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पुंछ-राजौरी में दो दशक का सबसे लंबा अभियान:200 वर्ग किमी के जंगली क्षेत्र का चप्पा-चप्पा छान रही सेना, 11 दिन से जारी है अभियान

श्रीनगरएक महीने पहलेलेखक: हारून रशीद
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श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए पूरे शहर में बंकर बनाए जा रहे हैं। - Dainik Bhaskar
श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए पूरे शहर में बंकर बनाए जा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा से लगे पुंछ और राजौरी जिले में बीते 11 दिनों से सेना का सर्च ऑपरेशन चल रहा है। अब यह बीते दो दशक में आतंकवाद के खिलाफ चलने वाला सबसे लंबा ऑपरेशन बन गया है। दोनों जिलों के 150 से 200 वर्ग किमी अति दुर्गम-जंगली इलाके का चप्पा-चप्पा छानने का सिलसिला 11 अक्टूबर को तब शुरू हुआ, जब पुंछ के सुरनकोट के जंगलों में आतंकियों से मुठभेड़ में एक जेसीओ समेत 5 जवान शहीद हुए। तब आतंकियों को पहाड़, घने जंगल और मौसम का फायदा मिला। सेना के ज्यादातर कैंप भी इस जंगल से बाहर हैं।

उस घटना के बाद सेना ने अभियान तेज किया। 14 अक्टूबर को पुंछ में मेंढर के जंगलों में छिपे आतंकियों से सेना का सामना हुआ। इस मुठभेड़ में एक जेसीओ समेत दो जवान शहीद हो गए। उसके बाद सेना ने घने जंगल में सर्चिंग के लिए ड्रोन, आधुनिक उपकरण व हवाई निगरानी की मदद ली। पांच दिन में सेना ने चार बार आतंकियों का पता लगा, पर वह भाग निकले। तब पैरा स्पेशल फोर्सेज को लगाया गया।

15 अक्टूबर को आतंकी मुठभेड़ के बाद दो जवान लापता हुए। बाद में जेसीओ और एक राइफलमैन का शव मिला। इन्हें मिलाकर शहीदों की संख्या 9 हो गई। ऑपरेशन पर नजर रख रहे रक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि शायद आतंकियों के कई गुट हैं, जो जंगलों से वाकिफ हैं। 17 अक्टूबर को मेंढर में पुलिस ने महिला समेत तीन संदिग्ध वर्करों को हिरासत मे लिया था। बाद में 6 और लोगों को गिरफ्तार किया।

2003 में 15 से ज्यादा दिन चला था अभियान, 65 आतंकी ढेर
ताजा ऑपरेशन में 9 जवानों की शहादत दो दशक में सेना की किसी भी जवाबी कार्रवाई में सबसे बड़ी नुकसान बताया जा रहा है। 2009 में कुपवाड़ा के जंगल में 5 दिन लंबा ऑपरेशन चला था। तब 7 जवानों के साथ मेजर मोहित शर्मा शहीद हुए थे। ऑपरेशन में 17 आतंकी ढेर किए गए। 2003 में सेना का सुरनकोट के पहाड़ी काका बेल्ट में ऑपरेशन सर्प-विनाश 15 से ज्यादा दिन चला था। तब 65 आतंकी ढेर हुए। जम्मू-कश्मीर में ये अब तक का सबसे बड़ा अभियान था, जिसमें 15000 जवान शामिल थे।

जुलाई से अब तक 12 जवान शहीद हुए, 10 आतंकी भी ढेर

विशेषज्ञ कहते हैं, पुंछ मुठभेड़ में शामिल आतंकियों का समूह संभवत: 25 फरवरी के युद्धविराम के बाद घुसपैठ करने वाला पहला बड़ा समूह था। इसने 7 जुलाई को सुंदरबनी सेक्टर से घुसपैठ की। तब से 10 आतंकी मारे गए और 12 जवान शहीद हो चुके है। खुद को पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट बताने वाले आतंकी गुट ने 18 अक्टूबर को वीडियो जारी कर 11 अक्टूबर के हमले की जिम्मेदारी ली है।

श्रीनगर: आतंकियों से मुठभेड़, आईआईडी निष्क्रिय किया
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में गुरुवार देर शाम सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। कश्मीर जोन की पुलिस ने सोशल मीडिया पर बताया कि मुठभेड़ चानपोरा इलाके में हुई। इससे पहले बारामूला जिले में सुरक्षा बलों ने विस्फोटक (आईईडी) का पता लगाया और उसे निष्क्रिय कर दिया। इससे रफियाबाद इलाके के सैदपाेरा में बड़ा आतंकी हमला टल गया।