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आज का इतिहास:क्रिकेटर बनने का सपना देखा और बन गए बॉलीवुड स्टार; ट्यूमर ने थामा था इरफान का सफर

6 महीने पहले
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“आदमी का सपना टूट जाता है न, तो आदमी खत्म हो जाता है” मार्च 2020 में आई फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ का ये डायलॉग मिडिल क्लास के सपनों को पंख देता आया है। ये फिल्म एक ऐसे कलाकार की आखिरी फिल्म थी जिसने अपनी फिल्मों में अपने हर किरदार को जिया है। हम बात कर रहे हैं इरफान खान की। भारतीय सिनेमा का ये मंझा हुआ कलाकार 2020 में आज ही के दिन इस दुनिया को अलविदा कह गया।

इरफान का जन्म 7 जनवरी 1967 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था। इरफान को क्रिकेटर बनना था, लेकिन किस्मत उन्हें नेशनल स्‍कूल ऑफ ड्रामा में ले आई। यहां उनकी मुलाकात सुतापा सिकदर से हुई जिनसे बाद में इरफान ने शादी की।

इरफान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ाई पूरी कर मुंबई आ गए। यहां उन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया। 1988 में आई ‘सलाम बॉम्बे’ इरफान की पहली फिल्म थी। इस फिल्म में इरफान को एक छोटा रोल मिला। इतना छोटा कि शायद किसी का ध्यान भी नहीं गया होगा कि ये दुबला-पतला लड़का कौन है? इसके बाद कई फिल्मों में इस तरह के रोल करते रहे, लेकिन जिस स्टारडम के वो हकदार थे, वो उन्हें नहीं मिली थी। 2003 में ‘हासिल’ फिल्म रिलीज हुई उसके बाद ‘मकबूल’। यहां से इरफान को प्रसिद्धि मिलने लगी। उसके बाद इरफान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में…
2012 में इरफान की फिल्म आई। नाम था ‘पान सिंह तोमर’। इस फिल्म में इरफान ने बीहड़ के डाकू का किरदार निभाया। इसके लिए इरफान को बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। फिल्म के एक सीन ने खूब वाहवाही बटोरी। जब सिस्टम से निराश और बंदूक उठा चुका पान सिंह तोमर बोलता है कि बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में… उसके बाद तो उनके काम का डंका बोला। बॉलीवुड में पीकू, हिंदी मीडियम तो हॉलीवुड में ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘द अमेजिंग स्पाइडर मैन’, ‘जुरासिक वर्ल्ड’ में उनके किरदारों ने खूब प्रभावित किया। एक लंबे संघर्ष के बाद इरफान को शोहरत मिली थी। पर 2018 में इरफान को पता चला कि वे न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर से पीड़ित है। इलाज के लिए विदेश में भी रहे। लगा कि सब ठीक हो रहा था, तब पिछले साल यानी 2020 में मुंबई में ही उनका इंतकाल हो गया।

बांग्लादेश में समुद्री तूफान
साल 1991 में 29 अप्रैल की रात समुद्री तूफान ने बांग्लादेश में इस कदर कहर बरपाया कि एक लाख से भी ज्यादा लोग मारे गए। लाखों बेघर हो गए। 2बी नाम का यह तूफान इतना घातक था कि इसकी वजह से समुद्र में 15 से 20 फीट ऊंची लहरें उठने लगीं। द्वीप डूब गए। 15 दिनों तक लाशों को हटाने का काम चलता रहा। इस तूफान को 20वीं सदी के सबसे भयानक तूफानों में से एक माना जाता है।

बांग्लादेश में 29 अप्रैल 1991 को आए तूफान की वजह से हजारों मकान जमींदोज हो गए थे।
बांग्लादेश में 29 अप्रैल 1991 को आए तूफान की वजह से हजारों मकान जमींदोज हो गए थे।

तूफान की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चटगांव पोर्ट पर खड़ा एक 100 टन वजनी जहाज बहकर करीब 2 किलोमीटर दूर कर्णफुली नदी के पुल से जा टकराया। इस टक्कर से जहाज के दो टुकड़े हो गए। ऐसे ही सैकड़ों की संख्या में नावों और जहाजों का नुकसान हुआ।

