शिक्षक दिवस / क्लास रूम ही नहीं, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म पर भी गुरु-शिष्य का भावुक रिश्ता बनता है: गौरव मुंजाल



अन-एकेडमी के को-फाउंडर गौरव मुंजाल और रोमन सैनी। अन-एकेडमी के को-फाउंडर गौरव मुंजाल और रोमन सैनी।
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अन-एकेडमी के को-फाउंडर गौरव मुंजाल और रोमन सैनी।अन-एकेडमी के को-फाउंडर गौरव मुंजाल और रोमन सैनी।

  • शिक्षक दिवस के मौके पर अन-एकेडमी के को-फाउंडर गौरव मुंजाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत की 
  • उन्होंने बताया, जब तीन घंटे में हम फिल्म से जुड़ जाते हैं, तो ऑनलाइन क्लास के जरिए भी विद्यार्थी गुरु से जुड़ सकता है

Dainik Bhaskar

Sep 05, 2019, 12:15 PM IST

जयपुर (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया). आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े माध्यम शिक्षकों के सम्मान का दिन है। इस मौके पर देश के सबसे बड़े एजुकेशन प्लेटफार्म चलाने वाली कंपनी अन-एकेडमी के को-फाउंडर गौरव मुंजाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने बताया,  "ई-लर्निंग एप में भी छात्र-शिष्य में बनता है भावनात्मक रिश्ता। वे भी परांपरागत गुरु-शिष्य की तरह एक रिश्ते से जुड़ते हैं।" इस एप को हर महीने 16.5 करोड़ व्यूज मिलते हैं।


गौरव मुंजाल बताते हैं, " मैंने मुंबई में नारसीमुंजी इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की। कंप्यूटर साइंस में मेरी शुरुआत से ही रुचि थी, लेकिन फर्स्ट ईयर से इसकी क्लास मैंने ऑनलाइन ही पढ़ी। मैंने स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मेहरान सामी की ऑनलाइन क्लास ज्वाइन की। मुझे पढ़ने में मजा आता था। पढ़ाई पूरी होने के बाद जब मैं सेनफ्रांसिस्को गया तब मैंने सामी सर को मैसेज किया और बताया कि मुझे आपने पढ़ाया है। इसके बाद हम 15 मिनट के लिए मिले और आज भी हम जुड़े हैं।" 

 

जीवन में प्रोत्साहन का अहम है 

 

  • मुंजाल बताते हैं, "जब तीन घंटे की मूवी देखकर हम भावुक हो जाते हैं और फिल्म से जुड़ जाते हैं, तो ऑनलाइन लाइव क्लास के जरिए भी विद्यार्थी अपने गुरु से जुड़ सकता है। एक भावनात्मक रिश्ता भी बनाकर रखा जा सकता है। जब शिक्षक स्टोरी के माध्यम से समझाते हैं तो आवश्यक नहीं है कि वह आपके सामने ही हों। जिंदगी में प्रोत्साहन और प्रेरणा जीवन के शुरुआत में मिल जाती है तो विश्वास बढ़ जाता है।" 
  • "मुझे जयपुर में जेवियर स्कूल में पढ़ते हुए सुमित चौहान सर, योगेश भटनागर सर और फादर जोस जैकब सर से ऐसा ही प्रोत्साहन और प्रेरणा मिली। मुंजाल और को-फाउंडर रोमन सैनी की कंपनी के ऑनलाइन प्लेटफार्म को 16.5 करोड़ व्यूज हर माह मिलते हैं। छात्र और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं की संख्या इसमें सर्वाधिक है।" 
  • " मैं जब स्कूल में पढ़ता था तो सुमित चौहान सर ने मुझे प्रोत्साहित किया। मैंने पहली बार वर्ष 2007 में कॉलेज की वेबसाइट बनाई। शायद मेरे अंदर खुद का काम करने की पहली नींव उसी समय पड़ी। सुमित सर काफी प्रेरणात्मक बातें भी करते थे, जिसके कारण हम आज यहां तक पहुंच सके। मुझे लगता है कि अगर अलग कुछ करना है तो अवश्य कीजिए और ऐसे शिक्षक ढंूढ़ते रहिए जो आपको उत्साहित करें। अब शिक्षा केवल चार दीवारी की ही बात नहीं रह गई है, बल्कि विश्व के किसी भी कोने से दूसरे कोने में पढ़ा रहे शिक्षक से आप पढ़ सकते हैं।" 

 

अन-एकेडमी से जुड़े हैं 500 टीचर

हमारी कंपनी में भी 1400 लाइव क्लास देशभर में फैले करीब 500 टीचर ऑनलाइन लेते हैं। वर्तमान में करीब 55 हजार विद्यार्थी पेड कंटेंट ले रहे हैं। साइट पर विभिन्न विषयों के हमारे 10 लाख फ्री वीडियो भी हैं। पढ़ाते और पढ़ते हुए छात्र-शिक्षक में एक रिश्ता बन जाता है। जब स्टूडेंट सवाल करता है, मेल करता है और लगातार कम्युनिकेशन में रहते हैं तो उस रिश्ते में सम्मान और घनिष्ठता भी बढ़ती है। हमारे यहां टीम रेंडमली स्टूडेंट्स से बात करती है। मुझे नहीं लगता है कि ऑनलाइन पढ़ाई से गुरु-शिष्य के रिश्ते में कोई अंतर आया है।

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