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महिला अफसर के हाथों में चमोली की कमान:रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रहीं ITBP की DIG अपर्णा, दुनिया की 7 चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकीं

चमोली3 महीने पहले
IPS अपर्णा ने 2019 में अमेरिका के माउंट डेनाली की चढ़ाई करके 7 समिट्स पर चढ़ाई का रिकॉर्ड बना लिया था। (फाइल फोटो)

आपदा ने उत्तराखंड के चमोली में बहुत कुछ तहस-नहस कर दिया। जिधर देखिए, बस मलबा ही दिखेगा। काम पर निकले बहुत सारे लोग अब तक अपने घरों को नहीं पहुंचे हैं। किसी का बेटा गायब है, तो किसी के मां-बाप। किसी का भाई गायब है, तो किसी की पत्नी। कल से ही सभी के परिजनों की आंखें उन मलबों पर टिकीं हैं, जहां ITBP के जवान रेस्क्यू में जुटे हैं और इस टीम को लीड कर रही हैं IPS ऑफिसर अपर्णा कुमार।

सरकार ने उत्तराखंड में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान अपर्णा को सौंप दी है। अपर्णा ITBP की DIG हैं। कर्नाटक के शिवमोगा की रहने वाली अपर्णा साल 2002 कैडर की IPS अधिकारी हैं। स्कूलिंग कर्नाटक में हुई। इसके बाद इन्होंने BA, LLB की पढ़ाई की। पति संजय कुमार भी यूपी कैडर के IAS अफसर हैं।

अपर्णा कुमार 7 समिट्स यानी दुनिया की 7 सबसे ऊंची चोटियों, पर तिरंगा फहराने वाली देश की पहली IPS ऑफिसर हैं। इन्होंने माउंट एवरेस्ट, माउंट किलिमंजारो, माउंट एल्ब्रुश, कार्सटेंस पिरामिड, विन्सन मैसिफ, माउंट एकांकागुआ और माउंट डेनाली पर चढ़ाई करने में कामयाबी हासिल की है। ये सभी चोटियां 7 अलग-अलग महाद्वीपों में हैं।

चमोली के तपोवन में रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी लेतीं अपर्णा कुमार। आज यानी सोमवार की सुबह ही उन्होंने पूरे ऑपरेशन का चार्ज संभाला।
चमोली के तपोवन में रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी लेतीं अपर्णा कुमार। आज यानी सोमवार की सुबह ही उन्होंने पूरे ऑपरेशन का चार्ज संभाला।

39 साल की हुई तब शुरू किया पहाड़ों पर चढ़ना

अपर्णा ने अपनी जिंदगी में पहली बार 2002 में बर्फ से ढंके पहाड़ों को देखा। वे बताती हैं कि उस वक्त वो मसूरी में एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज की ट्रेनिंग कर रहीं थीं। तभी मन बना लिया था कि वो पहाड़ों पर चढ़ाई करेंगी। हालांकि, अपने सपने को पूरा करने के लिए पहला कदम बढ़ाने में उन्हें 11 साल लग गए। 2013 में उन्होंने माउंटेनियर फाउंडेशन का कोर्स किया। तब उनकी उम्र 39 साल हो चुकी थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे ITBP और NDRF के जवानों के साथ अपर्णा।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे ITBP और NDRF के जवानों के साथ अपर्णा।

2014 से चोटियों को फतह करने लगीं

अपर्णा माउंटेनियर कोर्स पूरा करन के एक साल बाद ही यानी 2014 में पहली बार अफ्रीका की सबसे ऊंची माउंट किलिमंजारो (19,340 फीट) की चोटी पर चढ़ीं। इसी साल ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया के सबसे ऊंचे पर्वत कार्स्टेंस पिरामिड (16,024 फीट) पर फतह हासिल की।

2015 में अर्जेंटीना की सबसे ऊंची माउंट एकांकाकागुआ (22,840 फीट) की चोटी पर चढ़ाई की। इसी साल रूस की कोकेशियान रेंज की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुश (18,510 फीट) पर भी चढ़ने में कामयाब हो गईं। 2016 में अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विन्सन मासिफ (16,050 फीट) पर चढ़ाई की। इसी साल दुनियाा की सबसे ऊंची चोटी नेपाल की माउंट एवरेस्ट फतह की। वह यहां 23 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचने में कामयाब रहीं।

2019 में IPS अपर्णा को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तेंजिंग नॉर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित किया।
2019 में IPS अपर्णा को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तेंजिंग नॉर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित किया।

2019 में माइनस 40 डिग्री तापमान में दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचीं

2017 में नेपाल में मौजूद दुनिया की आठवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट मानसालु पर तिरंगा फहराया। अपर्णा दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाली पहली भारतीय ऑफिसर हैं। 2019 में वह माइनस 40 डिग्री तापमान में दक्षिणी ध्रुव तक पहुंच गई थीं। 2019 में ही उन्होंने अमेरिका की माउंट डेनाली की चढ़ाई करके 7 समिट्स पर चढ़ाई का रिकॉर्ड बना लिया था।

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