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पंजाब / भारत-पाक में तनाव, फिर भी 5 दशक से हुसैनीवाला में सरहद पारकर तिरंगा उतारने की परंपरा जारी



tradition of unloading the tricolor continues at the border in Hussainiwala Punjab
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tradition of unloading the tricolor continues at the border in Hussainiwala Punjab
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  • कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पाकिस्तान के साथ सीमा पर तनाव चल रहा है
  • पाक ने कारोबार रोका, ट्रेन बंद की पर हुसैनीवाला में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का तरीका अब भी नहीं बदला
  • भारतीय जवान पाक सीमा में, जबकि पाकिस्तानी रेंजर्स भारतीय सीमा में आकर झंडा उतारते हैं

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2019, 10:34 AM IST

फिरोजपुर (अमित कुमार निरंजन/रवि कुमार). कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पाकिस्तान के साथ सीमा पर तनाव चल रहा है। समझौता एक्सप्रेस रद्द करने से लेकर व्यापार तक में बंदिशें लगाकर दोनों ही देश एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश में लगे हैं। लेकिन पंजाब के हुसैनीवाला क्षेत्र में होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी आज भी करीब पांच दशक पुरानी परंपरा के आधार पर होती है। 

पांच मिनट तक जीरो लाइन पार करते हैं जवान

  1. भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे हुसैनीवाला में रोज शाम को भारत और पाकिस्तान के जवान अपना झंडा उतारने के लिए पांच मिनट तक जीरो लाइन पार करते हैं। यह परंपरा 1971 और 1999 में करगिल वार के समय और बालाकोट हमले के दौर में भी नहीं टूटी।

  2. हुसैनीवाला क्षेत्र पंजाब के फिरोजपुर क्षेत्र 11 किमी दूर है। यहां भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की समाधि स्थल है, लेकिन भारत-पाक सीमा पर यहां होने वाली शाम की बीटिंग रिट्रीट पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। 

  3. झंडा उतारने के लिए सीमा पार क्यों करते हैं?

    दिल्ली में बीएसएफ जनसंपर्क अधिकारी शिबेन्दु भारद्वाज ने बताया कि भारत-पाकिस्तान का बंटवारा रेवेन्यू क्षेत्र के आधार पर हुआ था, जिसमें हुसैनीवाला का यह क्षेत्र भी था। इसके बाद इस क्षेत्र में भारत व पाकिस्तान के मध्य अंतरराष्ट्रीय बाउंड्री (आईबी) तय की गई।

  4. शिबेन्दु भारद्वाज ने बताया, नक्शे के हिसाब से बांटना आसान था। लेकिन जमीन पर यह रेखा उकेरना कठिन था, क्योंकि जमीन पर रेखा उकेरते वक्त कुछ किलो मीटर और कई मीटर का अंतर आ जाता है। 1965 में बीएसएफ बनने के बाद पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी शुरू हुई।

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