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हाइवे पर सड़ रहे कश्मीरी सेब:ट्रक 2-3 दिन रुकवाए जा रहे, ताकि बागवान बड़े कारोबारियों के स्टोरेज में सेब बेचें

श्रीनगर2 महीने पहलेलेखक: हारून रशीद
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कश्मीर में सेब की बंपर फसल हुई है। लेकिन, बागवानों की मेहनत के फल जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर सड़ रहे हैं। सेब से लदे ट्रक 2-3 दिन तक रुके रहते हैं। ऐसा महीने भर से जारी है। बागबान इसे एक तरह की लूट बता रहे हैं। उनका आरोप है कि बड़े कोल्ड स्टोरेज चलाने वाले कारोबारियों के दबाव में ऐसा किया जा रहा है, ताकि बागवान सेब को ओपन मंडी में लेकर जाने की बजाय कोल्ड स्टोरेज वालों को बेचने के लिए मजबूर हों। वो इसलिए, क्योंकि 2-3 दिन में हाईवे पर पड़ा सेब सड़ने लगता है। इसके दाम तेजी से गिरने लगते हैं।

एप्पल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफएफआई) ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को शिकायत दी है। फेडरेशन का दावा है कि करीब 5,000 ट्रक रुके हुए हैं। न सिर्फ बागवानों, बल्कि छोटे कारोबारियों को भी नुकसान हो रहा है, बल्कि 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

फेडरेशन का दावा है कि करीब 5,000 ट्रक रुके हुए हैं। इससे 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।
फेडरेशन का दावा है कि करीब 5,000 ट्रक रुके हुए हैं। इससे 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

शिकायतों के बावजूद हालात नहीं सुधरे
कश्मीर से सीजन में रोज 2,000 ट्रक सेब निकलते हैं। हाइवे पर खड़े ट्रकों में सेब खराब हो गए हैं। जब वे कई दिनों तक हाइवे पर फंसने के बाद एक साथ मंडी में जाते हैं तो अपने-आप ही दाम गिर जाते हैं। प्रशासन का तर्क है कि हाइवे को भूस्खलन और निर्माण कार्य के कारण बंद करना पड़ता है। कड़े विरोध के बाद प्रशासन ने कार्रवाई भी की है। हाईवे के ट्रैफिक एसएसपी को हटा दिया गया है। लेकिन, बागवानों का कहना है कि इससे भी हालात नहीं सुधरे हैं। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने इसे आर्थिक आतंकवाद बता रही हैं।

कोल्ड स्टोरेज पहुंचने लगे छोटे बागवान
एएफएफआई ने कहा कि राजमार्ग जानबूझकर बाधित किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, बड़ी कंपनियों के पास कोल्ड स्टोरेज की सुविधा है, जो छोटे व्यापारियों और बागवानों के पास नहीं है। नतीजतन, बागवान अपने सेब देश की मंडियों में भेजने के बजाए यहां काम कर रहीं इन कंपनियों को देने लगे हैं।

बागवान अपने सेब देश की मंडियों में भेजने के बजाए बड़ी कंपनियों के कोल्ड स्टोरेज को दे रहे हैं।
बागवान अपने सेब देश की मंडियों में भेजने के बजाए बड़ी कंपनियों के कोल्ड स्टोरेज को दे रहे हैं।

20 किलो की एक पेटी में 300-400 रुपए का नुकसान
श्रीनगर के एक बागवान ने बताया कि एक बड़े ट्रक में सेब की 1,200 पेटी आती हैं। हर पेटी में कम से कम 20 किलो सेब होते हैं। तीन दिन सेब फंसा रहे तो हर पेटी पर 300-400 रुपए का नुकसान हो रहा है।

सेब की न्यूनतम कीमत 60 रुपए/किलो की जाए
एएफएफआई ने केंद्र सरकार से मांग की है कि किसानों को एक किलो सेब के लिए कम से कम 60 रुपए मिलने चाहिए। एएफएफआई के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर प्रशासन खुद भी बागवान से कम दाम में सेब खरीद रहा है। इसे स्टोर कर रहा है। लेकिन, मंडी में डिमांड बढ़ने पर प्रशासन सेब को बाजार में बेच रहा है। इस प्रक्रिया में भी बागबान ठगे महसूस कर रहे हैं। क्योंकि, उनके सेब से प्रशासन कमाई कर रहा है।