भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट / देश में डिटेंशन सेंटर होने के ये 4 सबूत, सरकारी दस्तावेज के अनुसार अकेले असम में ही 6 डिटेंशन सेंटर

बेंगलुरु में बन रहा डिटेंशन सेंटर। बेंगलुरु में बन रहा डिटेंशन सेंटर।
असम गोलपारा में बन रहा नया डिटेंशन सेंटर। असम गोलपारा में बन रहा नया डिटेंशन सेंटर।
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बेंगलुरु में बन रहा डिटेंशन सेंटर।बेंगलुरु में बन रहा डिटेंशन सेंटर।
असम गोलपारा में बन रहा नया डिटेंशन सेंटर।असम गोलपारा में बन रहा नया डिटेंशन सेंटर।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश में एक भी डिटेंशन सेंटर नहीं है। भास्कर ने खंगाला कि आखिर डिटेंशन सेंटर का सच क्या है?
  • भास्कर ने देशभर में पड़ताल की कि कहीं डिटेंशन सेंटर चल रहा है या नहीं, साथ ही नए डिटेंशन सेंटर बन रहे हैं या नहीं

दैनिक भास्कर

Dec 29, 2019, 07:21 AM IST

गुवाहटी (मनीषा भल्ला/ नबरुन गुहा). देश में सीएए और एनआरसी का विरोध चल है। पिछले दिनों अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बयान दिया कि देश में डिटेंशन सेंटर नहीं है। बस इसके बाद इसके होने और न होने की राजनीति शुरू हो गई। ऐसे में भास्कर ने देशभर में पड़ताल की कि कहीं डिटेंशन सेंटर चल रहा है या नहीं। साथ ही नए डिटेंशन सेंटर बन रहे हैं या नहीं।

इसमें हमें कई तरह के ऐसे सरकारी दस्तावेज मिले जो बताते हैं कि असम में ही 6 डिटेंशन सेंटर चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त असम के गोलपाड़ा के पास एक नया डिटेंशन सेंटर भी बनाया जा रहा है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने ही 46 करोड़ रुपए जारी किए हैं। 


असम हाईकोर्ट के वकील अमन वदूद बताते हैं कि असम में 6 डिटेंशन सेंटर हैं। ये जेलों के अंदर चल रहे हैं। इनका संचालन राज्य सरकार कर रही है। सरकार ने 2009 में डिटेंशन सेंटर बनाने पर फैसला लिया था, जिसके बाद इन्हें बनाया गया है। अमन बताते हैं कि जिन लोगों को फॉरेन ट्रिब्यूनल सुनवाई के बाद विदेशी घोषित कर देता है, उन्हें डिटेशन सेंटर भेजने के आदेश देता है।

प्रावधान के मुताबिक ऐसे लोगों को उनके देश वापस भेज दिया जाता है लेकिन असम सरकार के फरवरी 2019 में दिए गए शपथ पत्र के अनुसार तब तक केवल 4 लोगों को ही उनके देश वापस भेजा जा सका है। गोलपारा के किसनई कस्बे के आशूडुबी मोहल्ला में रहने वाले 68 वर्षीय सुधन सरकार यहां गारोहिल्स मेघालय से रहने आए थे।

वे कहते हैं कि हमने कभी बांग्लादेश नहीं देखा। फिर भी मुझे डी लिस्ट कर फरवरी 2016 में गोलपारा के डिटेंशन सेंटर में भेज दिया। सेंटर में सिर्फ चार फुट चौड़ा फर्श ही सोने के लिए मिलता था। सेंटर में कर्मचारी विदेशी कहकर ताना देते थे। सरकार साढ़े तीन साल बाद अगस्त 2019 में जमानत पर बाहर आए। वहीं असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने भास्कर को बताया कि डिटेंशन कैंपों में एक हजार से भी कम लोग अभी हैं।

एनआरसी प्रक्रिया में रिफ्यूजी सर्टीफिकेट न मानने के कारण करीब 2.5 से 3 लाख हिंदू एनआरसी सूची में नहीं आ पाए हैं। अगर रिफ्यूजी सर्टिफिकेट माना जाता तो लिस्ट से बाहर हुए हिंदुओं की संख्या 1.5-2 लाख से ज्यादा नहीं होती। वहीं इनके अलावा लोकसभा में इसी 3 दिसंबर को प्रश्न संख्या 2340 के जवाब में गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्‌डी ने बताया कि असम के डिटेंशन सेटर्स में 970 लोग हैं। 

