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दिल्ली दंगे के 6 आरोपियों को जमानत:दुकान के अंदर मिली थी 22 साल के दिलबर नेगी की अधजली लाश, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी आरोपियों को जमानत

दिल्ली4 महीने पहले
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दिल्ली में CAA का विरोध करने के दौरान भड़के दंगों में की गई एक हत्या के 6 आरोपियों को हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। मंगलवार को जमानत पाने वालों में ताहिर, शाहरुख, मोहम्मद फैजल, मोहम्मद शोएब, राशिद और परवेज शामिल हैं। इन छह आरोपियों पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी एरिया में एक मिठाई दुकान में आग लगाने और वहां काम करने वाले 22 साल के दिलबर नेगी की हत्या करने का आरोप है।

मामले की सुनवाई जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद कर रहे हैं। जस्टिस प्रसाद ने इस महीने की शुरुआत में आरोपियों की जमानत पर डिसिजन रिजर्व कर लिया था। इससे पहले उन्होंने मौके पर मौजूद गवाहों के बयान और दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता अमित महाजन की दलीलों को सुना था।

पुलिस ने दर्ज किया था मामला
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ गोकलपुरी थाना में आईपीसी की धारा 147 (दंगा करने की सजा), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस), 149 (गैरकानूनी सभा), 302 (हत्या), 201 (सबूत गायब करना), 436 (आग से शरारत) और 427 (नुकसान पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया थे।

स्थानीय पुलिस ने बाद में जांच के लिए इस केस को क्राइम ब्रांच की SIT को ट्रांसफर कर दिया। जांच के दौरान मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 4 जून 2020 को चार्जशीट दाखिल की गई।

दंगे से 6 महीने पहले दिल्ली आया था उत्तराखंड निवासी नेगी
आरोप है कि दंगे के दौरान जब भीड़ ने मिठाई की दुकान पर हमला बोला तो वहां काम करने वाला दिलबर नेगी अंदर ही मौजूद था। आरोपियों ने पहले उसके हाथ-पैर काट दिए और उसके बाद मिठाई की दुकान में आग लगा दी, जिसमें जलने के कारण उसकी मौत हो गई। बाद में जली हुई दुकान से उसकी अधजली लाश मिली थी। मृतक नेगी उतराखंड का रहने वाला था और घटना से 6 महीने पहले ही वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आया था।

उत्तर पूर्व दिल्ली में दंगे के दौरान भयानक उत्पात रहा था।
उत्तर पूर्व दिल्ली में दंगे के दौरान भयानक उत्पात रहा था।

गवाहों ने कहा था कि इमारत में छिपे लोग जलाए गए
पुलिस की तरफ से पेश गवाहों ने अदालत में कहा था कि दंगे के दौरान दंगाइयों ने पथराव किया, हिंदू विरोधी नारे लगाए, कई दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। दंगाई इस दौरान एक इमारत में घुस गए और एक व्यक्ति को मार डाला। उस इमारत जो लोग छिपे थे, उन्हें इमारत में आग लगाकर जला दिया गया।

सरकारी वकील ने जताया विरोध
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के वकील महाजन ने आरोपियों को जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने ये दलील दी कि सुबह शुरू हुए दंगे देर रात तक जारी रहे। ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता कि आरोपी दोपहर में दंगा करने वाली भीड़ का हिस्सा थे, लेकिन वे रात में दंगे में शामिल नहीं थे।

उन्होंने कोर्ट में यह तर्क दिया कि हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित धारा 149 आईपीसी के सिद्धांत को लागू करते हैं, ऐसा नहीं है कि प्रत्येक आरोपी या प्रत्येक आरोपी द्वारा निभाई गई भूमिका को कम से कम जमानत अर्जी पर बहस के समय दिखाया जाना चाहिए।

अगर हम यह दिखाने में सक्षम हैं कि वे दंगा करने वाली भीड़ का हिस्सा हैं, जो दंगों के लिए जिम्मेदार है, जिसके कारण दिलबर नेगी की मौत हो गई, कम से कम जमानत के लिए हमें और कुछ सोचने की जरूरत नहीं है।