तूफान से सबसे ज्यादा नुकसान चित्तागोंग इलाके में हुआ था। यहीं पर बांग्लादेशी वायुसेना का बेस भी है। यहां मिग-19 समेत करीब 40 विमान खड़े थे, लेकिन तूफान से इतना नुकसान हुआ कि ये किसी काम नहीं आए। अगर समय रहते इन्हें सुरक्षित जगह पहुंचा दिया जाता तो ये बचाव कार्य में काम आ सकते थे। तूफान से कितना नुकसान हुआ इसका कोई सटीक आंकड़ा अभी तक नहीं है। मरने वालों की संख्या 1 से डेढ़ लाख के बीच बताई जाती है। 10 लाख घर तबाह हो गए जिसकी वजह से करीब 1 करोड़ लोग बेघर हो गए।

प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की शाही शादी
प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की शादी को आज 10 साल पूरे हो गए। 2011 में आज ही के दिन प्रिंस विलियम ने केट मिडलटन से शादी की थी। प्रिंस विलियम को ड्यूक ऑफ कैम्ब्रिज और उनकी पत्नी केट को डचेस ऑफ कैम्ब्रिज की उपाधि मिली हुई है। साल 2016 में दोनों पहली बार भारत आए थे।

आधुनिक समय की सबसे चर्चित शाही शादी का चित्र। इस पर करीब 3 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे।
आधुनिक समय की सबसे चर्चित शाही शादी का चित्र। इस पर करीब 3 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे।

सन् 2001 में केट और प्रिंस विलियम की पहली मुलाकात हुई जब दोनों सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते थे। इसके बाद से दोनों अकसर साथ देखे जाते रहे। जुलाई 2013 में दोनों को एक बेटा हुआ जिसका नाम प्रिंस जॉर्ज रखा गया। इसके बाद मई 2015 में दोनों फिर से एक बेटी प्रिंसेज शैरलॉट के माता-पिता बने। साल 2018 में दोनों को एक और बेटा प्रिंस लुईस हुआ। दोनों की शादी लंदन के ऐतिहासिक चर्च वेस्टमिंस्टर ऐबी में हुई। इसी चर्च में महारानी एलिजाबेथ और महारानी विक्टोरिया की शादी भी हुई थी। पूरे ब्रिटेन के लिए ये दिन इतना बड़ा था कि यहां के सभी नागरिकों को इस दिन छुट्टी दी गई थी।

देश-विदेश में 29 अप्रैल को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है-

  • 2010ः भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने डिप्लोमैट्स के बीच शांति वार्ता पर बातचीत शुरू करने पर सहमति दी। 2008 के मुंबई हमले के बाद बढ़े तनाव को शांत करने की कोशिश पहली बार दोनों देशों के नेताओं ने की।
  • 2008ः भारत और ईरान के बीच 7 बिलियन डॉलर की गैस पाइपलाइन का मुद्दा एजेंडे में टॉप पर था, जब अमेरिका की प्रोजेक्ट पर आपत्तियों के बावजूद इरान के प्रेसिडेंट भारत आए थे।
  • 2006: पाकिस्तान ने हत्फ-6 का परीक्षण किया।
  • 1999ः नई दिल्ली में बारटेंडर जेसिका लाल की मनु शर्मा ने एक बार में गोली मारकर हत्या कर दी थी। जेसिका लाल हत्याकांड एक चर्चित केस बना। 2006 में शर्मा को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 2011 में इस पर एक फिल्म भी बनी- ‘नो वन किल्ड जेसिका’।
  • 1993: पहली बार बकिंघम पैलेस को आम जनता के लिए खोला गया।
  • 1939: नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया।
  • 1954: प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और चीन के झाउ एनलाई ने शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों पर हस्ताक्षर किए। भारत में इसे पंचशील संधि कहते हैं। यह संधि 3 जून को लागू हुई थी।