जिनमें 324 महिलाएं हैं। वहीं इससे पूर्व 30 नवंबर को असम के संसदीय कार्यमंत्री चंद्र मोहन पटोवारे ने विधानसभा में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 935 लोगों को जमानत दी गई है। ये लोग 3 साल या उससे अधिक अवधि से डिटेंशन सेंटर्स में बंद थे। भास्कर ने उन लोगों से भी बात की जो खुद डिटेंशन सेंटर्स में रह चुके हैं।

डिटेंशन सेंटर में रहे 62 वर्षीय बिमल बैद्यय बताते हैं कि ‘मुझे एक हफ्ते का बताकर नवंबर 2016 में डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। लेकिन मैं लंबे समय तक यहां रहा। जब मैं बाहर निकला तो मेरी दुनिया पूरी तरह बदल चुकी थी। पत्नी की मौत हो चुकी थी।

मेरे डिटेंशन सेंटर जाने के बाद उसने खाना ही छोड़ दिया था। मेरा व्यवसाय भी बर्बाद हो गया।’ सोनितपुर जिले में रहने वाले अशोक पॉल कहते हैं कि ‘मेरे पिता दुलाल पॉल की मौत डिटेंशन सेंटर में हुई थी। अगर डिटेंशन सेंटर है ही नहीं तो मेरा पिता की मौत कहां हुई थी।’

पहला सबूत- लोकसभा में जवाब
3 दिसंबर 2019 को गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्‌डी ने लोकसभा को बताया कि असम में 6 डिटेंशन सेंटर हैं। कई सवालों के जवाब में यह बात कही गई है। 

दूसरा सबूत- सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2017 को एक याचिका पर सशर्त फैसला दिया था कि पीड़ित को 2 साल 4 माह बाद डिटेंशन सेंटर से छोड़ा जाए। 

तीसरा सबूत- गृह मंत्रालय ने प्रेस रिलीज में माना
9 जुलाई 2019 को पीआईबी के जरिये गृह मंत्रालय ने बताया कि असम में 6 डिटेंशन सेंटर हैं। वहीं असम विधानसभा में भी राज्य सरकार ने इसे माना। 


चौथा सबूत- गोलपारा में बन रहा नया डिटेंशन सेंटर

असम के गोलपारा के पास मटिया में तीन हजार लोगों की क्षमता वाला नया डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है। सेंटर मार्च 2020 तक तैयार हो पाएगा। असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक गोलपारा के डिटेंशन कैंप की स्थिति सही नहीं होने के कारण यह सेंटर बनाया जा रहा है।

और इधर बेंगलुरु में- पहले माना अब इनकार किया

वहीं दूसरी ओर बेंगलुरु के नजदीक सोंडेकोप्पा में 30 लोगों को की क्षमता वाला यह सेंटर बनकर तैयार है। कर्नाटक के गृहमंत्री वसवराज बोम्बई कैंप होने और उसके रिव्यू की बात कह चुके हैं। वहीं अब वे इसे डिटेंशन सेंटर कहने से इनकार करते हैं। समाज कल्याण विभाग ने इसे बनाया है। 

संसद में बताया सेंटर में कितने लोग

डिटेंशन सेंटर   पुरुष महिला कुल
गोलपारा 186 15 201
कोकराझार 09 131 140
सिल्चर 57 14 71
डिब्रूगढ़ 38  02 40
जोरहाट 132 64 196
तेजपुर 224 98 322
कुल 646 324 970

किस कानून के तहत बने हैं ये डिटेंशन सेंटर 
जुलाई 2019 में लोकसभा में गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्‌डी ने बताया है कि असम में डिटेंशन कैंपों की स्थापना के बारे में कानूनी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ऐसे डिटेंशन कैंप विदेशी विषयक अधिनियम, 1946 की धारा 3(2) (ड.) के तहत बनाए जाते हैं सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय इसके लिए एक मॉडल डिटेंशन सेंटर की मैनुअल भी जारी कर चुका है। जिसमें मानवाधिकारों को ध्यान में रखते हुए बिजली, पानी, शौचालय, मनोरंजन, रसोई आदि के स्तर बनाए रखने की बता कही गई है। 

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