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नए IT नियमों पर टकराव:ट्विटर की दलील- हम अपनी पॉलिसी फॉलो करते हैं; संसदीय समिति ने कहा- देश का कानून बड़ा है, आपकी नीति नहीं

गाजियाबाद3 महीने पहले

नए IT नियमों को लेकर ट्विटर और केंद्र सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। IT मिनिस्ट्री से जुड़ी संसदीय समिति के सामने शुक्रवार को ट्विटर के प्रतिनिधियों की पेशी हुई। समिति ने कंपनी के अधिकारियों से पूछा कि क्या आप देश के कानून का पालन करते हैं?

इस पर ट्विटर के प्रतिनिधियों ने कहा- हम अपनी पॉलिसी को फॉलो करते हैं, जो देश के कानून के अनुसार है। इस दलील पर समिति ने आपत्ति जताते हुए कंपनी से तल्ख लहजे में कहा कि हमारे यहां देश का कानून सबसे बड़ा है, आपकी पॉलिसी नहीं।

पॉलिसी पर निर्णय को लेकर भी किए सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अगुआई वाली संसदीय समिति ने ट्विटर को अपने प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर तलब किया था। शुक्रवार को ट्विटर इंडिया के लीगल विंग से आयुषी कपूर और पॉलिसी विंग की शगुफ्ता कामरान ने अपना पक्ष रखा।

समिति ने दोनों अफसरों से यह भी पूछा कि कंपनी में आपकी जॉइनिंग कैसे हुई है? महत्वपूर्ण पॉलिसीज पर निर्णय लेने के मामले में आपके पास कितना अधिकार है? इस पर वे चुप रहे।

चीफ कम्प्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
समिति ने कंपनी में चीफ कम्प्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति को लेकर दोनों अफसरों को फटकार भी लगाई और कहा कि देश के कानून का उल्लंघन करने पर कंपनी पर क्यों न जुर्माना लगाया जाए। इस पर अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने अंतरिम चीफ कम्प्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति कर दी है।

हालांकि समिति ने कहा कि नियमों के मुताबिक चीफ कम्प्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति जरूरी है। आप नियमाें को अनदेखा नहीं कर सकते। सदस्यों ने यह भी कहा कि आयरलैंड में कानून का पालन नहीं करने के लिए ट्विटर पर जुर्माना लगाया गया था। समिति ने अगली बैठक में गूगल, यूट्यूब, फेसबुक और अन्य कंपनियों को बुलाने का फैसला किया है, लेकिन तारीख अभी तय नहीं की गई है।

बैठक में गाजियाबाद की घटना का जिक्र नहीं
सूत्रों ने कहा कि भाजपा के एक सांसद ने आज की बैठक में गाजियाबाद की घटना और ट्विटर की भूमिका को उठाने की मांग की, लेकिन यह चर्चा का हिस्सा नहीं था। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाले पैनल की बैठक का एजेंडा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और डिजिटल स्पेस में महिला सुरक्षा पर विशेष जोर देने सहित सोशल और ऑनलाइन न्यूज मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना था।

गाजियाबाद केस के बाद बढ़ीं मुश्किलें
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट और अभद्रता के मामले में ट्विटर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर ली है। पुलिस ने ट्विटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष माहेश्वरी को लीगल नोटिस भेजा है। यह नोटिस 17 जून यानी गुरुवार को भेजा गया। पुलिस ने उन्हें 7 दिन के अंदर लोनी बॉर्डर पुलिस स्टेशन आकर बयान दर्ज कराने को कहा है।

गाजियाबाद पुलिस ने नोटिस में क्या कहा?
नोटिस में कहा गया है कि ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया और ट्विटर INC के जरिए कुछ लोगों ने अपने ट्विटर हैंडल का प्रयोग करते हुए समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की। इन कोशिशों को रोकने के लिए कंपनी की तरफ से कोई संज्ञान नहीं लिया गया और ऐसे समाज विरोधी संदेश को लगातार वायरल होने दिया गया। पुलिस ने स्पष्टीकरण देने के लिए ट्विटर को एक हफ्ते की मोहलत दी है।

3 पॉइंट में समझें- गाजियाबाद में क्या हुआ था?

  • उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस ने लोनी इलाके में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग के साथ मारपीट और अभद्रता किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद ट्विटर समेत 9 पर FIR दर्ज की थी। इन सभी पर घटना को गलत तरीके से सांप्रदायिक रंग देने की वजह से यह एक्शन लिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि एक मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा गया और उसकी दाढ़ी काट दी गई।
  • पुलिस के मुताबिक, मामले की सच्चाई कुछ और ही है। पीड़ित बुजुर्ग ने आरोपी को कुछ ताबीज दिए थे, जिनके परिणाम न मिलने पर नाराज आरोपी ने इस घटना को अंजाम दिया, लेकिन ट्विटर ने इस वीडियो को मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं दिया। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़ित ने अपनी FIR में जय श्री राम के नारे लगवाने और दाढ़ी काटने की बात दर्ज नहीं कराई है।
  • जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें अय्यूब और नकवी पत्रकार हैं, जबकि जुबैर फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज का लेखक है। डॉ. शमा मोहम्मद और निजामी कांग्रेस नेता हैं। वहीं, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष उस्मानी को कांग्रेस ने पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतारा था।

ट्विटर कठघरे में क्यों?
FIR में लिखा गया कि गाजियाबाद पुलिस की ओर से स्पष्टीकरण जारी करने के बावजूद आरोपियों ने अपने ट्वीट्स डिलीट नहीं किए, जिसके कारण धार्मिक तनाव बढ़ा। इसके अलावा ट्विटर इंडिया और ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से भी उन ट्वीट को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। इनके खिलाफ IPC की धारा 153, 153-A, 295-A, 505, 120-B, और 34 के तहत FIR दर्ज की गई है।