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महाराष्ट्र में हादसा:ठाणे के भिवंडी में तीन मंजिला इमारत गिरने के 45 घंटे बाद मलबे से एक व्यक्ति को जिंदा निकाला गया; अब तक 40 की मौत

मुंबईएक वर्ष पहले
ठाणे में जिस वक्त हादसा हुआ, तब लोग सो रहे थे।
  • यह बिल्डिंग 1986 में बनी थी, इसमें करीब 20 परिवार रहते थे, बारिश की वजह से बिल्डिंग कमजोर हो चुकी थी
  • मलबे से बाहर निकाले गए व्यक्ति ने कहा- ऐसा लगा कि बचाव दल को ईश्वर ने भेजा था, वह मेरे लिए फरिश्ते की तरह थे

महाराष्ट्र के ठाणे स्थित भिवंडी में हुए हादसे में मरने वालों की संख्या 40 हो गई है। यहां सोमवार तड़के तीन मंजिला बिल्डिंग गिर गई थी। मलबे में 10 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका थी। इस बीच, स्थानीय रहवासियों ने 19 लोगों को मलबे से बाहर निकाला था। मंगलवार को बचाव दल ने 45 घंटे बाद 42 साल के एक व्यक्ति को जिंदा निकाला।

खालिद अब्दुल खान को जैसे ही बाहर निकाला, वे खड़े हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल से उन्हें कुछ देर बाद छुट्टी दे दी गई। इसके बाद वे दूसरे लोगों की मदद के लिए हादसे वाले स्थान पर पहुंच गए। खान समेत अब तक 25 लोगों को इस मलबे से जिंदा निकाला गया है।

टीडीआरएफ के सदस्य मेरे लिए फरिश्ते की तरह थे

खान ने बताया कि मलबे में फंसे होने के दौरान मैंने टीडीआरएफ टीम के सदस्य की आवाज सुनी। वे अंदर फंसे किसी भी इंसान की तलाश कर रहे थे और उन्हें आवाज दे रहे थे। यह आवाज बचाव टीम में शामिल अक्षय पाटिल की थी। आवाज सुनने के बाद मेरे अंदर यह विश्वास जगा कि मैं जिंदा बचाया जा सकता हूं।

ऐसा लग रहा था जैसे भगवान ने उसे मुझे बचाने के लिए भेजा था। टीडीआरएफ के सदस्य मेरे लिए फरिश्ते की तरह थे।

स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुटे हैं।
स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुटे हैं।

इससे पहले, यह हादसा सोमवार तड़के 3.40 बजे हुआ। इस समय ज्यादातर लोग सो रहे थे। बताया जाता है कि मुंबई में पिछले दिनों हुई भारी बारिश की वजह से बिल्डिंग कमजोर हो चुकी थी। इसमें 21 परिवार रहते थे। एनडीआरएफ की टीम ने सोमवार सुबह मलबे से एक बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया था।

बिल्डिंग के चारों तरफ घना इलाका है।
बिल्डिंग के चारों तरफ घना इलाका है।

सरकार ने कहा- अवैध निर्माण पर कार्रवाई तय हो
महाराष्ट्र सरकार में गृह निर्माण मंत्री जितेन्द्र आव्हाण ने कहा कि 1986 में इस बिल्डिंग का निर्माण हुआ था। इसे खाली करने का नोटिस दिया गया था। कानूनी झंझट के कारण इसे खाली नहीं किया गया। कुछ दिन पहले मैंने इसको लेकर एक मीटिंग की थी। मैं इस बात को दोहरा रहा हूं कि अवैध निर्माण को लेकर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक इलाके के पुलिस और वार्ड ऑफिसर पर जिम्मेदारी तय नहीं होती तब तक ऐसी चीजें नहीं रुकेंगी।

बिल्डिंग जर्जर हालत में थी, कई बार नोटिस भी दिया गया।
बिल्डिंग जर्जर हालत में थी, कई बार नोटिस भी दिया गया।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने शोक जताया
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हादसे पर दुख जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता देने की कोशिशें की जा रही हैं।’’

फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत और बचावकार्य जारी है।
फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत और बचावकार्य जारी है।
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