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कांग्रेस का चिंतन शिविर:2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर होगा मंथन, 7 राज्यों में जानें कांग्रेस की स्थिति

जयपुर8 दिन पहले
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राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर शुरू हो चुका है। 15 मई तक पार्टी यहां चिंतन बैठक करेगी। पार्टी में चल रही गुटबाजी और चुनावों में गिरते प्रदर्शन को लेकर यहां चिंतन हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, संभव है कि पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर भी यहां कोई बड़ा फैसला हो जाए।

चिंतन शिविर में मिशन 2024 पर भी रणनीति बनाई जाएगी। लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में चुनाव होने हैं। कांग्रेस सिर्फ दो राज्यों में सत्ता में है। कांग्रेस को आने वाले विधानसभा चुनाव में जीतने के लिए संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ कई बातों पर ध्यान देना होगा। अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस के सामने खड़ी कई समस्याओं पर काम करना होगा। आइये इन 7 राज्यों में समझते हैं कांग्रेस की स्थिति...

राजस्थान में दंगे से कई तबके हैं नाराज

राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से पिछले चुनाव में कांग्रेस को 108 और भाजपा 71 सीटें मिली थीं। राज्य में कांग्रेस ने पुरानी पेंशन लागू सहित लोक लुभावन योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन राज्य में दंगे, परीक्षाओं की अनियमितता जैसे कारणों से कई तबके नाराज हैं। इसके अलावा राजस्थान में पार्टी के अंदर की गुटबाजी कांग्रेस के लिए खतरा साबित हो सकती है। सीएम गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच तनातनी की खबरें हमेशा आती रहती हैं। कुछ महीनों पहले सचिन पायलट ने कांग्रेस छोड़ने का मन बना लिया था लेकिन पार्टी आलाकमान बड़ी मुश्किल से रोक पाए।

यूपी में कांग्रेस ने महिलाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा दिया था, लेकिन वहीं दूसरी तरफ राजस्थान सरकार के मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी पर रेप का आरोप लगा है। ऐसे में कांग्रेस की वापसी के लिए राज्य में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव में 40% महिलाओं को टिकट दिया था और ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा दिया था।
कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव में 40% महिलाओं को टिकट दिया था और ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा दिया था।

गुजरात में कांग्रेस के पास नहीं है बड़ा चेहरा

गुजरात में विधानसभा की 182 सीटें हैं। यहां भाजपा के पास 111 और कांग्रेस के पास केवल 63 सीटें हैं। गुजरात में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है, जिसके बाद पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के आदिवासी नेता रहे विधायक अश्विन कोतवाल भी बीजेपी में चले गए। इसके अलावा अब तक कुल 13 ऐसे विधायक या पूर्व विधायक हैं, जो कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं।

गुजरात में हार्दिक पटेल से भी कांग्रेस की दूरियां लगातार बढ़ रही हैं। हार्दिक पटेल सोशल मीडिया बायो से कांग्रेस का जिक्र भी हटा चुके हैं। ऐसे में उनके कांग्रेस छोड़ने की संभावना बढ़ती ही जा रही है। गुजरात में चुनावी लड़ाई चेहरों पर लड़ी जाती है लेकिन कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है। लोकल लीडरशिप दिल्ली पर निर्भर रहती है। कांग्रेस को अगर गुजरात में उठ खड़े होना है तो चेहरा सामने रखना ही होगा।

गुजरात में भाजपा हार्दिक पटेल को अपनी शामिल में करना चाह रही है। हार्दिक ने सोशल मीडिया बायो से कांग्रेस का जिक्र हटा दिया है।
गुजरात में भाजपा हार्दिक पटेल को अपनी शामिल में करना चाह रही है। हार्दिक ने सोशल मीडिया बायो से कांग्रेस का जिक्र हटा दिया है।

छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए हैं चुनौती

छत्तीसगढ़ में कुल 90 सीटें हैं, जिसमें से कांग्रेस के पास 71 और भाजपा के पास 14 सीटें हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि भाजपा के लिए चुनौती है। राज्य में कांग्रेस सरकार ने अपनी योजनाओं के माध्यम से घर-घर तक पहुंच बना ली है। किसान कर्ज माफी, बिजली बिल हॉफ, धान बोनस, गोबरधन न्याय योजना, किसान न्याय योजना आदि के जरिए कांग्रेस लोगों को अपना विकास मॉडल समझाना चाहती है और काफी हद तक कामयाब भी हुई है। छत्तीसगढ़ में भाजपा के पास रमन सिंह के अलावा कोई बड़ा चेहरा नहीं है।

सीएम भूपेश बघेल जनता का दिल जीतने के लिए कभी स्टूडेंट्स के साथ गिल्ली डंडा खेलते हैं तो कभी ठेठ छत्तीसगढ़ी किसान के अंदाज में नजर आते हैं।
सीएम भूपेश बघेल जनता का दिल जीतने के लिए कभी स्टूडेंट्स के साथ गिल्ली डंडा खेलते हैं तो कभी ठेठ छत्तीसगढ़ी किसान के अंदाज में नजर आते हैं।

एमपी में कांग्रेस को ले डूबी गुटबाजी

मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। यहां भाजपा की 127 और कांग्रेस की 96 सीटें हैं। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की बदहाली के 4 प्रमुख कारण हैं जमीनी निष्क्रियता, गुटबाजी, चेहरे का अभाव और मौके चूकना। कई सालों के बाद कांग्रेस को एमपी में बहुमत मिला लेकिन सरकार नहीं चला पाई। इसके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता को भाजपा में जाने से रोक नहीं पाई। पार्टी में गुटबाजी इतनी ज्यादा है कि कार्यकर्ता भी अपने नेता का नाम देखकर पार्टी कार्यक्रम में भाग लेते हैं। अगर 2023 में एमपी में कांग्रेस को चुनाव जीतना है तो सभी नेताओं को एक साथ मिलकर जन मुद्दों पर काम करना होगा।

मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ धरने पर बैठे दिग्विजय सिंह और पूर्व सीएम कमलनाथ आपस में ही भिड़ गए थे।
मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ धरने पर बैठे दिग्विजय सिंह और पूर्व सीएम कमलनाथ आपस में ही भिड़ गए थे।

हिमाचल में कांग्रेस के साथ न हो पंजाब जैसा हाल

हिमाचल प्रदेश में कुल 68 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें भाजपा के पास 44 और कांग्रेस के पास केवल 21 सीटें हैं। कांग्रेस ने प्रदेश में छह बार के सीएम रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी सांसद प्रतिभा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर नया कार्ड खेला है। हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह ऐसा चेहरा रहे, जिन्होंने अपने बूते कांग्रेस को कई बार सत्ता दिलाई। ऐसे में उनकी पत्नी सांसद प्रतिभा को प्रदेश अध्यक्ष बनाना पार्टी के लिए अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन पंजाब-हरियाणा की तरह यहां भी गुटबाजी कम नहीं है। कांग्रेस को इस बात पर ध्यान देना होगा कि पंजाब की परछाई हिमाचल पर न पड़े।

कांग्रेस ने राज्य संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए हिमाचल में सांसद और दिवंगत पूर्व सीएम वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है।
कांग्रेस ने राज्य संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए हिमाचल में सांसद और दिवंगत पूर्व सीएम वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है।

कर्नाटक में कांग्रेस के अंदर है भितरघात

कर्नाटक में कुल 222 विधानसभा सीटें हैं, जिसमे से भाजपा के पास 104 और कांग्रेस के पास 78 सीटें हैं। एमपी और राजस्थान की तरह यहां पर भी कांग्रेस के अंदर गुटबाजी देखने को मिलती है। यहां पर चुनाव से पहले ही सीएम पद के लिए सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के खेमे में जग छिड़ी हुई है। दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को सीएम के चेहरे के तौर आगे रख रहे हैं। अगर कर्नाटक में कांग्रेस को सरकार बनानी है तो दोनों नेताओं और उनके समर्थकों को साथ लाना होगा। इसके अलावा पार्टी से प्रमोद माधवराज जैसे बड़े नेता का जाना भी कांग्रेस को भारी पड़ सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शिवकुमार से विवाद की बात को खारिज करते हुए कहा था कि मेरे और डीके शिवकुमार के बीच कोई विवाद नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शिवकुमार से विवाद की बात को खारिज करते हुए कहा था कि मेरे और डीके शिवकुमार के बीच कोई विवाद नहीं है।

