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हमारे नेताओं ने हमें निराश किया:कश्मीर के लोगों ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में अपनी बात पुरजोर तरीके से नहीं रख पाए हमारे नेता

श्रीनगर4 महीने पहले

प्रधानमंत्री आवास पर गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच महा मंथन चला। मंथन का केंद्र बिंदु परिसीमन और विधानसभा चुनाव रहा। बैठक में मौजूद गृहमंत्री अमित शाह ने आश्वस्त किया कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की उनकी सरकार की प्राथमिकता है। बैठक के जरिए जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों को साधने में प्रधानमंत्री मोदी कामयाब रहे या नहीं, ये तो सरकार ही जानती होगी, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर के नेताओं की मुखालफत राज्य के लोग ही कर रहे हैं।

अनुच्छेद 370 वापस नहीं होगा: केंद्र
केंद्र सरकार ने 'अनुच्छेद 370' को लेकर साफ कर दिया है कि यह व्यवस्था वापस नहीं होगी। बैठक में मौजूद कांग्रेस पार्टी और दूसरे राजनीतिक दलों ने इस बात को माना है कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति का दौर शुरू हुआ। कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, जम्मू-कश्मीर में आज शांति है। सीमा भी शांत है। डीडीसी चुनाव भी हो चुके हैं। अब जल्द ही परिसीमन प्रक्रिया पूरी कर वहां चुनाव कराए जाएं। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।

हालांकि बैठक के बाद महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 की वकालत की। उन्होंने कहा- अनुच्छेद 370 हटाना जम्मू-कश्मीर के लोगों को कबूल नहीं है, लेकिन अब अपने ही नेताओं के रवैये को लेकर घाटी के लोगों में असंतोष है।

हमारे नेताओं ने निराश किया

श्रीनगर में रहने वाले वसीम अहमद का कहना है कि घाटी के नेताओं से बहुत सारी उम्मीदें थी। नेता अनुच्छेद 370 की बहाली के अलावा सारी बातें कर आए। वहां विकास पर बात हुई, चुनाव पर बात हुई, लेकिन 370 की बहाली पर किसी ने कोई बात नहीं की। श्रीनगर के ही रहने वाले जहूर अहमद का कहना है कि आम कश्मीरियों को उम्मीद थी कि अनुच्छेद 370 की बहाली पर बात होगी, लेकिन पता नहीं नेता क्या बात करके आए हैं।

वहीं अल्ताफ अहमद का कहना है कि कश्मीर के लीडर मीटिंग में केवल सुनने के लिए गए थे। वहां वो अपनी कोई बात रखकर नहीं आए हैं। दानिश अहमद का भी इस तरह का ही मत है। उनका कहना है- मुझे इस मीटिंग से कोई उम्मीद नहीं थी। जिन नेताओं को इन्होंने जेल में डाला, आज ये उन्हें ही बात करने के लिए बुला रहे हैं। कल तक ये नेता नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा थे, लेकिन अब इन्हें मीटिंग के लिए बुलाया गया।

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