पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Today History 2 May: Aaj Ka Itihas | Mahatma Gandhi Assassination And Nathuram Godse Narayan Apte

आज का इतिहास:महात्मा गांधी की हत्या के लिए पंजाब हाईकोर्ट में शुरू हुई थी नाथूराम गोडसे एवं अन्य के खिलाफ सुनवाई

2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

मोहनदास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को हुई थी। यह तो सबको याद होगा ही, पर हत्या से जुड़े केस में एक और महत्वपूर्ण तारीख है- 2 मई 1949, जब बापू के हत्यारों की सजा को लेकर पंजाब हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी। करीब 60 दिन सुनवाई चली और 21 जून को आरोपियों को सजा सुनाई गई।

बात बापू की हत्या की है तो इतिहास के उस काले दिन की शुरुआत सामान्य ही थी। बापू रोजाना की तरह शाम पांच बजे प्रार्थना के लिए निकले थे। प्रार्थना शुरू होती, उससे पहले एक शख्स भीड़ में से आगे बढ़ा और बापू के पैर छूकर अपनी पिस्टल से उन पर 3 गोलियां दाग दी। बापू की उसी जगह मौत हो गई। गोली चलाने वाला शख्स पकड़ा गया, नाम था- नाथूराम गोडसे।

इस मामले में बंदूक पहुंचाने से लेकर गोडसे को प्रार्थना स्थल तक पहुंचने में मदद करने तक कई लोग शामिल थे। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने 8 लोगों को आरोपी बनाया। नाथूराम गोडसे, उसका भाई गोपाल गोडसे, नारायण आप्टे, विष्णु करकरे, मदनलाल पाहवा, शंकर किस्तैया, दत्तात्रय परचुरे, विनायक सावरकर। इस मामले की सुनवाई लाल किले में बने ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई थी, जिसका फैसला 10 फरवरी 1949 को आया था। जज आत्मा चरण ने नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी की सजा सुनाई। सबूतों के अभाव में सावरकर को बरी किया। बाद में दत्तात्रेय परचुरे और शंकर किस्तैया को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। बाकी 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई। दोषियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब हाईकोर्ट में अपील की।

उस समय पंजाब का हाईकोर्ट शिमला के मिंटो कोर्ट में था। 1904 में बने इस भवन में ही मामले की अंतिम सुनवाई हुई। गोडसे ने वकील की सेवाएं लेने से इनकार किया और खुद ही अपनी पैरवी की। उसका मकसद खुद को निर्भीक और हिंदूवादी विचारधारा के नायक के तौर पर पेश करना था। उसे कोई पछतावा नहीं था। अन्य आरोपियों के लिए अलग-अलग वकील मुकदमे लड़ रहे थे।

पंजाब हाईकोर्ट ने 21 जून 1949 को फैसला सुनाया। 315 पन्ने के फैसले में गोडसे और आप्टे की फांसी की सजा बरकरार रखी और सजा की तारीख 15 नवंबर 1949 तय की गई। गोडसे के परिवार ने तत्कालीन गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी के सामने दया याचिका भी लगाई थी। इस बारे में कहा जाता है कि दया याचिका की जानकारी गोडसे को नहीं थी। 5 नवंबर 1949 को गवर्नर जनरल राजगोपालाचारी के सामने दया याचिका आई और 7 नवंबर को उन्होंने दया याचिका खारिज कर दी। 15 नवंबर 1949 को गोडसे और आप्टे को अंबाला जेल में फांसी पर लटका दिया गया। 12 अक्टूबर 1964 को गोपाल गोडसे, विष्णु करकरे और मदनलाल पाहवा उम्रकैद की सजा काटकर रिहा हुए।

