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एक और विदेशी टीके की उम्मीद:भारत में फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी की प्रक्रिया आखिरी दौर में, CEO ने कहा- समझौते को जल्द अंतिम रूप देंगे

नई दिल्ली4 महीने पहले
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भारत में अमेरिकी कंपनी फाइजर की वैक्सीन जल्द आ सकती है। कंपनी के CEO अल्बर्ट बौर्ला का कहना है कि वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिलने की प्रक्रिया फाइनल स्टेज में है। मुझे उम्मीद है कि हम सरकार के साथ जल्द ही एक समझौते को अंतिम रूप देंगे। वह मंगलवार को हर साल होने वाली बायोफार्मा एंड हेल्थकेयर समिट में बोल रहे थे। यह आयोजन इस बार वर्चुअली किया जा रहा है।

इससे पहले खबरें आई थीं कि भारत को फाइजर की वैक्सीन के लिए अगस्त तक इंतजार करना पड़ सकता है। फाइजर के अमेरिकी सूत्रों ने बताया था कि भारत सरकार और कंपनी के बीच जवाबदेही वाली शर्त पर सहमति नहीं बन पा रही है। कंपनी चाहती है कि वैक्सीन के दुष्प्रभाव होने पर उसकी जवाबदेही न रहे। 90% एफिकेसी वाली यह वैक्सीन फाइजर ने जर्मनी की फर्म बायोएनटेक के साथ साझेदारी कर डेवलप की है।

मॉडर्ना से भी बातचीत जारी
भारत सरकार फाइजर की वैक्सीन के लिए एक महीने पहले राजी हो गई थी। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे लेकर अमेरिका में फाइजर के कुछ अफसरों से मुलाकात भी की थी, लेकिन अब इस डील में देरी होती दिख रही है। एक और अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना से भी इसी मसले पर बातचीत चल रही है।

नीति आयोग के अध्यक्ष डॉ. वीके पॉल ने मंगलवार को बताया कि अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस महीने की शुरुआत में उन्होंने कहा था कि भारत में फाइजर और मॉडर्ना के टीकों को मंजूरी देने पर विचार किया जा रहा है।

सितंबर तक सप्लाई संभव
फाइजर के अफसरों के मुताबिक कंपनी जुलाई में ही टीके देने को तैयार थी, लेकिन भारत सरकार ने बात तय होने के बाद भी अब तक कोई लिखित प्रपोजल नहीं दिया है। इसलिए अब अगस्त के आखिर या सितंबर में ही भारत को टीके की सप्लाई संभव हो सकेगी। वो भी तब, अगर भारत सरकार तत्काल कुछ फैसला लेती है। मई में फाइजर के अधिकारियों ने बताया था कि कंपनी जुलाई से अक्टूबर के बीच 5-7 करोड़ वैक्सीन डोज भारत भेजेगी।

भारत में अभी 3 वैक्सीन और एक पाउडर
सीरम सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन का इस्तेमाल वैक्सीनेशन ड्राइव में किया जा रहा है। रूस की स्पुतनिक-वी को भी भारत में इस्तेमाल किए जाने की मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा DRDO ने कोविड की रोकथाम के लिए 2-DG दवा बनाई है। इसके इमरजेंसी इस्तेमाल को भी मंजूरी दे दी गई है। यह एक पाउडर होता है, जिसे पानी में घोलकर दिया जाता है।

और वैक्सीन की जरूरत क्यों?
केंद्र सरकार दिसंबर 2021 तक भारत के हर नागरिक को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए तैयारी पूरी होने का दावा किया जा रहा है। सरकार कह चुकी है कि दिसंबर तक देश के पास वैक्सीन के 216 करोड़ डोज होंगे। इसका मतलब है कि 108 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जा सकेगी। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ज्यादा वैक्सीन को मंजूरी देनी पड़ेगी।

अभी कोवीशील्ड बना रहा सीरम इंस्टीट्यूट पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के बावजूद हर महीने 10 करोड़ डोज ही बना पा रहा है। हालांकि केंद्र सरकार पर्याप्त डोज होने का दावा कर रही है, लेकिन दिल्ली समेत कई राज्य अब भी वैक्सीन की कमी का आरोप लगा रहे हैं।

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