पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • BJP Congress Income Sources | BJP Congress National Party Unknown Sources Income Amount Latest Updates On Association For Democratic Reforms ADR Report

2018-19 में भाजपा को सबसे ज्यादा 2410 करोड़ रुपए की कमाई, लेकिन इसमें से 67% कहां से आया, पता ही नहीं

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • 2018-19 में भाजपा, कांग्रेस, टीएमसी, राकांपा, बसपा सीपीआई और सीपीआई (एम) ने कुल 3749.37 करोड़ रु. जुटाए
  • आकलन पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग को दी गई आईटी रिटर्न-डोनेशन और इलेक्टोरल बॉन्ड से मिली रकम के आधार पर हुआ

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2018-19 में 7 राष्ट्रीय पार्टियों ने 3749.37 करोड़ रुपए की कमाई हुई। इन पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा, बसपा, माकपा और भाकपा शामिल हैं। इन पार्टियों की तरफ से दाखिल कमाई के ब्यौरे से पता चला कि 2018-19 में इन 7 पार्टियों को 2512.98 करोड़ रुपए यानी 67% की कमाई अनजान स्त्रोत से हुई है जबकि 1236.39 करोड़ रुपए की कमाई का सोर्स पार्टियों ने दिया है। यह बात एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में सामने आई है। यह आकलन पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग को दी गई इनकम टैक्स रिटर्न, डोनेशन और इलेक्टोरल बॉन्ड से जुटाई रकम की जानकारी के आधार पर किया गया है।


2018-19 में भाजपा को 2410.08 करोड़ रुपए की कमाई हुई, जो 7 राष्ट्रीय पार्टियों की कुल कमाई का 65% हिस्सा है। भाजपा की कुल कमाई में से 1612.04 करोड़ रुपए अनजान सोर्स से मिले हैं। कांग्रेस को पिछले साल 918.03 करोड़ रुपए की कमाई हुई, जिसमें से 728.88 करोड़ रुपए अनजान सोर्स से मिले थे। इसमें 7 पार्टियों की कुल कमाई में से 1960.68 करोड़ रु. इलेक्टोरल बॉन्ड से मिले।

पार्टीकुल कमाईअनजान सोर्स से कमाई
भाजपा2410.081612.04 (66.8%)
कांग्रेस918.03728.88 (79.4%)
तृणमूल192.6597.28 (50.5%)
बसपा69.790 (0%)
राकांपा50.7135.77 (70.5%)
माकपा100.9636.39 (36.05%)
भाकपा7.152.61 (36.5%)
कुल3749.372512.98 (67%)

पार्टियों को नकद में सिर्फ 71.44 लाख रु. मिले
2018-19 की डोनेशन रिपोर्ट के मुताबिक, इन पार्टियों को 71.44 लाख रु.नकद में मिले थे। मौजूदा समय में राजनीतिक पार्टियों को इलेक्टोरल बॉन्ड से 20 हजार से कम राशि डोनेट करने वालों की जानकारी देने की जरूरत नहीं होती। इसके कारण इन्हें 67% राशि कहां से मिली इस बात का पता नहीं चल पाता।

2016 में पार्टियों के डोनेशन संबंधी नियम बदले गए थे
मौजूदा एनडीए सरकार ने वित्त कानून 2016 से विदेशी चंदा नियंत्रण कानून 2010 में बदलाव कर चंदे की रकम की सीमा हटा दी थी। वित्त कानून 2017 से जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29, आयकर कानून और कंपनी एक्ट में बदलाव करते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड से धन देने-लेने वालों का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। इसके बाद चुनाव आयोग के पास न तो चंदे का स्त्रोत जानने का अधिकार रहा और न ये पता लगाया जा सका कि यह धन काला है या सफेद।