कश्मीर / 18 साल में आतंक से निपटने का खर्च 550% बढ़ा, इकोनॉमी को 4.55 लाख करोड़ रुपए का नुकसान

Dainik Bhaskar

Feb 19, 2019, 02:18 PM IST


Terrorism has ruined the economy of Jammu and Kashmir
देश में सबसे ज्यादा क्रिकेट बैट कश्मीर में बनते हैं। यहां इंडस्ट्री का टर्नओ‌वर 2 करोड़ रुपए सालाना है। देश में सबसे ज्यादा क्रिकेट बैट कश्मीर में बनते हैं। यहां इंडस्ट्री का टर्नओ‌वर 2 करोड़ रुपए सालाना है।
X
Terrorism has ruined the economy of Jammu and Kashmir
देश में सबसे ज्यादा क्रिकेट बैट कश्मीर में बनते हैं। यहां इंडस्ट्री का टर्नओ‌वर 2 करोड़ रुपए सालाना है।देश में सबसे ज्यादा क्रिकेट बैट कश्मीर में बनते हैं। यहां इंडस्ट्री का टर्नओ‌वर 2 करोड़ रुपए सालाना है।
  • comment

  • आतंक के 30 साल के दौर में हुआ यह नुकसान 2018-19 के बजट से 5 गुना ज्यादा और राज्य की जीडीपी का तीन गुना है 
  • देश के बाकी राज्यों की तुलना में कश्मीरी केंद्र सरकार से 8 गुना ज्यादा फंड पाते हैं, यहां एक व्यक्ति पर सरकार करीब 8092 रुपए खर्च कर रही है

नई दिल्ली.  30 साल के आतंक ने कश्मीर की अर्थव्यवस्था ध्वस्त कर दी है। केंद्र सरकार देश की जीडीपी का 10% हिस्सा यहां खर्च करती है। बावजूद इसके बेरोजगारी बढ़ी है। पढ़िए हर साल बढ़ते खर्च और नुकसान पर नॉलेज रिपोर्ट

 

आतंक के 30 साल में पर्यटन, उद्योग सब तबाह, एक दिन के कर्फ्यू से 250 करोड़ का नुकसान

 

पर्यटन: आतंक के दौर से पहले जीडीपी में पर्यटन का हिस्सा करीब 10% था, अब औसत 6% है

 

gfx

 

 

1988 में 7 लाख पर्यटक पहुंचे थे। 1989 में हिंसा शुरू हुई तो ये संख्या दो लाख घट गई। अगले दो साल पर्यटक संख्या 98% घटकर 6,287 रह गई। 
2001 में हालात बिगड़े तो 2002 में 27,356 पर्यटक पहुंचे। 2012 में रिकॉर्ड 13 लाख पर्यटक पहुंचे थे।

 

बंदी: 30 साल में 1796 दिन कर्फ्यू, हड़ताल के चलते घाटी बंद रही 

 

gfx

 

 

30 साल में कर्फ्यू, प्रदर्शन और हड़ताल से कश्मीर में 1796 दिन बंद रहा हैं। 1991 में सबसे अधिक 207 दिन और 2016 में 130 दिन। 
250 करोड़ का नुकसान होता है घाटी में बंदी से। 2016 में 51 दिनों के पूर्ण बंद से 10500 करोड़ का नुकसान हुआ था।

 

सेना की तैनाती...
 

gfx

 

 

जम्मू-कश्मीर में मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 5 लाख से अधिक सुरक्षा बल तैनात हैं। कुछ रक्षा विशेषज्ञ इस दावों से सहमत नहीं हैं। वहीं कुछ राज्य में सैनिकों की तादाद 2,10,000 बताते हैं।

 

आतंकवाद ने जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। पिछले 30 सालों में आतंकी गतिविधियों के चलते राज्य को 4.55 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। यह आंकड़ा जम्मू-कश्मीर के मौजूदा 88,911 करोड़ के बजट का 5 गुना और 1.57 लाख करोड़ की जीडीपी का करीब 3 गुना है।

 

ऐसा तब हुआ है जब पिछले 18 सालों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए केंद्र ने सहायता राशि में 550% का इजाफा किया है। यह सहायता राशि विभिन्न सुरक्षा संबंधी स्कीमों से जुड़ी है। सबसे ज्यादा 270% बढ़ाेत्तरी 2017 में हुई थी। पिछले 40 सालों में जम्मू-कश्मीर ही इकलौता ऐसा राज्य है जहां औसत 80% से भी ज्यादा अनुदान केंद्र की तरफ किसी राज्य को उनके विकास के लिए मिला है।

 

बाकी राज्यों में यह प्रतिशत 20 से 30 फीसदी का है। प्रति व्यक्ति के हिसाब से बात करें तो जम्मू-कश्मीर के लोगों को सरकार बाकी राज्यों की तु़लना में 8 गुना ज्यादा फंड देती है। 1992-93 में जहां बाकी राज्यों के लोग प्रति व्यक्ति 576.24 रु की मदद पाते थे, वहीं जम्मू-कश्मीर के मामले में यह आंकड़ा 3197 रु था। 2001 में यह आंकड़ा जम्मू-कश्मीर के लिए बढ़कर 8092 रु तो बाकी राज्यों के लिए 1137 रु हो गया था।

