उत्तराखंड सरकार की पलायन रोकने की पहल का असर:722 पुलिसकर्मियों ने 6 जिलों के भूतिया गांवों को फिर से बसाया, पुश्तैनी घरों को सुधारा

देहरादून12 दिन पहलेलेखक: मनमीत
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नेपाल और चीन की सीमा से सटे गांवों से शहरों की तरफ पलायन कर रहे लोगों को रोकने में उत्तराखंड सरकार सफल नजर आ रही है। पलायन को रोकने के लिए 2017 में सरकार ने पुलिसकर्मियों की ट्रांसफर नीति में बदलाव किए थे। अब उसके सुखद नतीजे सामने आने लगे हैं।

722 पुलिसकर्मी अपने गांवों में बसे
ट्रांसफर नीति के तहत 722 पुलिसकर्मियों को उनके ही पैतृक गांव में पोस्टिंग दी गई। सभी परिवार के साथ गांव में ही बस गए।इससे पलायन के कारण खाली हो चुके गांवों की रौनक लौटने लगी है। पुलिसकर्मियों ने गांव में अपने पैतृक घरों की मरम्मत भी करवाई।

चम्पावत, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों में पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग की गई है। उत्तराखंड में पलायन रिकॉर्ड स्तर पर है। पलायन आयोग के अनुसार पिछले दशक में 32 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। लगभग तीन हजार गांव यहां पूरी तरह खाली होकर भुतहा गांव बन चुके हैं। कई गांवों में 100 से भी कम लोग बचे हैं।

पुलिसकर्मी खेती भी कर रहे हैं
अपने गांवों में नौकरी पाने वाले पुलिसकर्मियों ने गांवों के साथ-साथ खेती भी करने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर चंपावत जिले में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात सुनील जोशी पहले मैदानी इलाके में अपने परिवार के साथ रहते थे। ट्रांसफर नीति आने के बाद गांव आकर उन्होंने अपने पैतृक घर को ठीक करवाया और बच्चों का पास के ही स्कूल में एडमिशन करवा दिया। खाली समय में उन्होंने खेती शुरू की। इससे उनकी आमदनी में इजाफा हुआ।

परिवार के साथ रहने से पुलिकर्मियों का तनाव होगा कम
डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि पहले प्रशासनिक आधार पर तबादले होने पर बाहर के लोग यहां नहीं आना चाहते थेे। अब स्थानीय लोग ही यहां बसने लगे हैं। उत्तराखंड पुलिस के महानिदेशक अशोक कुमार के मुताबिक, पुलिसकर्मियों की तैनाती उनके गांव के पास वाली तहसील में ही की गई है, ताकि वे सुबह-शाम अपने घर लौट सकें। परिवार के साथ रहने से पूरी संभावना है कि इससे पुलिसकर्मियों का तनाव भी कम होगा।