देश की पहली ऐसी शख्स बन गई है ये महिला, जिसकी न कोई जाति है और न ही कोई धर्म

4 वर्ष पहले
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वेल्लोर. तमिलनाडु में पेशे से वकील स्नेहा देश के पहली ऐसी महिला बन गई हैं, जिनकी न कोई जाति और न ही कोई धर्म। भारत में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी का No caste, No religion सर्टिफिकेट बना हो। स्नेहा ने खुद ये सर्टिफिकेट बनवाया है और उन्हें इस काम में 9 साल का समय लग गया। हालांकि, उनकी इस पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है। साउथ एक्टर कमल हसन ने भी उनकी कहानी ट्विटर पर शेयर कर सराहना की।

सर्टिफिकेट जरूरत हुई महसूस
- स्नेहा वेल्लोर के तिरूपत्तूर की रहने वाली हैं। स्नेहा के मुताबिक वो ही नहीं बल्कि उनके माता-पिता भी बचपन से ही सभी सर्टिफिकेट में जाति और धर्म का कॉलम खाली छोड़ दिया करते थे।
- उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि मैंने हमेशा खुद को भारतीय माना है। मैंने कभी भी खुद को जाति-धर्म में नहीं बांधा। हालांकि, मैंने महसूस किया हर जगह एप्लिकेशन में सामुदायिक प्रमाण पत्र अनिवार्य था।
- स्नेहा के मुताबिक, एप्लिकेशन के लिए उसे आत्म-शपथ पत्र हासिल करना ही था। ताकि वो कागजों में साबित कर सके कि वो किसी जाति और धर्म से नहीं जुड़ी हुई हैं।

9 साल बाद मिला सर्टिफिकेट
- स्नेहा ने 2010 में स्नेहा ने No Caste, No Religion के लिए आवेदन किया था। 5 फरवरी 2019 को बहुत ही मुश्किलों के बाद उन्हें यह सर्टिफिकेट मिला। अब स्नेहा पहली ऐसी शख्स है, जिनके पास यह सर्टिफिकेट है।
- स्नेहा खुद ही नहीं, बल्कि अपनी तीन बेटियों के फॉर्म में भी जाति और धर्म का कॉलम खाली छोड़ देती हैं। उनके इस कदम की काफी तारीफ हो रही है।