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आज का इतिहास:मल्टी टैलेंटेड किशोर दा का निधन; आभास कुमार गांगुली से किशोर कुमार बने, फिर मधुबाला से शादी के लिए करीम अब्दुल नाम रखा

15 दिन पहले
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आज ही के दिन भारतीय सिनेमा के कोहिनूर किशोर कुमार ने दुनिया को अलविदा कहा था। अभिनेता, संगीतकार, गायक, लेखक, निर्देशक और निर्माता किशोर कुमार अपने आप में एक बहुआयामी शख्सियत थे। उन्हें एक ऐसे शख्स के तौर पर याद किया जाता है, जो हमेशा अपनी शर्तों पर जिया और जो भी किया, वो इतिहास बन गया।

किशोर का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था। किशोर कुमार जितना एक गायक के तौर पर जाने जाते हैं, उतना ही एक अभिनेता के तौर पर भी।

किशोर कुमार के करियर की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फिल्म शिकारी (1946) से हुई। इस फिल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने लीड रोल निभाया था। उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फिल्म जिद्दी में। इसमें किशोर ने देव आनंद के लिए गाना गाया। किशोर कुमार केएल सहगल के जबर्दस्त प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया। उन्होंने राजेश खन्ना के लिए 92 फिल्मों में रिकॉर्ड 245 गाने गाए। 1997 में मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर अवॉर्ड शुरू किया।

किशोर कुमार के साथ मधुबाला। बीमारी की वजह से मात्र 36 साल की उम्र में ही मधुबाला का निधन हो गया था।
किशोर कुमार के साथ मधुबाला। बीमारी की वजह से मात्र 36 साल की उम्र में ही मधुबाला का निधन हो गया था।

किशोर कुमार ने चार शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी बंगाली गायिका और अभिनेत्री रूमा गुहा ठाकुरता उर्फ ​​रूमा घोष थीं। ये शादी 1950 से 1958 तक, यानी महज 8 साल चली। दूसरी पत्नी अभिनेत्री मधुबाला थीं। मधुबाला के साथ किशोर ने चलती का नाम गाड़ी (1958) और झूमूओ (1961) समेत कई फिल्मों में काम किया था। मधुबाला संग उनका रिश्ता कुछ खास था, क्योंकि मधुबाला से जिस वक्त किशोर कुमार को प्यार हुआ, वो दिल की बीमारी से जूझ रही थीं। मधुबाला से शादी के लिए किशोर कुमार ने इस्लाम कुबूल कर लिया था और अपना नाम करीम अब्दुल रख लिया था। मधुबाला के बाद किशोर कुमार ने योगिता बाली और लीना चंद्रावरकर से शादी की थी।

बॉलीवुड में कई सिंगर्स आए और गए, लेकिन किशोर कुमार की आवाज का जादू आज भी बरकरार है।

1999: अटलजी तीसरी बार PM बने और पहली बार कार्यकाल पूरा किया

आज ही के दिन 13 अक्टूबर 1999 में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री चुने गए और यह प्रधानमंत्री के तौर पर उनका पहला कार्यकाल था, जिसे उन्होंने पूरा किया। 1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि, उनकी सरकार 13 दिनों में ही संसद में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाने के चलते गिर गई।

1998 में दोबारा लोकसभा चुनाव हुए। इनमें पार्टी को ज्‍यादा सीटें मिलीं और कुछ अन्‍य पार्टियों के सहयोग से वाजपेयी जी ने NDA का गठन किया और वे फिर प्रधानमंत्री बने। यह सरकार 13 महीनों तक चली, लेकिन बीच में ही जयललिता की पार्टी ने सरकार का साथ छोड़ दिया, जिसके चलते सरकार गिर गई। 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर से सत्ता में आई और इस बार वाजपेयी जी ने अपना कार्यकाल पूरा किया।

अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन।
अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन।

1952 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, पर सफलता नहीं मिली। वाजपेयी को पहली बार सफलता 1957 में मिली थी। तब जनसंघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया। लखनऊ में वे चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी जमानत जब्त हो गई, लेकिन बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचे।

1792: आज ही के दिन शुरू हुआ था व्हाइट हाउस का निर्माण ​​​​​​

आज ही के दिन आधिकारिक तौर पर व्हाइट हाउस का निर्माण शुरू हुआ था। 16 जुलाई 1790 को अमेरिकी कांग्रेस ने रेजिडेंस एक्ट पास किया। इसके बाद राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने कमीशन अपॉइन्ट किया, ताकि राष्ट्रपति आवास के लिए फेडरल कन्स्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारा जा सके। इसके ठीक बाद राष्ट्रपति वॉशिंगटन ने एक फ्रेंच इंजीनियर को प्रेसिडेंट हाउस के सर्वे के लिए अपॉइन्ट किया, जिसके बाद व्हाइट हाउस की जगह तय हुई।

फोटो 1950 में व्हाइट हाउस के मेंटेनेंस के दौरान का है।
फोटो 1950 में व्हाइट हाउस के मेंटेनेंस के दौरान का है।

मार्च 1792 में कमीशन ने व्हाइट हाउस के लिए नेशनल डिजाइन कॉम्पिटिशन का विज्ञापन दिया। इसी साल जुलाई में आयरलैंड के आर्किटेक्ट जेम्स होबन के डिजाइन को व्हाइट हाउस के लिए सिलेक्ट किया गया। आज ही के दिन 13 अक्टूबर 1792 में आधिकारिक तौर पर व्हाइट हाउस का निर्माण शुरू हुआ।

13 अक्टूबर के दिन को इतिहास में इन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है...

2013: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में भगदड़ से 109 लोगों की मौत।

2012: पाकिस्तान के डेरा आदम में आत्मघाती हमले में 15 लोगों की मौत।

2011: दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले हिंदी के कठिन शब्दों की जगह उर्दू, फारसी, सामान्य हिंदी और अंग्रेजी के शब्दों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

2006: बांग्लादेश के मो. यूनुस और उनके द्वारा गठित ग्रामीण बैंक को नोबेल पुरस्कार।

2005: जर्मनी के प्रख्यात नाटककार हेराल्ड पिंटर को वर्ष 2005 का साहित्य का नोबल देने का ऐलान।

2004: सऊदी अरब ने हर साल एक लाख श्रमिकों की कटौती की घोषणा की।

2003: डलास में 26 घंटे तक चले मुश्किल ऑपरेशन के बाद मिस्र के जुड़वां बच्चों के आपस में जुड़े सिर को अलग किया गया।

2002: इंडोनेशिया के बाली नाइट क्लब में हुए विस्फोट में 200 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए।

2001: नाइजीरिया में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा में लगभग 200 लोग मारे गए।

2000: दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति किम दाई जुंग को शांति का नोबेल पुरस्कार।

1999: कोलंबिया विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री प्रो. रॉबर्ट मुंडेल को वर्ष 1999 का नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान।

1987: कोस्टारिका के राष्ट्रपति ऑस्कर ऑरियस को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला।

1976: बोलिविया में बोइंग जेट विमान दुर्घटनाग्रस्त, करीब 100 लोगों की मौत।

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