 

अभी की स्थितियों में भी यह अंतर 8 गुना से ज्यादा का बना हुआ है। जम्मू की अर्थव्यस्था में अहम भूमिका निभाने वाले टूरिज्म सेक्टर की भी हालत खराब हो चुकी है। जहां 1989 में आतंक के दौर से पहले राज्य की जीडीपी में टूरिज्म सेक्टर 10% से ज्यादा योगदान देता था।

 

पिछले 30 सालों में यह योगदान बढ़ने की जगह घटकर औसत 6 फीसदी पर आ गया है। इसका कारण आतंक के चलते देशी और विदेशी दोनों ही पर्यटकों का घाटी से मुंह मोड़ लेना है। 2017 में जम्मू-कश्मीर में आने वाले पर्यटकों की संख्या 6 साल के न्यूनतम पर पहुंच गई थी। मौजूदा समय में देश की जीडीपी में जम्मू-कश्मीर का योगदान करीब 1 फीसदी ही है।
 

केंद्र सरकार ने 1990-2002 तक आतंक से लड़ने में खर्च किए 35 हजार करोड़ रुपए  : 

केंद्र सरकार ने 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए 1989 में सुरक्षा संबंधी स्कीम शुरू की। इसमें दो श्रेणी रखी गई। एक पुलिस-सुरक्षा बलों के लिए और दूसरा राहत एवं पुनर्वास के लिए। इस स्कीम पर अब तक दी गई रकम इस प्रकार है। 

 

बीते 18 साल में गृह मंत्रालय ने सुरक्षा बलों पर 7,627 करोड़ रुपए खर्च किए :

 

वर्ष     सुरक्षा बल     राहत-पुनर्वास 
2000-01     196.38     89.04 
2001-02     249.71    118.86
2002-03     226.28     126.00
2003-04     245.94     144.99
2004-05     147.63     117.46
2005-06      115.76     108.93
2006-07     167.53     69.31
2007-08     163.07     97.57
2008-09     396.42      209.99 
2009-10      166.70      120.00
2010-11     457.78     60.00
2011-12    342.27     111.59
2012-13     259.78       94.90
2013-14      286.80    151.87
2014-15    290.00     160.00
2015-16     330.00     245.34
2016-17     1185.00     374.42
2017-18    660.00     450.00

नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में है। इसमें सेना का बजट शामिल नहीं है। 

 

राज्य में बेरोजगारी दर 21%, ये देश में दूसरी सबसे ज्यादा, 25% युवाओं के पास काम नहीं : जम्मू-कश्मीर में कमाई का प्रमुख जरिया पर्यटन, हॉर्टीकल्चर और लघु उद्योग हैं। आतंक ने इन सेक्टर को बदहाल कर दिया है। नए बिजनेस नहीं शुरू हो पा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 86 बड़े और मध्यम दर्जे के उद्योग हैं। इससे 19,314 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। घाटी में 30,120 छोटे उद्योग धंधे हैं। इससे 142,317 लोगों को रोजगार मिला है। लेकिन छोटे-मध्यम और बड़े उद्योग धंधों ने बीते 10 साल में सिर्फ 5 हजार रोजगार जोड़े हैं। वहीं हिमाचल में 503 बड़ी और मध्यम दर्जे की इंडस्ट्री है। इससे 60,908 लोगों को रोजगार मिला है।

 

शिक्षा: राज्य में 22 हजार स्कूल-कॉलेज, इनमें 75.68% स्कूलों में बिजली नहीं पहुंची : राज्य में प्राथमिक से 12वीं तक 22,667 स्कूल-कॉलेज हैं। इनमें 15,597 स्कूलों में बिजली नहीं है। जम्मू-कश्मीर की साक्षरता दर 65% है। आतंकवाद के चलते 8 जिलों में 3000 स्कूल बंद करने पड़े है, क्योंकि पढ़ने वाले बच्चे यहां नहीं पहुंच रहे थे। 

 

बेरोजगारी दर 21%, जो देश में दूसरे नंबर पर, यहां 25% युवाओं के पास काम नहीं  है : जनवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दर 21% रही, जो देश में त्रिपुरा के बाद दूसरे नंबर पर है। 18-29 आयुवर्ग में 24.6% युवा बेरोजगार हैं। राज्य में सालाना 2.74 लाख की दर से आबादी बढ़ रही है। 2001 में यह आंकड़ा 1.68 लाख प्रति वर्ष था।

 

स्वास्थ्य: आरबीआई के मुताबिक 20 साल में स्वास्थ्य पर 0.5% तक घट गया है खर्च : पिछले 20 साल के उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह पता चलता है कि वर्ष 2000-01 में जहां राज्य में स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक कल्याण  पर कुल खर्च का 4.9 फीसदी व्यय होता था, जो अब घटकर 4.5 फीसदी हो गया है।

COMMENT
Astrology
Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन