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मौत की टनल में जिंदगी की तलाश:नदी में पानी बढ़ने की वजह से रोका गया रेस्क्यू ऑपरेशन फिर शुरू, ऋषिगंगा के वाटर लेवल पर ड्रोन से नजर रखी जा रही

देहरादूनएक वर्ष पहले

चमोली के तपोवन में हुए हादसे का आज पांचवां दिन है। NTPC की टनल में फंसे 39 वर्कर्स को बचाने की कोशिशें जारी हैं। गुरुवार को सेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू के लिए भारी मशीनरी और मैन पावर को चमोली पहुंचाया गया। NDRF और SDRF के लिए 14 पैसेंजर्स और 1400 किलो लोड, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के 5 अधिकारी और 3 टन सामान को यहां पहुंचाया गया।

नदी में पानी बढ़ने से रोकना पड़ा था ऑपरेशन
इससे पहले दोपहर में अचानक से ऋषिगंगा नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा। इस वजह से कुछ देर के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। इसके बाद चुनंदा मेंबर्स की टीम के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन फिर से शुरू किया गया। NDRF के मुताबिक, पानी बढ़ने की वजह से टीम को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया था। वहीं, चमोली पुलिस ने आसपास के इलाकों को अलर्ट कर दिया गया है। लोगों से सतर्क रहने के लिए कहा गया है। उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। वाटर लेवल पर ड्रोन से नजर रखी जा रही है।

रेस्क्यू स्ट्रैटजी बदली गई थी
इससे पहले ऑपरेशन की स्ट्रैटजी में बदलाव करते हुए टनल में 72 मीटर अंदर ड्रिलिंग की जा रही थी। 13 मीटर नीचे तक होल किया जाएगा। इसके बाद अंदर कैमरा डालकर नीचे से गुजर रही दूसरी टनल में वर्कर्स के सुरक्षित होने का पता लगाया जाएगा। ड्रिलिंग देर रात करीब दो बजे शुरू की गई थी। पहले 75 मिलीमीटर चौड़ाई का होल किया जा रहा था, लेकिन करीब एक मीटर के बाद उसमें दिक्कत आई। अब करीब 50 मिलीमीटर चौड़ाई का होल किया जा रहा है।

पहले मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने का प्लान था
इस टनल की लंबाई करीब ढाई किलोमीटर है। इसका ज्यादातर हिस्सा आपदा में आए मलबे से भरा पड़ा है। आर्मी, ITBP, NDRF और SDRF की टीमें बुधवार तक टनल में सीधे पहुंचने की कोशिश कर रही थीं। 120 मीटर अंदर तक मलबा साफ कर लिया गया। हालांकि, इसमें मुश्किलें नजर आईं तो ड्रिलिंग पर विचार किया गया।

ड्रोन और रिमोट सेंसर की मदद भी ली जा रही
रेस्क्यू टीम ने बुधवार को सुरंग में अंदर के हाल जानने के लिए ड्रोन और रिमोट सेंसिंग उपकरणों की मदद भी ली थी। हालांकि, इसमें भी ज्यादा कामयाबी नहीं मिली।

उत्तराखंड में अब तक 32 के शव मिले
उत्तराखंड आपदा के बाद रेस्क्यू के तीसरे दिन, यानी मंगलवार को 6 और शव मिले थे। अब तक 32 लोगों के शव मिल चुके हैं। सरकार के मुताबिक, हादसे के बाद 206 लोग लापता हो गए। इनमें से 174 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

आपदा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
चमोली में 7 फरवरी को आई आपदा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें साफ दिख रहा है कि किस तरह जलस्तर बढ़ने के बाद नदियों ने रास्ते में पड़ने वाली हर चीज को तबाह कर दिया। इस वीडियो में कुछ वर्कर्स यहां बने बांध पर पानी और मलबे से बचने की कोशिश करते दिखाई दे रहे थे, लेकिन वो बच नहीं पाए।

गृह मंत्री ने सदन को बताया- उत्तराखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं
गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में उत्तराखंड हादसे पर बताया रविवार को समुद्र तल से करीब 5600 मीटर की ऊंचाई पर 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का ग्लेशियर गिरा था। इससे धौलीगंगा और ऋषिगंगा में बाढ़ की स्थिति बन गई। साथ ही कहा कि उत्तराखंड सरकार के मुताबिक निचले इलाकों में अब बाढ़ का खतरा नहीं है, पानी का लेवल भी कम हो रहा है। ज्यादातर इलाकों में बिजली सप्लाई शुरू हो गई है। साथ ही बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) 5 डैमेज पुलों को रिपेयर कर रहा है।

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