इलेक्शन खास / चुनाव खर्च जुटाने के लिए क्राउडफंडिंग का ट्रेंड



Trend of crowdfunding to raise election expenses
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Trend of crowdfunding to raise election expenses

  • छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी जनता के पैसे से ही आम चुनाव लड़ रहे
  • आप की पूर्व दिल्ली से उम्मीदवार आतिशी मार्लेना अब तक 57 लाख रुपए जुटा चुकी हैं

Dainik Bhaskar

Apr 21, 2019, 04:21 AM IST

नई दिल्ली. लोकसभा चुनावों में होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपए  है। इतनी रकम जुटाना बड़ी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होता, पर निर्दलीय या छोटी पार्टी के प्रत्याशियों को प्रचार में होने वाले खर्च के लिए पैसा जुटाना मशक्कत भरा हो सकता है। चंदा लेने जैसे तरीके हैं लेकिन अब देश में इस लोकसभा चुनावों से क्राउडफंडिंग का ट्रेंड रफ्तार पकड़ रहा है। सीपीआई (एम) उम्मीदवार कन्हैया कुमार ने चुनाव के लिए क्राउडफंडिंग से 70 लाख रुपए जुटाए।

 

आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व दिल्ली से उम्मीदवार आतिशी मार्लेना अब तक 57 लाख रुपए जुटा चुकी हैं। राजनीतिक पार्टियों में सबसे ज्यादा आप और सीपीआई के उम्मीदवार क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनके अलावा आरजेडी, बसपा और कांग्रेस तक के कुछ उम्मीदवार इन प्लेटफॉर्म्स पर हैं। 

 

निर्दलियों में बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव भी शामिल हैं, जो वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि वे अभी 9,100 रुपए ही जुटा पाए हैं। नागपुर सीट के भाजपा के नितिन गडकरी के खिलाफ लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार नाना पटोले ने करीब 81,000 रुपए जुटाए हैं।


देश में राजनीतिक क्राउडफंडिंग की शुरुआत आम आदमी पार्टी ने की थी जो अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन चंदा इकट्‌ठा करती रही है। लेकिन अब ऐसे क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म शुरू हो गए हैं, जो उम्मीदवारों की सीधे मदद कर रहे हैं। ऐसे ही एक प्लेटफॉर्म अवरडेमोक्रेसी पर 65 से ज्यादा फंडरेजिंग कैंपेन चल रहे हैं, जिनमें दानदाता कुलमिलाकर लगभग 2 करोड़ रुपए दान कर चुके हैं। यह प्लेटफॉर्म पत्रकार बिलाल जैदी और आनंद मंगनाले ने जनवरी में शुरू किया था।

 

बिलाल बताते हैं कि क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म निर्दलियों और छोटी पार्टियों के उम्मीदवार के लिए बहुत पायदेमंद साबित हुए हैं। पहल केटो और मिलाप जैसी क्राउडफंडिंग वेबसाइट से भी चुनावों के लिए पैसा जुटाया गया है, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों की वजह से इसमें परेशानी होती थी। आयोग के नियमों के अनुसार 20 हजार से ज्यादा का दान होने पर पूरा पता और पैन नंबर आदि देना होता है। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए अवरडेमोक्रेसी नाम का अलग प्लेटफॉर्म बनाया गया।


हालांकि क्राउडफंडिंग का ट्रेंड अभी शुरुआती दौर में ही है। कन्हैया और आप नेता अतिशी जैसे कुछ बड़े नामों को छोड़कर ज्यादातर बहुत बड़ी राशि नहीं जुटा पाए हैं। फंडरेजर कैंपेन चला रहे कुछ उम्मीदवारों का तो खाता भी नहीं खुला है। बिलाल कहते हैं क्राउडफंडिंग कर रहे उम्मीदवारों की सोशल मीडिया पर अच्छी पहुंच होना जरूरी है। लिंक जितनी ज्यादा  शेयर होगी दान मिलने की संभावना उतनी बढ़ेगी। 

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