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आज का इतिहास:महेला जयवर्धने और कुमार संगकारा के बीच टेस्ट इतिहास की सबसे लंबी पार्टनरशिप, 15 सालों बाद आज भी कोई नहीं तोड़ पाया है ये रिकॉर्ड

2 महीने पहले
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क्रिकेट के इतिहास में 29 जुलाई 2006 को ऐसा रिकॉर्ड बना था, जिसे 15 साल बाद भी कोई तोड़ नहीं पाया है। आज ही के दिन 2006 में टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी पार्टनरशिप हुई थी। श्रीलंकाई बैट्समैन महेला जयवर्धने और कुमार संगकारा ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए 624 रन बनाए थे।

इस पार्टनरशिप के दौरान जयवर्धने ने 374 रन और संगकारा ने 287 रन की इनिंग खेली थी। इससे पहले सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड भी श्रीलंकाई जोड़ी सनथ जयसूर्या और रोशन महानामा के नाम पर था। जो 1997 में भारत के खिलाफ बना था।

27 जुलाई से कोलंबो में शुरू हुए पहले टेस्ट में साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया। मुथैया मुरलीधरन और दिलहारा फर्नांडो की बॉलिंग के आगे साउथ अफ्रीका की टीम 50.2 ओवर में 169 रन ही बना सकी। दोनों ने 4-4 विकेट लिए। साउथ अफ्रीका की ओर से एबी डिविलियर्स ने ही सबसे ज्यादा 65 रन बनाए।

इसके बाद श्रीलंका बैटिंग के लिए मैदान में आई। डेल स्टेन ने श्रीलंका के दोनों ओपनर को दहाई का आंकड़ा भी नहीं छूने दिया। उसके बाद क्रीज पर कुमार संगकारा और महेला जयर्वधने आए। पहले ही दिन दोनों ने अर्धशतक लगाकर टीम के स्कोर को 128 तक पहुंचाया।

मैच के दूसरे दिन क्रीज पर महेला जयवर्धने और कुमार संगकारा।
मैच के दूसरे दिन क्रीज पर महेला जयवर्धने और कुमार संगकारा।

अगले दिन दोनों ने मिलकर ग्राउंड के हर एक कोने पर खूबसूरत बाउंड्रीज जड़ीं। पूरा दिन जयवर्धने और संगकारा के नाम ही रहा। साउथ अफ्रीका के बॉलर्स को एक भी विकेट नहीं मिला। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक दोनों दोहरा शतक जड़ चुके थे। श्रीलंका का स्कोर 485 पर पहुंच गया था।

तीसरे दिन यानी 29 जुलाई को लंच ब्रेक तक दोनों ने 570 रनों की पार्टनरशिप कर ली थी। दोनों अभी भी सबसे लंबी पार्टनरशिप (576 रन) से 7 रन दूर थे। लंच के बाद दोनों ने ये रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। 624 रन की साझेदारी करने के बाद आखिरकार एंड्रयू हॉल की गेंद पर संगकारा आउट हुए।

इसी के साथ ये पार्टनरशिप टूट गई, लेकिन दोनों ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। जयवर्धने के 374 रन पर आउट होते ही पारी घोषित कर दी गई। श्रीलंका का स्कोर 756 रन था। टेस्ट इतिहास में ये चौथा सबसे बड़ा स्कोर था। श्रीलंका ने ये मैच एक इनिंग और 153 रनों से जीता था।

1958: आज ही बना था नासा

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया की दो बड़ी शक्तियों- अमेरिका और सोवियत संघ में शीत युद्ध की शुरुआत हुई। यानी आर्थिक, राजनीतिक और कई मोर्चों पर एक अघोषित प्रतिस्पर्धा ने जन्म लिया। दोनों ही देशों में अंतरिक्ष में भी एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ लगी थी।

4 अक्टूबर 1957 को सोवियत संघ ने स्पूतनिक को लॉन्च कर अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा की शुरुआत कर दी थी। सोवियत संघ की इस उपलब्धि से अमेरिका में हड़कंप मच गया। अमेरिका को लगने लगा था कि सोवियत संघ इस तरह मिसाइल और सैटेलाइट लॉन्च कर अमेरिका के लिए खतरा बन सकता है।

1958 में बनने के बाद ही नासा ने अपने पहले मिशन पर काम करना शुरू कर दिया। नासा का ये पहला ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम था।
1958 में बनने के बाद ही नासा ने अपने पहले मिशन पर काम करना शुरू कर दिया। नासा का ये पहला ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम था।

इस दौर को स्पूतनिक क्राइसिस कहा जाता है। स्पूतनिक क्राइसिस से निपटने के लिए नेशनल एडवाइजरी कमेटी फॉर एयरोनॉटिक्स की एक मीटिंग बुलाई गई। नासा के बनने से पहले यही कमेटी एयरोनॉटिक्स से जुड़ा सारा कामकाज देखती थी। मीटिंग में अंतरिक्ष से जुड़े कामकाज देखने के लिए एक फेडरल एजेंसी बनाने का प्रस्ताव रखा गया। ये एजेंसी अंतरिक्ष से जुड़े सभी नॉन मिलिट्री एक्टिविटी को अंजाम देगी।

29 जुलाई 1958 को अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एक्ट पर साइन किए। इसी एक्ट के जरिए नासा को बनाया गया। इसी साल 1 अक्टूबर से नासा ने 100 मिलियन डॉलर के फंड से अपना कामकाज शुरू किया। आज नासा को स्पेस रिसर्च की अग्रणी एजेंसी में शुमार किया जाता है। अपनी स्थापना के बाद से ही नासा ने स्पेस से जुड़ी कई उपलब्धियां हासिल की हैं।

आज इंटरनेशनल टाइगर डे

आज इंटरनेशनल टाइगर डे है। दुनियाभर में हर साल बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है। सबसे पहले साल 2010 में रूस के सेंट पीट्सबर्ग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में इंटरनेशनल टाइगर डे मनाने की शुरुआत हुई थी। उसके बाद से हर साल 29 जुलाई को इस दिन को पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

भारत में 70 के दशक से ही बाघों को बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए थे। देशभर में कई टाइगर रिजर्व बनाए गए जिसका नतीजा ये हुआ कि आज दुनियाभर के 70 फीसदी बाघ भारत में पाए जाते हैं। 2019 में बाघों की जनगणना हुई थी जिसमें पता लगा कि पूरे देश में 2,977 बाघ हैं।

मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में आराम करते बाघ।
मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में आराम करते बाघ।

2014 में भारत में बाघों की संख्या 2226 थी। यानी भारत में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 526 बाघ हैं। इसके बाद कर्नाटक में 524 और उत्तराखंड में 442 बाघ मौजूद हैं। भारत में हर 4 साल में बाघों की गिनती की जाती है।

29 जुलाई को इतिहास में इन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है…

2015: माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज-10 लॉन्च किया।

1987: भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंका के राष्ट्रपति जे आर जयवर्धने ने जातीय मुद्दों पर भारत-श्रीलंका समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

1981: प्रिंस चार्ल्स और लेडी डायना स्पेंसर की शादी हुई।

1921: हिटलर नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी का प्रमुख नेता चुना गया।

1914: दुनिया की पहली ट्रांसकॉन्टिनेंटल टेलीफोन सर्विस लाइन की शुरुआत हुई।

1904: आधुनिक भारत की बुनियाद रखने वाली औद्योगिक हस्तियों में से एक जेआरडी टाटा का जन्म हुआ।

1891: प्रसिद्ध भारतीय सामाजिक सुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर का निधन हुआ।

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