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पहल / नासिक के सिविल हॉस्पिटल में रोज नए रंग की चादर इस्तेमाल होने से घटी नवजातों की मौतें

to decrease Nashik civil hospital used colour coded bedsheets to protect newborns from infection
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to decrease Nashik civil hospital used colour coded bedsheets to protect newborns from infection

  • अस्पताल प्रशासन का दावा- स्पेशल केयर यूनिट में रोज चादरें बदलने से संक्रमण का खतरा कम हुआ
  • इस यूनिट में सोमवार को हरे और मंगलवार को नीले जैसे रंगों की चादरें बिछाई जा रहीं

दैनिक भास्कर

Aug 21, 2019, 07:35 AM IST

हेल्थ डेस्क. शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए महाराष्ट्र के नासिक में सिविल हॉस्पिटल ने नया प्रयोग किया है। यहां स्पेशल केयर यूनिट में बिस्तर पर हर दिन अलग-अलग रंग की चादरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसे सोमवार के लिए हरा और मंगलवार को नीला। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इस पहल से नवजातों को रोजाना साफ और संक्रमण मुक्त चादरें मिलती हैं। इसके अलावा हर क्युबिकल में मॉप्स और बकेट लगाए गए। इन कोशिशों से शिशु मृत्यु दर में 8% की कमी आई है।

एक चादर का इस्तेमाल सिर्फ एक दिन

स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट के प्रभारी पंकज गाजरे के मुताबिक, सोमवार को हरी, मंगलवार को नीली, बुधवार को गुलाबी रंग की बेडशीट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, गुरुवार को महरून, शुक्रवार को केसरिया, शनिवार को हल्की हरी और रविवार को हल्की नीली चादरें बिछाई जाती हैं। एक बेडशीट का इस्तेमाल एक ही दिन होता है।

इस केयर यूनिट में पहले प्रति माह औसतन 346 में से 55 बच्चों की मौत हो जाती थी। अब यहां हर माह करीब 250 से 300 नवजात भर्ती किए जाते हैं। शिशु मृत्यु दर 8 प्रतिशत तक घट गई है। नवजातों की बेहतर देखभाल के लिए केयर यूनिट में 16 बेड, तीन मेडिकल ऑफिसर, 8 नर्स और 4 लोगों का सहयोगी स्टाफ है। 

 

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सेंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे 2017 के मुताबिक, महाराष्ट्र में शिशु मृत्यु दर पिछले दस सालों में घटी है। 2008 में मृत्यु दर प्रति 1 हजार बच्चे में से 24 थी, जो 2017 में 13 पर आ गई। यानी हर एक हजार में अब 13 बच्चों की मौत हो रही है। यह आंकड़ा केरल और तमिलनाडु के करीब पहुंच गया है।

महाराष्ट्र में मृत्यु दर कम होने की एक वजह खास एक्शन प्लान भी है।शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए 2014 में डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने मिलकर एवरी न्यूबॉर्न एक्शन प्लान शुरू किया था, जिसका महाराष्ट्र में सकारात्मक असर देखने को मिला।

 

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