मंडे पॉजिटिव / पहली बार संसद पहुंचीं 3 महिलाओं की प्रेरक कहानियां



बीजद सांसद चंद्राणी मुर्मू। बीजद सांसद चंद्राणी मुर्मू।
43 साल की महुआ  टीएमसी सांसद हैं। पं बंगाल के कृष्णानगर से जीती हैं। 43 साल की महुआ टीएमसी सांसद हैं। पं बंगाल के कृष्णानगर से जीती हैं।
वाईएसआर कांग्रेस की गोद्देती माधवी आंध्र की सबसे युवा सांसद हैं। वाईएसआर कांग्रेस की गोद्देती माधवी आंध्र की सबसे युवा सांसद हैं।
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बीजद सांसद चंद्राणी मुर्मू।बीजद सांसद चंद्राणी मुर्मू।
43 साल की महुआ  टीएमसी सांसद हैं। पं बंगाल के कृष्णानगर से जीती हैं।43 साल की महुआ टीएमसी सांसद हैं। पं बंगाल के कृष्णानगर से जीती हैं।
वाईएसआर कांग्रेस की गोद्देती माधवी आंध्र की सबसे युवा सांसद हैं।वाईएसआर कांग्रेस की गोद्देती माधवी आंध्र की सबसे युवा सांसद हैं।

  • 17वीं लोकसभा में सबसे ज्यादा 78 महिला सांसद चुनी गईं

Dainik Bhaskar

May 27, 2019, 09:45 AM IST

इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हूं, नौकरी ढूंढ रही थी, 45 दिन में सांसद बन गई : चंद्राणी 

 

चंद्राणी मुर्मू | किओन्झार (ओडिशा) . 2017 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। तभी से मैं नौकरी ढूंढ रही थी। चार कंपनियों में अप्लाई किया था। सरकारी नौकरी के भी लगभग सभी एग्जाम दे रखे हैं। 31 मार्च को अचानक मेरे मामा (हरमोहन सोरेन) ने फोन करके पूछा कि चुनाव लड़ सकती हो? उन्होंने कहा कि सीएम नवीन पटनायक किसी पढ़ी-लिखी महिला को टिकट देने की सोच रहे हैं। मैंने तुरंत सहमति दे दी। दरअसल, मेरे नाना 1980 और 1984 में दो बार कांग्रेस से सांसद थे। नाना की वजह से मुझ पर राजनीतिक असर रहा है। एक अप्रैल को मुझे फोन आया कि सीएम मिलना चाहते हैं। मैं उनसे मिली। तब भी मुझे नहीं लगा कि टिकट मिलेगा। फिर 2 अप्रैल को मेरा नाम घोषित हो गया। (जैसा अनिरुद्ध शर्मा को बताया)


अगले 45 दिन में मैं अनंत सर को हराकर सांसद बन गई। सच पूछिए तो मैं सभी इलाकों में प्रचार भी नहीं कर सकी। प्रचार के दौरान पहली बार हेलीकॉप्टर में बैठी। सोचिए, मिडिल क्लास में हेलीकॉप्टर किसे नसीब होता है? वह वाइल्ड ड्रीम में भी हेलीकॉप्टर के बारे में नहीं सोचता। चुनाव अभियान के दौरान जब मुझे टिकट मिला मेरा एक वीडियो (मोर्फ्ड फोटो के साथ) वायरल हो रहा था। मेेेरे नाम से अफवाह फैली। टिकट मिलने से एक तरफ नाम हो रहा था, वहीं दूसरी ओर बदनाम किया जा रहा था। इस घटना से बहुत आहत हुई। लेकिन, सबने भरोसा मुझमें भरोसा जताया तो मैं इस सदमे से उबर आई। राजनीति में मेरी रुचि थी और मैंने सोचा था कि अगर जीवन में कभी छोटा-मोटा मौका मिलेगा तो इस दिशा में जरूर जाऊंगी।

 

सबसे कम उम्र की महिला सांसद : 25 साल की बीजद सांसद चंद्राणी मुर्मू।  ओडिशा के किओन्झार से दो बार सांसद रहे भाजपा के अनंत नायक को 66203 वोट से हराकर संसद पहुंची हैं।

 

