पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • National
  • Rajasthan Politics News Updates: Rahul Gandhi Brought Ashok Gehlot And Sachin Pilot Closer

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

राजस्थान में बगावत की कहानी है पुरानी:राहुल ने जयपुर में रोड शो किया था; पोस्टरों में सिर्फ पायलट थे, गहलोत नहीं; फिर राहुल ने इसी रैली में दोनों को गले मिलवाया

6 महीने पहलेलेखक: गौरव पांडेय
  • कॉपी लिंक
फोटो 2018 विधानसभा चुनाव की है। जगह जयपुर रामलीला मैदान है। यहीं पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सचिन पायलट और अशोक गहलोत को गले मिलवाया था, ताकि मनमुटाव दूर हो जाए। - Dainik Bhaskar
फोटो 2018 विधानसभा चुनाव की है। जगह जयपुर रामलीला मैदान है। यहीं पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सचिन पायलट और अशोक गहलोत को गले मिलवाया था, ताकि मनमुटाव दूर हो जाए।
  • बगावत की स्क्रिप्ट 2018 चुनाव में ही लिखी जा चुकी थी, तब चुनाव कैंपेन के दौरान पायलट और गहलोत बात नहीं कर रहे थे
  • अशोक गहलोत ने जोधपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान अगले मुख्यमंत्री के सवाल पर पायलट समेत 6 लोगों का नाम बताया था
  • राजस्थान में सचिन पायलट 6 साल तक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रहे, इतने लंबे समय तक राज्य कांग्रेस में कोई अध्यक्ष नहीं रहा

राजस्थान की सियासत नया मोड़ ले चुकी है। जिस सचिन पायलट के नेतृत्व में 2018 में कांग्रेस को राज्य की सत्ता मिली थी, उस पायलट को अब अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से हटाया जा चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये तो होना ही था, क्योंकि राजस्थान कांग्रेस में इस बगावत की स्क्रिप्ट 2018 के विधानसभा चुनाव में ही लिखी जा चुकी थी।

तब चुनाव कैंपेन शुरू होने से ऐन वक्त तक तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत एक-दूसरे के साथ मंच साझा करने से भी बचते थे। यह बात राहुल गांधी भी बखूबी जानते थे, उन्होंने दोनों के बीच मनमुटाव को दूर कराने की कोशिश भी की थी। 

राहुल गांधी जयपुर में प्रचार करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने 13 किमी लंबा रोड शो किया, लेकिन पूरे रास्ते में अशोक गहलोत हर जगह पोस्टर से गायब मिले। नारे भी सिर्फ सचिन पायलट के लग रहे थे। यह देखकर राहुल गांधी हैरान रह गए। उन्हें पता चल गया कि पायलट-गहलोत साथ नहीं रहेंगे तो चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा।

रोड-शो के बाद राहुल रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। यहां मंच पर उन्होंने सबसे पहले खड़े होकर जनता के सामने दोनों को हाथ और गले मिलवाया। दोनों मुस्कुराते हुए गले भी लगे थे। तब राहुल की कोशिश सफल हो गई थी, पार्टी चुनाव भी जीत गई, सरकार भी बन गई। लेकिन दोनों के बीच का मनमुटाव नहीं खत्म हुआ।

  • विधानसभा चुनाव से पहले की कहानी

जब गहलोत ने अपने सिवाय 6 लोगों का नाम सीएम पद की रेस में बता दिया
बात, 2018 विधानसभा चुनाव की है। अशोक गहलोत जोधपुर में चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे, यहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेस की। इसमें उनसे कांग्रेस की ओर से अगले मुख्यमंत्री को लेकर सवाल पूछा गया तो गहलोत बोले- हमारी पार्टी में एक-दो नहीं, 6 लोग मुख्यमंत्री बन सकते हैं। उन्होंने बकायदा सभी के नाम लेकर भी बताया। उन्होंने लालचंद कटारिया, रामेश्वर डूडी, सचिन पायलट, डॉ. सीपी जोशी, गिरिजा व्यास, रघु शर्मा का नाम लिया था। 

उपचुनावों में जीत का सारा श्रेय सचिन पायलट को मिला था 

2014 की मोदी लहर में अपनी सीट नहीं बचा पाने के बावजूद सचिन पायलट राजस्थान में पूरे वक्त डटे रहे और वसुंधरा राजे सरकार को लगातर जमीन पर घेरते रहे। इसके बाद 2018 में राजस्थान में उपचुनाव हुए। इसमें कांग्रेस को दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर जीत मिली तो इसका श्रेय सचिन पायलट को मिला। सचिन ने कांग्रेस की झोली में अलवर के साथ अजमेर की सीट भी डाल दी, जिस पर 2014 में उन्हें खुद हार मिली थी।

सचिन पायलट विधानसभा चुनाव के दौरान रोजाना 5 से 6 रैलियां और रोड शो करते थे, इनमें उन्हें व्यापक जनसमर्थन भी मिल रहा था।
सचिन पायलट विधानसभा चुनाव के दौरान रोजाना 5 से 6 रैलियां और रोड शो करते थे, इनमें उन्हें व्यापक जनसमर्थन भी मिल रहा था।

