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कृषि कानूनों पर एक्सपर्ट्स की चर्चा:सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी ने कहा- किसानों के साथ 21 जनवरी को पहली मीटिंग करेंगे

नई दिल्ली5 महीने पहले
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कृषि कानूनों के खिलाफ किसान 55 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि कमेटी के सामने नहीं जाएंगे, सरकार को कानून वापस लेने चाहिए। फोटो सिंघु बॉर्डर की है। - Dainik Bhaskar
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान 55 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि कमेटी के सामने नहीं जाएंगे, सरकार को कानून वापस लेने चाहिए। फोटो सिंघु बॉर्डर की है।

नए कृषि कानूनों पर बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई कमेटी की मंगलवार को पहली बैठक दिल्ली में हुई। कमेटी के सदस्य अनिल घनवट ने बैठक के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया, "किसानों के साथ पहली मीटिंग 21 जनवरी को की जाएगी। जो किसान संगठन और स्टेकहोल्डर आना चाहेंगे, उनसे आमने-सामने बैठकर बात करेंगे। जो नहीं आ सकते हैं, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ने के इंतजाम किए जाएंगे।"

सरकार भी चर्चा में शामिल होना चाहे, तो स्वागत
घटवट ने कहा, "अगर सरकार भी हमसे बातचीत करना चाहे, तो स्वागत है। हम उनकी बात भी सुनेंगे। सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन कर रहे किसानों को बातचीत के लिए मनाने की है। इसके लिए हम अपने स्तर पर पूरी कोशिश करेंगे।"

एक सदस्य कमेटी छोड़ चुके हैं
कोर्ट ने 12 जनवरी को 4 सदस्यों की कमेटी बनाई थी। इसमें भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, इंटरनेशनल पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट अशोक गुलाटी और शेतकरी संघटन, महाराष्ट्र के अनिल घनवट शामिल किए गए। समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान होते ही किसानों ने इसे सरकार के समर्थन वाली कमेटी बता दिया। विवाद बढ़ा तो भूपिंदर सिंह मान ने अपना नाम वापस ले लिया।

समिति के सदस्य अनिल घनवट ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट कोई नया सदस्य नियुक्त नहीं करती है तो मौजूदा सदस्य अपना काम करते रहेंगे। हमें क्या-क्या करना है इसकी जानकारी कोर्ट से मिल गई है।

भूपिंदर मान ने क्या कहा था?
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने कहा था, "चार लोगों की कमेटी में मुझे जगह दी गई, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं। लेकिन, एक किसान और यूनियन लीडर होने के नाते आम लोगों और किसानों की आशंकाओं को देखते हुए, मैं इस कमेटी से अलग हो रहा हूं। मैं पंजाब और किसानों के हितों से समझौता नहीं कर सकता। इसके लिए मैं किसी भी पद को कुर्बान कर सकता हूं और हमेशा पंजाब के किसानों के साथ खड़ा रहूंगा।"