैंसर की चौथी स्टेज पर हैं। रिपोर्ट के आधार पर जीएमसीएच-32 ने उनका कैंसर का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया।

 

ट्रीटमेंट के बाद भी जब कोई फर्क नहीं पड़ा तो उन्हें टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में रैफर किया गया। वहां उनका दोबारा पैट स्कैन हुआ, जिसकी रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें तो कैंसर ही नहीं है। उनका बायोप्सी टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट से पता चला कि उन्हें टीबी है। वहां उनका 9 महीने इलाज चला, जिसके बाद वे ठीक हो गए। उन्होंने फिर कंज्यूमर फोरम में केस फाइल किया।

 

फोरम ने सख्त टिप्पणी की
फोरम ने इस केस में सख्त कार्रवाई के साथ-साथ तीखी टिप्पणी भी की। फोरम ने जजमेंट में कहा-मरीज का टेस्ट करने वाले सेंटर ने तो उसे भगवान के एयरपोर्ट पर ही पहुंचा दिया था। जहां वह दुनिया को गुडबॉय कहने के लिए फाइनल कॉल की वेट कर रहा था। कंज्यूमर फोरम ने कहा कि उस सेंटर की रिपोर्ट के आधार पर ही जीएमसीएच-32 ने मरीज का कैंसर का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया था।

 

अस्पताल ने कहा- हमारी कोई गलती नहीं
सेक्टर-32 हॉस्पिटल की तरफ से फोरम में जवाब दिया गया कि उन्होंने प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए ट्रीटमेंट शुरू किया। प्राइवेट लैब का कहा कि मेडिकल टर्म के हिसाब से ही रिपोर्ट दी थी, इसलिए हमारी भी कोई गलती नहीं है। लेकिन फोरम ने प्राइवेट लैब का लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ फैसला सुनाया।

 

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