विधानसभा चुनाव कैंपेन शुरू होने के पहले तक सबस कुछ पायलट ही थे

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, विधानसभा चुनावों से ठीक पहले तक राजस्थान में कांग्रेस के सबसे बड़े फेस सचिन पायलट ही थे। पायलट ने भी खुद को पूरी तरह से झोंक रखा था, लेकिन धीरे-धीरे चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ा तो राजस्थान कांग्रेस के कुछ पुराने नेताओं ने राष्ट्रीय नेतृत्व को फीडबैक दिया कि अशोक गहलोत को राज्य में वापस लौटना चाहिए। गहलोत बतौर कांग्रेस महासचिव दिल्ली में डटे हुए थे। इससे पहले उन्होंने गुजरात में राहुल गांधी के पूरे कैंपेन को लीड किया था। हर मंच पर वो राहुल के साथ नजर आए थे।

राहुल के साथ राजस्थान के रण में अशोक गहलोत की हुई थी एंट्री

बारी राजस्थान की आई, राहुल गांधी के राजस्थान कैंपेन की रणनीति तैयारी होने लगी। अशोक गहलोत फिर एक बार फिर मुख्य भूमिका में आ गए। गृह राज्य होने की वजह से उनकी दिलचस्पी भी कुछ ज्यादा ही थी। इस दौरान गहलोत के कुछ पुराने साथियों ने राहुल से उन्हें खुलकर मैदान में उतारने की अपील कर दी। तर्क दिया कि यदि गहलोत नहीं उतरे तो वसुंधरा राजे के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का जो फायदा मिल सकता है, वो हाथ से फिसल सकता है। 

टिकट बंटवारे में सचिन पायलट से ज्यादा गहलोत की चली थी

बात, विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे की आई। कांग्रेस हाईकमान ने इसमें गहलोत को अहमियत दी। कहा गया कि गहलोत का अनुभव प्रत्याशी चयन में काम आएगा। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते सचिन पायलट की बातों को भी अहमियत मिली, लेकिन गहलोत को जहां भी मौका मिला, वो टांग अड़ाने से नहीं चूके। सचिन के खिलाफ एक ही चीज गई वो रही, उनके युवा समर्थकों का जगह-जगह टिकट नहीं मिलने को लेकर किए गए बवाल।

  • राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं

पायलट ने यह कदम मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा से ही उठाया है

  • राजस्थान की राजनीति पर तीन दशक से पैनी नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक सीताराम झालानी कहते हैं कि सचिन पायलट ने यह कदम मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा से ही उठाया है। यह महत्वाकांक्षा उनमें बहुत पहले से ही आ गई थी। बात, 2014 लोकसभा चुनाव की है। दौसा के सिकंदरा में गुर्जरों की मीटिंग चल रही थी। उसमें सचिन पायलट भी मौजूद थे। गुर्जर भाजपा को समर्थन करने की रणनीति बना रहे थे, इसी दौरान पायलट बोले- आप लोग मुझे अगला सीएम बनते हुए नहीं देखना चाहते हो। इसलिए जो आदमी इतना बड़ा सपना देखता चला आ रहा हो, वो कैसे शांत रह सकता है। उसकी महत्वाकांक्षा तो होगी ही। 
  • झालानी कहते हैं कि इसके बावजूद पायलट के लिए गहलोत को मात देना आसान काम नहीं है। वह भी राजनीति के चतुर और मंझे खिलाड़ी हैं। यह दिखा भी दिया है। पायलट के पार्टी बनाने का फायदा भी नहीं है, क्योंकि राजस्थान में नई पार्टी का भविष्य नहीं होता है। भाजपा में जाएंगे तो सफल होना मुश्किल है, क्योंकि उनमें तमाम बड़े नेता पहले से यहां मौजूद हैं और वे इनकी बात क्यों सुनेंगे। पायलट की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा सीएम पद है, इसलिए वे भाजपा में तभी जाएंगे, जब सीएम पद उन्हें मिले। हां, वे राजस्थान में गुर्जरों के बड़े नेता हैं, इसीलिए इतने बड़े नाम हैं। वे अपने पिता राजेश पायलट की तरह ही साफा भी पहनते हैं, उनकी पहचान भी साफा है। हालांकि ग्राउंड कनेक्शन बहुत अच्छा नहीं है। 
  • झालानी के मुताबिक राजस्थान में सचिन पायलट कांग्रेस के 6 साल तक अध्यक्ष रहे। इतने लंबे समय तक राज्य कांग्रेस में कोई अध्यक्ष नहीं रहा। हां, यह जगह उन्होंने अपनी मेहनत से बनाई है। लेकिन राजस्थान इतना विशाल है कि लोगों की बातों को समझने के लिए लंबा राजनीतिक अनुभव चाहिए। इसलिए पायलट को अभी इंतजार करना चाहिए था। फिलहाल, गहलोत सरकार को खतरा नजर नहीं आ रहा है। 

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- इस समय ग्रह स्थितियां आपको कई सुअवसर प्रदान करने वाली हैं। इनका भरपूर सम्मान करें। कहीं पूंजी निवेश करने के लिए सोच रहे हैं तो तुरंत कर दीजिए। भाइयों अथवा निकट संबंधी के साथ कुछ लाभकारी योजना...

और पढ़ें

Open Dainik Bhaskar in...
  • Dainik Bhaskar App
  • BrowserBrowser