आदिवासी स्कूल में कॉन्ट्रैक्ट टीचर थी, पिता विधायक थे पर पैसा नहीं है : माधवी 

 

गोद्देती माधवी | अराकू (आंध्र प्रदेश) . अभी तक मैं एक अादिवासी स्कूल में कॉन्ट्रैक्ट टीचर थी। मेरे पिता गोद्देती डेमुडू के देहांत के बाद उन्हें जानने वाले लोगों ने कहा कि मुझे राजनीति में आना चाहिए। मैंने बात मान ली। पिता सीपीआई से दो बार विधायक रह चुके हैं। वे पक्के कम्युनिस्ट थे। उन्होंने कभी पैसा नहीं जोड़ा। मेरी मां सरकारी स्कूल में टीचर हैं। उनके वेतन से ही घर चलता है। मां घर से 21 किमी दूर बस से स्कूल आती-जाती हैं। मैं भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ही चलती हूं। हमारे पास कोई गाड़ी नहीं है। अब मैं वाईएसआर कांग्रेस में हूं। फिर भी अपने पिता को प्रेरणास्रोत माननी हूं। उन्हीं के विचारों पर राजनीति कर रही हूं। रोज सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाती हूं। चार किमी पैदल चलती हूं। घर पहुंचने से पहले कम से कम एक दर्जन नए लोगों से मिलती हूं। इससे मुझे मुद्दों को समझने में मदद मिलती है। (जैसा अमित निरंजन को बताया)

 

सबसे कम संपत्ति वाली सांसद : 26 साल की वाईएसआर कांग्रेस की गोद्देती माधवी आंध्र की सबसे युवा सांसद हैं। उनके पास महिला सांसदों में से सबसे कम 1.47 लाख रु. की चल-अचल संपत्ति है।

 

जितनी सहज न्यूयॉर्क में थी, उतनी ही कृष्णानगर की सड़कों पर हूं : महुआ

 

महुआ मोइत्रा | कृष्णानगर (प. बंगाल) . कृष्णानगर की गलियों तक पहुंचने का मेरा सफर अमेरिका में मैसाच्यूसेट्स से शुरू हुआ था। मैंने वहां इकोनोमिक्स और मैथ्स की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन के बाद बैंकिंग क्षेत्र में कदम रखा। धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए जेपी मॉर्गन में वाइस प्रेसिडेंट बन गई। न्यूयॉर्क और लंदन में काम किया। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कहां तो मैं लुई विताें के हैंडबैग, बॉबी ब्राउन के आइलाइनर और कारनेशन लिप कलर जैसे ब्रांड्स पसंद करती थी, लेकिन अब मुझे फुलिया कॉटन की लोकल साड़ी भी उतनी ही पसंद है। मुझे इन दोनों दुनियाओं में कोई टकराव नहीं दिखता। मैं न्यूयॉर्क में जितना सहज थी, उतनी ही कृष्णानगर की सड़कों पर हूं। यह रास्ता मैंने खुद चुना है। मैंने नादिया जिले की करीमनगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा। (जैसा मुकेश कौशिक को बताया)


वहां मैंने अपने तमाम बैंकिंग अनुभव जमीन पर उतरे। 150 करोड़ रुपए के काम कराए। इसी से साबित किया कि मैं लोकसभा चुनाव के लिए प्रबल दावेदार हूं। ममता बनर्जी को मेरा काम पसंद आया। होलयोक कॉलेज से निकलकर मेरे साथी रियूनियन में किस्से सुनाते थे, कि कौन कहां डायरेक्टर, मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रेसीडेंट बन गया। जुलाई 2008 में कांग्रेस की सिपाही बन गई। राहुल गांधी ने आम आदमी की सिपाही प्रोग्राम चलाया हुआ था। यह मेरे लिए नर्सरी थी।  2009 का चुनाव कांग्रेस ने टीएमसी के साथ मिलकर लड़ा। कृष्णानगर सीट ममता की पार्टी ने जीती। दो साल बाद मैं ममता के साथ चली गई।

 

कॉर्पोरेट जगत से सियासत तक : 43 साल की महुआ  टीएमसी सांसद हैं। पं बंगाल के कृष्णानगर से जीती हैं। सियासत में आने से पहले जेपी माॅर्गन कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट थीं। 2008 में राहुल कांग्रेस में लाए।

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