पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करें
केरल से जेसी शिबु की रिपोर्ट. देश में कोरोना की सबसे पहली मरीज केरल के त्रिशूर में सामने आई थी। अब वह पूरी तरह ठीक हो चुकी है। नाम न छापने की शर्त पर संक्रमित रही लड़की ने भास्कर को बीमार होने से ठीक होने तक का अपना अनुभव बताया- ‘चीन में कोरोना फैला तो हम दहशत में थे। मैं वुहान यूनिवर्सिटी में पढ़ रही थी, लेकिन हम 24 जनवरी को केरल आ गए। हमें उस समय मेडिकल टीम को रिपोर्ट करने को कहा गया। मैं अपने घर गई और 25 जनवरी को मैंने मेडिकल टीम को जानकारी दी। उस समय मुझे कोरोनावायरस के संक्रमण का कोई लक्षण नहीं था। एहतियातन केरल सरकार के कहने पर मैं घर पर ही आइसोलेशन यानी एकांत में रही। डॉक्टर्स और विशेषज्ञों की टीम रोज मुझसे संपर्क करती और स्वास्थ्य का परीक्षण करती थी।
उन्होंने बताया, '27 जनवरी को सुबह जब मैं सोकर उठी तो मुझे गले में उलझन सी हो रही थी, हल्का कफ था। मुझे लगा यह मौसम बदलने से होगा। लेकिन हम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। मैंने डॉक्टर्स को इसकी जानकारी दी। मेडिकल टीम ने तुरंत एम्बुलेंस भेजी और मुझे जनरल हॉस्पिटल, त्रिशूर शिफ्ट किया गया। वहां पर मेरा और तीन अन्य लोगों का बॉडी फ्लूइड और ब्लड टेस्ट के लिए पुणे भेजा गया। दो दिन में रिपोर्ट आनी थी। दो दिन बाद तीन अन्य लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन मेरी रिपोर्ट पेंडिंग थी। मुझे कुछ शंका हो रही थी। 30 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि चीन की एक छात्रा में कोरोना संक्रमण पॉजिटिव पाया गया है। लेकिन अब तक किसी ने मुझे यह नहीं बताया था कि वो मैं हूं। हालांकि मेरी शंका इसलिए और पुख्ता हो गई थी क्योंकि आइसोलेशन वार्ड में केवल दो छात्राएं थीं। एक मैं और दूसरी मेरी सीनियर। उनका रिजल्ट निगेटिव आ चुका था।'
उन्होंने बताया, 'मेरा रिजल्ट नहीं आया था या मुझे बताया नहीं गया था। हालांकि मेरी लक्षण गंभीर नहीं थे, इसलिए मुझे बहुत टेंशन नहीं थी। मुझे पता था कि यदि मैं ज्यादा घबराई तो परेशानी और बढ़ जाएगी। मुझे पता था कि कोरोना के डेथ रेट से कहीं बेहतर रिकवरी रेट है। इसलिए मैं नकारात्मक विचारों से बच रही थी। मैंने मेरे साथ यात्रा करने वाले अन्य लोगों की भी पूरी डिटेेल जिम्मेदारों को दी। स्वास्थ्य मंत्री ने खुद मेरी मां से बात की और मेरे कोरोना वायरस से संक्रमित होने की बात कही। उन्होंने हमें विश्वास दिलाया कि मैं ठीक हो जाऊंगी।'
उन्होंने बताया, 'बेहतर इलाज के लिए मुझे 31 जनवरी को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल में मुझे एंटी वायरल दवाएं दी गईं। वे रोज मेरे शरीर का तापमान चेक करते थे। मुझे खाने-पीने में हर तरह की चीज खाने की इजाजत थी। मेरी पहचान को गुप्त रखा गया ताकि मुझे कोई समस्या न हो। अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड के बगल में ही मेरी मां को भी रहने की इजाजत दी गई थी। हालांकि मैं उनके कमरे में नहीं जा सकती थी और न ही वो मुझसे मिल सकती थीं। लेकिन उनके पास रहने से मुझे इत्मिनान था। बाद में 20 फरवरी को मुझे अस्पताल से छुट्टी दी गई और एक मार्च को मेरा क्वैरनटाइन पीरियड समाप्त हो गया। अब मैं सामान्य जीवन की ओर लौट रही हूं। घर पर रहकर ऑनलाइन ही चीन की यूनिवर्सिटी की पढ़ाई कर रही हूं। '
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.