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आज का इतिहास:उस महान वैज्ञानिक का निधन जिन्होंने 76 साल में एक बार दिखने वाले धूमकेतु की खोज की थी

8 दिन पहले
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दुनिया का हेली धूमकेतु से परिचिय कराने वाले महान वैज्ञानिक एडमंड हेली का आज ही के दिन 1742 में निधन हुआ था। एडमंड हेली एक प्रसिद्ध खगोलविद (एस्ट्रोनॉमर), गणितज्ञ, मौसम विज्ञानी और भौतिक विज्ञानी थे। उनका जन्म 29 अक्टूबर 1656 को इंग्लैंड के शोरडिच में हुआ था।

एडमंड हेली की प्रारंभिक शिक्षा लंदन के सेंट पॉल स्कूल से हुई थी। आगे चलकर हेली ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्वींस कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। बाद में ऑक्सफोर्ड से ही मास्टर्स की डिग्री हासिल की।

एडमंड हेली ने किया था न्यूटन के साथ भी काम

एडमंड हेली महान वैज्ञानिक न्यूटन के समकालीन थे। उन्होंने न्यूटन के रिसर्च में भी बहुत सहयोग किया था। एक ओर वह खगोल से जुड़ी रिसर्च करते थे, तो वहीं दूसरी ओर न्यूटन के रिसर्च कार्यों में भी सहयोग करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने गति के सिद्धांत और गुरुत्वाकर्षण के नियम बताने वाली न्यूटन की किताब 'प्रिंसिपिया' के प्रकाशन में भी उनकी मदद की थी।

हेली धूमकेतु की खोज का श्रेय

एडमंड हेली को सबसे ज्यादा शोहरत हेली धूमकेतु की खोज के लिए मिली। एडमंड ने 1705 में दुनिया का परिचय एक ऐसे धूमकेतु से कराया, जो 76 सालों में एक बार ही धरती के पास से गुजरता है। वैसे तो पृथ्वी के पास से कई धूमकेतु गुजरते हैं, लेकिन हेली ऐसा धूमकेतु है, जिसे खुली आंखों से भी देखा जा सकता है। इसे देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती।

एडमंड हेली ने की थी 76 साल में एक हार दिखाई देने वाले हेली धूमकेतु की खोज
एडमंड हेली ने की थी 76 साल में एक हार दिखाई देने वाले हेली धूमकेतु की खोज

एडमंड हेली ने एक धूमकेतु के भ्रमण-पथ की स्टडी करते हुए भविष्यवाणी की थी कि यह धरती से अगली बार 1758 में दिखाई देगा। उनकी भविष्यवाणी तो सही साबित हुई, लेकिन एडमंड हेली उसे खुद नहीं देख सके, क्योंकि 1742 में ही उनकी मौत हो गई थी। उनकी धूमकेतु से जुड़ी भविष्यवाणी के सही साबित होने की वजह से इस धूमकेतु का नाम 'हेली धूमकेतु' पड़ गया।

हेली ने धूमकेतु विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया

एडमंड हेली ने चंद्रमा और विभिन्न तारों के पथों का अध्ययन किया। उन्होंने धूमकेतु की खगोलीय गतिविधियों का अध्ययन किया। इससे पूर्व लोगों में धूमकेतुओं को लेकर अनेकों भ्रांतियां थीं, जिससे समाज पर गलत प्रभाव पड़ रहा था।

धूमकेतु धूल-मिट्टी के बादल की तरह होते हैं, जो सैकड़ों सालों में एक बार दिखाई देते हैं। हेली ऐसा धूमकेतु भी है, जिसे एक जीवनकाल में दो बार देखने की उम्मीद की जा सकती है। आखिरी बार हेली धूमकेतु को 1986 में देखा गया था और अब अगली बार यह 2061 में दिखाई दे सकता है।

पानीपत की तीसरी लड़ाई शुरू

आज ही के दिन 1761 में अफगानिस्तान के शासक अहमद शाह अब्दाली और मराठा सेनापति सदाशिव राव भाऊ के बीच पानीपत की तीसरी लड़ाई शुरू हुई थी। इस युद्ध में मराठों की कुल सेना 45,000 थी और अब्दाली के पास 65,000 सैनिक थे।

इस युद्ध में आधे समय तक मराठों का पलड़ा भारी था, लेकिन तभी पेशवा के पुत्र विश्वास राव को गोली लगी और वो शहीद हो गए। विश्वास राव की मौत के बाद सदाशिव राव भाऊ अपना आपा खो उठे। वह हाथी से उतरे और घोड़े पर बैठकर अब्दाली की सेना के बीच घुसकर आक्रमण करने लगे। इस कोशिश में उनकी जान चली गई। इसके बाद मराठा सेना में भगदड़ मच गई और वो लड़ाई हार गई।

भारत और दुनिया में 14 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाएं :

2007: नेपाल में अंतरिम संविधान को मंजूरी मिली।

2002: ब्रिटेन सरकार ने घोषणा की कि करीब 11 महीने तक देश में फैली फुट एंड माउथ बीमारी को मध्यरात्रि से खत्म माना जाएगा।

1994: 300 वर्ष में पहली बार ब्रिटेन के शाही परिवार के किसी सदस्य ने कैथोलिक धर्म अपनाया। एक प्राइवेट सर्विस में डचेस ऑफ केन्ट कैथोलिक चर्च की सदस्य बनीं।

1977: फॉर्मूला वन रेस में फर्राटा भरने वाले पहले भारतीय नारायण कार्तिकेयन का जन्‍म आज के दिन हुआ था।

1974: विश्व फुटबाल लीग की स्थापना की गई।

1969: भारत के दक्षिणी राज्य मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु किया गया।

1918: फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ कैलाक्स को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

1907: जमैका में भूकंप से किंगस्टन शहर तबाह हो गया और लगभग 900 से ज्यादा लोग मारे गए।

1867: पेरू ने स्पेन के खिलाफ जंग का ऐलान किया।

1809: इंग्लैंड और स्पेन ने नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ गठबंधन किया।

1641: यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ने मलक्का शहर पर विजय प्राप्त की।