• Hindi News
  • National
  • Those four characters, who played a vital role in creating land for this major change in Kashmir

कश्मीर के किरदार / राम माधव ने सियासी जमीन तैयार की, सत्यपाल मलिक ने राज्य का माहौल सामान्य रखा



सत्यपाल मलिक और राम माधव। सत्यपाल मलिक और राम माधव।
बीवीआर सुब्रमण्यम और विजय कुमार। बीवीआर सुब्रमण्यम और विजय कुमार।
X
सत्यपाल मलिक और राम माधव।सत्यपाल मलिक और राम माधव।
बीवीआर सुब्रमण्यम और विजय कुमार।बीवीआर सुब्रमण्यम और विजय कुमार।

  • कश्मीर में बदलाव के लिए मलिक और राम माधव के अलावा दो अफसर बीवीआर सुब्रमण्यम और के विजय कुमार ने अहम भूमिका निभाई
  • सुब्रमण्यम ने सरकार और सुरक्षा बलों के बीच में कोऑर्डिनेशन कायम रखा, विजय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राज्यपाल के बीच कड़ी बने रहे

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2019, 07:45 AM IST

नई दिल्ली. अनुच्छेद-370 में बदलाव के साथ जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव भी राज्यसभा में पास हो गया। जम्मू-कश्मीर अब राज्य नहीं रहा है। यह अब केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जाना जाएगा। एक का नाम जम्मू-कश्मीर और दूसरे का नाम होगा- लद्दाख होगा। मोदी सरकार की इस कोशिश को अमलीजामा पहनने में चार किरदार- मौजूदा राज्यपाल सत्यपाल मलिक, भाजपा महासचिव राम माधव, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम और अफसर विजय कुमार ने अहम भूमिका निभाई। 

 

 

1. सत्यपाल मलिक: सत्यपाल मलिक अगस्त 2018 में राज्यपाल बने, राज्यपाल शासन के बीच प्रदेश को संभाला और बदलाव के बीच माहौल नहीं बिगड़ने दिया
सत्यपाल मलिक की जम्मू-कश्मीर राज्यपाल पद पर नियुक्ति 2 वजहों से चर्चाओं में थी। पहली वजह- इससे पहले यहां ब्यूरोक्रेट बैकग्राउंड के लोग ही राज्यपाल बनते रहे थे। राजनीतिक व्यक्ति का पद पर आना संकेत था कि केंद्र कश्मीर में दफ्तरबंद राजनीति नहीं, ग्राउंड रियलिटी की टोह लेना चाहता है। दूसरी वजह- मलिक की कभी संघ से ज्यादा करीबियां नहीं रहीं, भाजपा में भी 2004 से ही थे। उनकी नियुक्ति के बाद से राज्य में 35-ए पर केंद्र सरकार की सक्रियता लगातार बढ़ती रही। तमाम उठापटक और योजनाओं के बीच राज्य में हालात सामान्य रखने का जिम्मा सत्यपाल के पास ही था। रविवार तक वे कहते भी रहे- सब सामान्य है। सभी लोग निश्चिंत रहिए। कुछ भी छिपाकर थोड़ी न करेंगे।

 

2. राम माधव: राम माधव प्रैक्टिकल अप्रोच अपनाने वाले के तौर पर जाने जाते हैं, संघ में पोशाक बदलने, टेक्नो-फ्रेंडली होने की बात करते रहे हैं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नियमावली में एक बात खास तौर पर दर्ज है- प्रसिद्धि परिमुक्त, यानी प्रसिद्धि या चर्चाओं से दूर रहने की कोशिश करें। इसी का पालन करते हैं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव। 2014 में वे संघ से भाजपा मंे आए। असम में तरुण गोगोई का किला गिराया। फिर एक और सरहदी राज्य जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनवाई। गठबंधन का इस्तेमाल कर घाटी का माहौल पक्ष में किया। फिर मौका भांप गठबंधन से हटने का दांव चला, जिससे कश्मीर में बदलाव की जमीन तैयार हो सके। संघ के बैकग्राउंड से आने वाले राम माधव मीडिया में सुर्खियां नहीं बटोरते, पर पिछले 2-3 साल में पार्टी का संभावनाशील चेहरा बनकर उभरे हैं।

 

3. बीवीआर सुब्रमण्यम: मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सुब्रमण्यम पीएमओ में ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे हैं, मोदी के आने के बाद भी वे एक साल पीएमओ में रहे

बीवीआर सुब्रमण्यम जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम को पिछले साल जून में बीबी व्यास की जगह पद पर नियुक्त किया था। सुब्रमण्यम को नक्सल मोर्चे पर सफल अफसर के तौर पर देखा जाता रहा है। नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में गृह विभाग का काम देखते हुए उन्होंने स्थानीय पुलिस, अर्धसैन्य बलों और राज्य सरकार के विभागों के बीच समन्वय बनाया। उनकी इस छवि ने उन्हें कश्मीर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पहुंचकर वे अजीत डोभाल के लगातार संपर्क में रहे। सिक्योरिटी फोर्स और ब्यूरोक्रेट्स के बीच समन्वय स्थापित रखने का काम किया।

 

4.के. विजय कुमार: 2004 में कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को मारने के लिए गठित हुई स्पेशल टास्क फोर्स के चीफ थे, ऑपरेशन सफल हुआ था

के विजय कुमार 1985 से 1990 तक राजीव गांधी को सिक्योरिटी देने वाले टीम का हिस्सा रहे। विजय के करिअर का बड़ा पड़ाव 2004 में आया, जब उन्हें चंदन तस्कर वीरप्पन के आतंक को खत्म करने के लिए बनी स्पेशल टास्क फोर्स को लीड करने के लिए चुना गया। वीरप्पन मारा गया। 2018 में विजय जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल के सलाहकार बनकर पहुंचे। कुमार को कश्मीर में अजीत डोभाल की कोर टीम का हिस्सा माना जाता है। डोभाल जितनी बार भी कश्मीर आए, कुमार से मिले। मिलकर योजना बनाई। कुमार ने इस एक साल में राज्यपाल सत्यपाल मलिक और अजीत डोभाल के बीच कड़ी के तौर पर काम किया, ताकि योजना बनाने के साथ-साथ राज्य में सामान्य माहौल भी बना रहे।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना