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रायपुर में घातक हुआ कोरोना:अगस्त में दोगुना हुआ अंतिम संस्कार, मरने वालों में 50 से 70 की उम्र वाले सबसे ज्यादा; श्मशान में जगह नहीं, इसलिए शवों को लौटा रहे

रायपुर3 महीने पहले
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रायपुर में कोरोना मरीजों की लगातार मौत हो रही है। मॉरचुरी में शव रखने की जगह नहीं है। गुरुवार को हॉल साफ करने के लिए सभी शवों को बाहर निकाला गया।
  • यह आंकड़ा शहर के सबसे बड़े मुक्तिधाम मारवाड़ी श्मशानघाट का, बाकी जगहों पर भी यही हाल
  • अब स्थिति ऐसी कि पिछले हफ्ते अंतिम संस्कार के लिए पहुंची 10 लाशों को लौटाना पड़ा

(गौरव शर्मा) अगस्त महीने में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मारवाड़ी श्मशानघाट में 158 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। मार्च से अब तक, यानी पिछले चार महीनों के मुकाबले यह आंकड़ा दोगुना है। लाशों के आने का सिलसिला जारी है, जिसकी वजह से यहां जगह की कमी होने लगी है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि पिछले एक हफ्ते में अंतिम संस्कार के लिए पहुंची 10 लाशों को लौटाना पड़ गया।

मुक्तिधाम से मिले आंकड़ों के अनुसार, मरने वालों में 50 से 70 साल की उम्र वाले ज्यादा हैं। अप्रैल में 40, मई में 35, जून में 24, जुलाई में 29 और अगस्त में 74 शवों को अंतिम संस्कार के लिए लाया गया, जिनकी उम्र 50 से 70 साल के बीच थी। ये आंकड़े कोरोना के कारण बढ़े हैं, ऐसा पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह बात सही है कि कोरोना से भी मौतें बढ़ी हैं। यह स्थिति शहर के किसी एक मुक्तिधाम की नहीं है, बल्कि ज्यादातर का यही हाल है।

शराब दुकानें बंद हुईं तो मौतों का आंकड़ा भी कम हुआ

मारवाड़ी श्मशानघाट शहर का सबसे बड़ा मुक्तिधाम है और अंतिम संस्कार के लिए सबसे ज्यादा लाश यहीं पहुंचती हैं। मार्च से पहले यहां हर महीने 80 से 100 लोगों का अंतिम संस्कार होता था। लॉकडाउन लगने से पहिए थमे और शराब दुकानें बंद हुईं तो मौतों का आंकड़ा भी कम हुआ।

158 लाशों के अंतिम संस्कार के साथ आंकड़ा दोगुना हो गया

मार्च से जुलाई के बीच मारवाड़ी श्मशानघाट में औसतन 70-80 लाशों का अंतिम संस्कार किया गया। अगस्त के महीने में 158 लाशों के अंतिम संस्कार के साथ यह आंकड़ा दोगुना हो गया। इसमें भी सबसे ज्यादा लाशें 25 अगस्त से 1 सितंबर के बीच पहुंचीं।

चार्ट से समझिए...4 माह बाद पांचवें महीने में ऐसे बढ़ा मौतों का आंकड़ा

महीनामौतें
अप्रैल85
मई81
जून73
जुलाई90
अगस्त158

मारवाड़ी श्मशानघाट में 12 लोगों का अंतिम संस्कार एक साथ करने की व्यवस्था है। एक जगह किसी का अंतिम संस्कार किया जाए तो उस जगह को खाली होने में 2 दिन का समय लग जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि आग शांत हुए बिना अस्थियां नहीं चुनी जा सकतीं।

हालांकि, श्मशानघाट में इको फ्रैंडली दाह संस्कार के लिए एक मशीन भी है, जिसमें हर 3 घंटे बाद एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। पर अब भी ज्यादातर लोग पारंपरिक तरीके से दाह संस्कार करने में यकीन रखते हैं और पिछले 8 दिनों में जिस तेजी से यहां लाशें आ रहीं हैं, उससे यहां अब जगह की कमी होने लगी है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, रायपुर में अब तक कोरोना के 13 हजार 690 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 7822 एक्टिव केस हैं। वहीं, इस बीमारी से शहर में अब तक 164 लोगों की जान जा चुकी है।

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