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आज का इतिहास:देश की रेडियो सर्विस को ऑल इंडिया रेडियो नाम मिला, आज देश की 99% आबादी तक है आकाशवाणी की पहुंच

2 महीने पहले
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1936 में आज ही के दिन भारतीय रेडियो सेवा को ऑल इंडिया रेडियो नाम मिला था। इससे पहले इसे इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस के नाम से जाना जाता था। आगे चलकर इसे आकाशवाणी के नाम से भी जाना गया। देश में रेडियो की शुरुआत 23 जुलाई 1927 को हुई। रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे से शुरू हुआ सफर 94 साल बाद देश की 99.18% आबादी तक पहुंच चुका है।

23 जुलाई 1927 को बॉम्बे और 5 महीने बाद कलकत्ता में रेडियो का प्रसारण शुरू हुआ। 12 साल बाद अक्टूबर 1939 में ऑल इंडिया रेडियो की विदेश सेवा शुरू की गई। इसी साल पहली बार पश्तो भाषा में भी प्रसारण शुरू हुआ।

आजादी के वक्त भारत में 9 रेडियो स्टेशन नियमित प्रसारण करना शुरू कर चुके थे। जब भारत-पाकिस्तान अलग हुए तो इनमें से 3 पाकिस्तान में चले गए। उस समय तक भारत की केवल 11% आबादी तक ही ऑल इंडिया रेडियो की पहुंच थी।

1956 में ऑल इंडिया रेडियो को आकाशवाणी नाम दिया गया और अगले ही साल विविध भारती शुरू किया गया। कहा जाता है कि रेडियो सीलोन को टक्कर देने के लिए विविध भारती शुरू किया गया था। धीरे-धीरे आकाशवाणी में कार्यक्रमों का विस्तार किया गया। संगीत, नाटक, क्रिकेट कमेंट्री और अलग-अलग विधाओं से जुड़े प्रोग्राम प्रसारित करना शुरू किए गए।

उसके बाद आकाशवाणी ने दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की की। आज आकाशवाणी दुनिया के सबसे बड़े ब्रॉडकास्टिंग संस्थान में से एक है। देशभर में 262 रेडियो स्टेशन के जरिए भारत की 99.18% आबादी तक इसकी पहुंच है। 25 से भी ज्यादा भाषाओं में 100 से भी ज्यादा देशों में आकाशवाणी के जरिए प्रसारण किया जाता है।

आकाशवाणी का समाचार विभाग रोजाना अलग-अलग भाषाओं में 647 समाचार बुलेटिन का प्रसारण करता है।

एयर इंडिया की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान
8 जून 1948। दिन मंगलवार। रात के करीब 10 बजे। मुंबई का सांताक्रूज एयरपोर्ट। आम दिनों के मुकाबले आज यहां चहल-पहल ज्यादा थी। प्रेस वालों का तांता लगा था। लोग एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखकर गर्दन ऊंची कर रनवे की तरफ देखने की कोशिश कर रहे थे। रनवे पर मार्टिन L-749A कांस्टेलेशन एयरक्राफ्ट शान से खड़ा था। रात करीब सवा 11 बजे इस एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी। इसी के साथ भारत के इतिहास में ये दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा गया। एयर इंडिया की ये पहली इंटरनेशनल फ्लाइट थी।

8 जून को उड़ा ये विमान 10 जून को लंदन पहुंचा। करीब 5 हजार किलोमीटर के सफर के दौरान विमान काइरो और जिनेवा दो जगहों पर रुका। विमान में जे आर डी टाटा और जामनगर के नवाब आमीर अली खान को मिलाकर कुल 35 लोग सवार थे। विमान को मालाबार प्रिंसेस नाम दिया गया और इसके कैप्टन के आर गुज्दर थे। यात्रियों से भारत से लंदन तक के सफर के 1720 रुपए लिए गए।

एयर इंडिया की पहली अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट शुरू होने के मौके को यादगार बनाने के लिए बाद में डाक टिकट भी जारी किया गया।
एयर इंडिया की पहली अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट शुरू होने के मौके को यादगार बनाने के लिए बाद में डाक टिकट भी जारी किया गया।

इस पल के लिए एयर इंडिया महीनों पहले से तैयारी कर रही थी। आजादी के पहले से ही जे आर डी टाटा की टाटा एयरलाइंस देशभर में डोमेस्टिक फ्लाइट उड़ाती थी। भारत सरकार ने टाटा एयरलाइंस में 49% हिस्सेदारी खरीदी और इसका नाम एयर इंडिया कर दिया गया। अब बारी थी एयर इंडिया को इंटरनेशनल फ्लाइट उड़ाने की जिम्मेदारी देने की। एयर इंडिया ने इसके लिए नए स्टाफ की भर्ती की। जिनेवा, काइरो और लंदन में नए ऑफिस खोले गए।

2000: सीरियल चर्च ब्लास्ट
साल 2000 में आज ही के दिन कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के सेंट एन चर्च में 2 बम धमाके हुए थे। इसकी जिम्मेदारी दीनदार अंजुमन नामक एक संगठन ने ली थी। इसी संगठन ने आंध्र प्रदेश, गोवा और कर्नाटक में भी चर्च में धमाके किए। 9 जुलाई को जगजीवन राम नगर के एक चर्च में धमाका करने के बाद संगठन से जुड़े आतंकी वैन से लौट रहे थे। तभी वैन में रखे बम फट गए और 3 आतंकियों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक वैन उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजर रही थी इस वजह से वैन में रखे बम फट गए। कोर्ट ने इस सीरियल ब्लास्ट मामले में 23 लोगों को दोषी ठहराया था।

8 जून के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

2014: रूस की टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा ने सिमोना हालेप को हराकर फ्रेंच ओपन खिताब जीता।

2009: मशहूर पटकथा लेखक, नाट्य निर्देशक, कवि और अभिनेता हबीब तनवीर का निधन।

1992: वर्ल्ड ओशियन डे मनाने की शुरुआत हुई। इस दिन को पहली बार ब्राजील में मनाया गया था।

1972: वियतनाम युद्ध के दौरान एसोसिएटेड प्रेस के फोटोग्राफर निक की खींची फोटो ने युद्ध की भयावहता को दुनिया के सामने रखा। फोटो के लिए निक को पुलित्जर पुरस्कार दिया गया।

1953: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने वॉशिंगटन के रेस्टोरेंट्स को काले लोगों को खाना खिलाने से मना करने पर रोक लगाई।

1915: लोकमान्य तिलक की लिखी ‘गीता रहस्य’ प्रकाशित हुई।