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नीति आयोग / उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने नकदी संकट वाले बयान पर सफाई दी, कहा- मीडिया न डरे, न डर फैलाए



राजीव कुमार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष। राजीव कुमार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष।
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राजीव कुमार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष।राजीव कुमार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष।

  • राजीव कुमार ने गुरुवार को एक इवेंट में कहा था कि देश में 70 साल में ऐसा नकदी संकट नहीं देखा
  • उन्होंने पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा था कि 2009 से 2014 तक बेहिसाब कर्ज बंटा, जिससे एनपीए बढ़ा

Dainik Bhaskar

Aug 23, 2019, 09:27 PM IST

नई दिल्ली. नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार देश में बढ़ रहे नकदी संकट वाले अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मीडिया से मेरी अपील है कि वे मेरे बयान को गलत तरीके से पेश करना बंद करें। सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए साहसिक कदम उठा रही है और यह काम जारी रखेगी। इसलिए डरने और डर फैलाने की कोई जरूरत नहीं है।”

इवेंट में कहा था- देश ने 70 साल में ऐसा नकदी संकट नहीं देखा

  1. एक और ट्वीट में राजीव ने कहा, “पहले ही आपदा का अनुमान लगा लेने वालों को यह मान लेना चाहिए कि स्थिति सरकार के नियंत्रण में है और वह इकोनॉमी के साहस को वापस लाने का पूरा प्रयास करेगी।” 

  2. राजीव कुमार ने फाइनेंशियल सेक्टर की मौजूदा स्थिति पर गुरुवार को एक इवेंट में कहा कि 70 साल में ऐसा नकदी संकट नहीं देखा। पूरा सेक्टर हिला हुआ है, कोई किसी पर भरोसा नहीं कर रहा। इससे निपटने के लिए विशेष कदम उठाने होंगे। कुमार ने यह भी कहा कि सरकार कई उपायों पर विचार कर रही है। सही समय पर कदम उठाए जाएंगे।

  3. नोटबंदी के बाद प्राइवेट सेक्टर में कर्ज की स्थितियां बदल गईं: राजीव कुमार

    राजीव कुमार ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में कोई किसी को कर्ज नहीं देना चाहता। हर कोई नकदी दबाकर बैठा है। सरकार को प्राइवेट सेक्टर का डर दूर करने के लिए जरूरी उपाय करने चाहिए। नोटबंदी, जीएसटी, और इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के बाद बीते सालों में स्थितियां बदल चुकी हैं। प्राइवेट सेक्टर में पहले 35% कैश रोटेट हो रहा था लेकिन, अब यह काफी कम हो गया है।

  4. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुमार ने यह भी कहा कि 2009 से 2014 तक आंख बंद कर कर्ज बांटने की वजह से एनपीए बढ़ा। इसलिए, स्थिति यहां तक पहुंची। एनपीए बढ़ने की वजह से बैंकों ने कर्ज देना कम कर दिया। इसलिए, लोग नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) का रुख करने लगे। एनबीएफसी की क्रेडिट ग्रोथ में 25% इजाफा हो गया। लेकिन, एनबीएफसी सेक्टर इसे संभाल नहीं पाया। कई बड़े ग्राहकों ने डिफॉल्ट कर दिया। इससे अर्थव्यवस्था में मंदी शुरू हो गई।

  5. जनवरी-मार्च में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.8% रही थी। जापान की फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी नॉमुरा के मुताबिक इकोनॉमिक स्लोडाउन की वजह से अप्रैल-जून में ग्रोथ रेट घटकर 5.7% रहने की आशंका है। हालांकि, जुलाई-सितंबर तिमाही में कुछ रिकवरी की उम्मीद भी जताई है।

     

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