कौन था नारायण आप्टे
गांधी की हत्या का जिक्र होते ही केवल नाथूराम गोडसे ही जबान पर आता है, लेकिन गोडसे के साथ 15 नवंबर 1949 को नारायण आप्टे को भी फांसी पर लटकाया गया था। नारायण आप्टे पुणे के एक ब्राह्मण परिवार से था। 1932 में बीएससी करने के बाद वो अहमदनगर के एक स्कूल में पढ़ाने लगा। वो हिन्दू राष्ट्र दल से जुड़ा और उसकी मुलाकात नाथूराम गोडसे से हुई। दोनों साथ में अखबार का काम देखने लगे। गांधी की हत्या की साजिश रचने से लेकर उसे अंजाम देने तक में आप्टे शामिल था।

(गांधी की हत्या से जुड़ी सभी जानकारी पंजाब हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और महात्मा गांधी की हत्या के मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस जीडी खोसला की किताब से ली गई है।)

ओसामा बिन लादेन अमेरिका में हुए 9/11 हमले का मास्टरमाइंड था, जिसे अमेरिकी सेना ने ढूंढकर एक गोपनीय ऑपरेशन में पाकिस्तान के एबटाबाद में 2 मई 2011 को मार गिराया।
ओसामा बिन लादेन अमेरिका में हुए 9/11 हमले का मास्टरमाइंड था, जिसे अमेरिकी सेना ने ढूंढकर एक गोपनीय ऑपरेशन में पाकिस्तान के एबटाबाद में 2 मई 2011 को मार गिराया।

बिन लादेन आतंक के 10 साल
अमेरिका ने 11 सितंबर 2001 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का बदला पूरे दस साल बाद लिया। पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपे ओसामा बिन लादेन को ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर के तहत खत्म किया गया। यह पूरा ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि पाकिस्तान सरकार तक को पता नहीं चला कि अमेरिकी सेना के विशेष दस्ते ने उसकी सीमा में घुसकर आतंकवादी संगठनों के सरगना ओसाम बिन लादेन को खत्म कर दिया है।

जिस समय लादेन के गोपनीय ठिकाने पर ऑपरेशन चल रहा था, तब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, उस समय विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अन्य अफसरों के साथ उसका सीधा प्रसारण कुछ इस तरह देखा। यह फोटो ऑपरेशन के कुछ दिन बाद जारी हुई थी।
जिस समय लादेन के गोपनीय ठिकाने पर ऑपरेशन चल रहा था, तब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, उस समय विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अन्य अफसरों के साथ उसका सीधा प्रसारण कुछ इस तरह देखा। यह फोटो ऑपरेशन के कुछ दिन बाद जारी हुई थी।

करीब 25 सील कमांडों ने 6 अमेरिकी हेलिकॉप्टर में अफगानिस्तान से उड़ान भरी। 90 मिनट के सफर के बाद ये हेलिकॉप्टर इस्लामाबाद से 120 किमी दूर एबटाबाद स्थित कंपाउंड में उतरे। मकान की तीसरी मंजिल पर ओसामा था, कमांडो वहां पहुंचे और लादेन के चेहरे व सिर पर गोली मारी। शव को एक बैग में पैक कर अफगानिस्तान ले गए। पूरा ऑपरेशन 40 मिनट चला। इसके बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ओसामा की मौत की पुष्टि की। अभियान में ओसामा की पत्नी और एक बेटे की भी मौत हो गई।

देश-दुनिया की इन घटनाओं के लिए भी 2 मई को याद किया जाता है-

  • 2008: बर्मा में चक्रवात नरगिस की वजह से 1 लाख 38 हजार लोग मारे गए और लाखों लोग बेघर हुए।
  • 2003: भारत ने पाकिस्तान से राजनयिक संबंधों को फिर से जोड़ने का ऐलान किया। दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ दिए गए थे।
  • 1986: अमेरिका की एन. बैन्क्राफ़ उत्तरी ध्रुव पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं।
  • 1950: फ्रांस ने कोलकाता के पास स्थित चंद्रनगर को भारत सरकार को सौंपा।
  • 1933: जर्मनी में हिटलर ने ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया।
  • 1519: महान चित्रकार लिओनार्दो दा विंची का निधन।