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चीफ जस्टिस ने पति-पत्नी को मिलाया:अंग्रेजी में दिक्कत हो रही थी तो CJI ने तेलुगू में बात की, दहेज उत्पीड़न का 21 साल पुराना विवाद सुलझा

नई दिल्ली4 महीने पहले
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आंध्र के गुंटूर का रहने वाला था दंपती, 1998 में शादी हुई थी। - फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
आंध्र के गुंटूर का रहने वाला था दंपती, 1998 में शादी हुई थी। - फाइल फोटो
  • दहेज उत्पीड़न मामले में चीफ जस्टिस ने सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 21 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे दंपती को मिला दिया। मामला आंध्र प्रदेश के गुंटूर के रहने वाले दंपती का है। इस केस में पत्नी ने दहेज उत्पीड़न के मामले में पति को सुनाई गई जेल की सजा की अवधि बढ़ाने के लिए याचिका लगाई थी।

चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने दंपती से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की कोशिश की, लेकिन सुनवाई के दौरान महिला कोर्ट की कार्यवाही के अंग्रेजी में होने को लेकर असहज थी। सीजेआई इस बात को भांप गए और उन्होंने खुद तेलुगू भाषा में बातचीत शुरू की।

चीफ जस्टिस से महिला से कहा कि अगर आपका पति जेल चला गया तो आपको मासिक भत्ता नहीं मिल पाएगा। क्योंकि उसकी नौकरी छूट जाएगी। इस दौरान महिला ने चीफ जस्टिस की सलाह शांति से सुनी और पति के साथ रहने को सहमत हो गई। हालांकि महिला ने शर्त रखी कि पति उसका और उसके इकलौते बेटे की ठीक से देखभाल करेगा। कोर्ट ने दंपती से दो हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें जिक्र हो कि वे साथ रहना चाहते हैं।

20 साल से गुजारा भत्ता दे रहा था पति
शख्स के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह पिछले 2 दशक से पत्नी और बच्चे को गुजारा भत्ता दे रहा है। उनकी शादी 1998 में हुई थी। इसके एक साल बाद दोनों को बच्चा हुआ था। इसके कुछ दिनों बाद ही पत्नी ने पति और परिवार के 3 सदस्यों पर मामला दर्ज कराया। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में पति को 1 साल की सजा और जुर्माना लगाया और बाकी आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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