तेलंगाना में पार्टी छोड़कर जा रहे हैं कांग्रेसी विधायक

तेलंगाना की 119 सीटों वाली विधानसभा में टीआरएस को 88, कांग्रेस को 19 और भाजपा को 1 सीट मिली थी। चुनाव के कुछ महीने बाद कांग्रेस के कम से कम एक दर्जन विधायक पार्टी छोड़कर चले गए और टीआरएस में शामिल हो गए। पार्टी के सिर्फ छह विधायक रह जाने के कारण कांग्रेस ने विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी खो दिया है। प्रदेश में कांग्रेस अपने नेताओं को रोक पाने में असफल है, इसलिए सबसे पहले राज्य में कांग्रेस को अपनी पार्टी के नेताओं के मूड को समझना होगा और उन्हें दूसरे दल में जाने से रोकना होगा। इसके अलावा जनहित से जुड़ें मुद्दों पर बात करनी होगी।

तेलंगाना में एक साथ कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी को छोड़कर टीआरएस में शामिल हुए थे। अब पार्टी के पास केवल 6 विधायक हैं।
तेलंगाना में एक साथ कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी को छोड़कर टीआरएस में शामिल हुए थे। अब पार्टी के पास केवल 6 विधायक हैं।

पीके के फार्मूले पर मंथन कर सकती है कांग्रेस
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत कुमार की सोनिया गांधी के साथ 3 बैठकें हो चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हुई हार पर मंथन किया था। यूपी चुनाव की हार पर भी चर्चा की गई थी। उत्तरप्रदेश में हार के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इस्तीफा दे दिया था, उसके बाद से अभी तक प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली है।

ऐसे में चिंतन शिविर में यूपी को कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। इस पद के लिए प्रशांत कुमार ने '2 फॉर्मूले' दिए थे। उन्होंने कहा था कि प्रदेश को चार जोन में बांटकर चारों के अलग-अलग अध्यक्ष बनाए जाएं या फिर पार्टी का एक प्रदेश अध्यक्ष हो, जिसके नीचे चारों जोन के 4 कार्यकारी अध्यक्ष हों। पीके के दिए इस फार्मूले पर कांग्रेस काम कर सकती है।

पीके की सोनिया गांधी के साथ 3 बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें प्रशांत कांग्रेस को फिर से मजबूत करने के कई फार्मूले दे चुके हैं।
पीके की सोनिया गांधी के साथ 3 बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें प्रशांत कांग्रेस को फिर से मजबूत करने के कई फार्मूले दे चुके हैं।

सीएम गहलोत ने कहा- एक नए संकल्प के साथ होगा चिंतन शिविर
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हम सब सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में एक नए संकल्प के साथ चिंतन शिविर कर रहे हैं। हम इस शिविर से पार्टी के सिद्धांतों को दोबारा लोगों तक पहुंचाने में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर में ऐसी निति बनाई जाएगी, जिससे देश में भाईचारे व अंहिसा का माहौल हो सके और देश दोबारा विकास के रास्ते पर वापस आ सके।

दिल्ली से राहुल गांधी के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उदयपुर पहुंचे हैं। इस ट्रेन में एआईसीसी के कई दिग्गज नेता भी शामिल थे।
दिल्ली से राहुल गांधी के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उदयपुर पहुंचे हैं। इस ट्रेन में एआईसीसी के कई दिग्गज नेता भी शामिल थे।

जयपुर में भाजपा भी करेगी बैठक
राजस्थान में कांग्रेस के चिंतन शिविर के बाद भाजपा भी बैठक करने जा रही है, जिसमें देशभर से भाजपा के बड़े नेता शामिल हो सकते हैं। जयपुर में 19 मई से 21 मई तक आयोजित इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में भाजपा तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव का रोडमैप तैयार करेगी। इस बैठक में नड्डा के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल होंगे।